12 जनवरी 2026, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ AIIMS में भर्ती: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को 12 जनवरी 2026 को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, धनखड़ को 10 जनवरी को दो बार बेहोशी आई थी, जब वे वॉशरूम जा रहे थे। यह घटना सप्ताहांत पर हुई, और सोमवार को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टरों ने MRI जांच की सलाह दी है। 74 वर्षीय धनखड़ की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, बेहोशी के ये दौर अचानक आए, और परिवार ने तुरंत चिकित्सा सहायता ली। एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा है, और आगे की जांच से उनके स्वास्थ्य की गहराई से पड़ताल की जाएगी।
यह घटना धनखड़ के लिए एक नई स्वास्थ्य समस्या नहीं है। वे जुलाई 2025 में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे चुके हैं, और इस्तीफे का मुख्य कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बताई गई थीं। उस समय से ही उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है, और यह नवीनतम घटना उनके पिछले स्वास्थ्य इतिहास से जुड़ी हो सकती है।
स्वास्थ्य इतिहास और पूर्व घटनाएं
जगदीप धनखड़ का स्वास्थ्य इतिहास पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों से भरा रहा है। मार्च 2025 में, जब वे उपराष्ट्रपति थे, उन्हें सीने में दर्द और असहजता की शिकायत के बाद एम्स में भर्ती किया गया था। उस समय, 73 वर्षीय नेता को रात करीब 2 बजे अस्पताल ले जाया गया था, और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई थी। डॉक्टरों ने तब भी जांच की थी, लेकिन कोई गंभीर समस्या नहीं पाई गई थी। हालांकि, यह घटना उनके स्वास्थ्य को लेकर पहली बड़ी चिंता का कारण बनी थी।
धनखड़, जो राजस्थान के एक प्रमुख जाट नेता हैं, ने राजनीतिक जीवन में लंबा सफर तय किया है। वे 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे, और इससे पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। उनके राजनीतिक करियर में कई विवादास्पद फैसले शामिल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य ने हमेशा उनकी सक्रियता को प्रभावित किया है। जुलाई 2025 में इस्तीफे के बाद, उन्होंने सार्वजनिक जीवन से थोड़ा दूरी बनाई थी, लेकिन हाल की घटना ने फिर से ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ बेहोशी के दौर हृदय संबंधी समस्याओं, कम रक्तचाप या न्यूरोलॉजिकल मुद्दों का संकेत हो सकते हैं, जो धनखड़ के मामले में जांच का विषय हैं।
चिकित्सा जांच और वर्तमान स्थिति
AIIMS में भर्ती होने के बाद, धनखड़ को न्यूरोलॉजी विभाग में रखा गया है। डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन की सिफारिश की है, जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की जांच के लिए महत्वपूर्ण है। सूत्रों के अनुसार, बेहोशी के दौर वॉशरूम में हुए, जो संभवतः अचानक रक्तचाप गिरने या अन्य कारणों से हो सकते हैं। अस्पताल ने बयान जारी कर कहा है कि उनकी स्थिति स्थिर है, और कोई गंभीर खतरा नहीं है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।
AIIMS, जो भारत का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, में धनखड़ को VIP वार्ड में रखा गया है। परिवार के सदस्य उनके साथ हैं, और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में MRI से ब्रेन स्ट्रोक या अन्य समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। धनखड़ की उम्र को देखते हुए, डॉक्टर हृदय और मस्तिष्क दोनों की जांच पर जोर दे रहे हैं। पिछली घटनाओं से सीखते हुए, इस बार जांच अधिक विस्तृत होगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना पर राजनीतिक हलकों में चिंता व्यक्त की गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धनखड़ के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछी। भाजपा के कई नेता, जिनमें अमित शाह और जेपी नड्डा शामिल हैं, ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा किए। विपक्षी नेताओं ने भी स्वास्थ्य की कामना की, जो दर्शाता है कि धनखड़ का राजनीतिक कद अभी भी महत्वपूर्ण है।
सामाजिक स्तर पर, राजस्थान और हरियाणा में उनके समर्थकों ने प्रार्थनाएं कीं। धनखड़ जाट समुदाय के प्रमुख नेता हैं, और उनके स्वास्थ्य को लेकर समुदाय में चिंता है। मीडिया में यह खबर प्रमुखता से छाई हुई है, और कई चैनलों ने उनके राजनीतिक योगदान पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्ग नेताओं के स्वास्थ्य प्रबंधन पर बहस छेड़ दी है, जहां तनाव और व्यस्त जीवनशैली को दोष दिया जा रहा है।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
धनखड़ की भर्ती से राजनीतिक परिदृश्य पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे पद से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, यह घटना बुजुर्ग नेताओं के स्वास्थ्य प्रबंधन पर सवाल उठाती है। भारत में कई वरिष्ठ नेता स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, और यह मामला स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई गई, तो धनखड़ को लंबे आराम की सलाह दी जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहोशी के दौर को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह हृदय रोग, डिहाइड्रेशन या तनाव का संकेत हो सकता है। धनखड़ के मामले में, उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन इन कारकों को बढ़ावा दे सकता है। भविष्य में, वे सार्वजनिक जीवन से और दूरी बना सकते हैं, लेकिन उनके अनुभव से राजनीति में योगदान जारी रह सकता है।
निष्कर्ष
जगदीप धनखड़ की एम्स में भर्ती एक चिंताजनक घटना है, जो उनके स्वास्थ्य इतिहास को ध्यान में लाती है। 10 जनवरी को दो बार बेहोशी आने के बाद, AIIMS में MRI और अन्य जांचें चल रही हैं। उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समर्थन मिल रहा है, जो उनके कद को दर्शाता है। उम्मीद है कि वे जल्द स्वस्थ होंगे और अपना योगदान जारी रखेंगे। यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सर्वोपरि है, चाहे कितना भी बड़ा पद हो।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया