12 जनवरी 2026, Manipur में ईंधन स्टेशनों पर अनिश्चितकालीन बंद: Manipur के बिश्नुपुर जिले में 8 जनवरी 2026 की शाम को एक पेट्रोल पंप पर बम हमला हुआ, जिसने राज्य के ईंधन वितरण व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। यह हमला मोइरांग कुम्बी रोड पर स्थित M/S एलिडास फ्यूल स्टेशन पर हुआ, जहां अज्ञात हमलावरों ने दोपहिया वाहन से आकर विस्फोटक फेंका। विस्फोट से स्टेशन को नुकसान पहुंचा, लेकिन सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ। यह घटना मणिपुर में जारी हिंसा और उग्रवाद की एक और कड़ी है, जहां पेट्रोल पंप मालिकों को लगातार धमकियां और हमले का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पहले, 6 दिसंबर 2025 को एक अन्य पेट्रोल डीलर पर हमला हुआ था, जो हाल के महीनों में डीलरों पर दूसरा जानलेवा प्रयास था। मणिपुर पेट्रोलियम डीलर्स फ्रेटर्निटी (MPDF) ने इन घटनाओं को राज्य में सुरक्षा की कमी का प्रमाण बताया। Manipur, जो जातीय संघर्ष और उग्रवादी गतिविधियों से जूझ रहा है, में ऐसे हमले असामान्य नहीं हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में इंटीग्रेटेड एंटी-एक्सटॉर्शन सेल स्थापित किया है, लेकिन डीलरों का कहना है कि ये उपाय अपर्याप्त हैं। बिश्नुपुर जिला, इम्फाल वैली का हिस्सा, पहले भी हिंसा का शिकार रहा है, जहां उग्रवादी समूह ईंधन व्यवसाय से जबरन वसूली की कोशिश करते हैं।
बंद के कारण और एमपीडीएफ का फैसला
MPDF ने 9 जनवरी 2026 को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को एक पत्र भेजकर अपनी मांगें रखीं और 10 जनवरी से इम्फाल वैली तथा आसपास के क्षेत्रों में सभी पेट्रोल पंपों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान किया। मुख्य कारण बम हमले के अलावा डीलरों पर लगातार पड़ रही धमकियां और जबरन वसूली की मांगें हैं। MPDF ने कहा कि राज्य अधिकारियों द्वारा सुरक्षा के लिए किए गए “कड़े कदमों” के बावजूद खतरे बने हुए हैं, और हालिया विस्फोट इसका प्रमाण है।
डीलरों ने पिछले महीने राज्य अधिकारियों से मुलाकात में इन मुद्दों को उठाया था, जहां उन्होंने पेट्रोलियम डीलरों पर लगाई जा रही “अत्यधिक धनराशि की मांगों” की शिकायत की। एमपीडीएफ की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, पंप बंद रहेंगे। यह बंद इम्फाल वैली के अलावा परिधीय क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है, जहां ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।
मांगें और सरकारी प्रतिक्रिया
MPDF की प्रमुख मांगें हैं: बम हमले से हुए नुकसान की भरपाई, पेट्रोल पंपों, डीलरों और स्टाफ की सुरक्षा में वृद्धि, भविष्य में किसी भी बम हमले या अपहरण के लिए सरकार की पूर्ण जिम्मेदारी, और यदि कोई डीलर या स्टाफ घायल या मारा जाता है तो अधिकतम मौद्रिक मुआवजा। विशेष रूप से एलिडास फ्यूल स्टेशन के नुकसान की मांग की गई है।
10 जनवरी को MPDF प्रतिनिधियों ने होम कमिश्नर के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों से न्यू सेक्रेटेरिएट साउथ ब्लॉक में मुलाकात की, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ। सरकार ने नागरिकों से धमकी की रिपोर्टिंग के लिए हेल्पलाइन शुरू की है और इंटीग्रेटेड एंटी-एक्सटॉर्शन सेल बनाया है, लेकिन डीलरों का कहना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं। राज्यपाल को भेजे पत्र में एमपीडीएफ ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अभी तक कोई ठोस सरकारी बयान नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा बलों ने इम्फाल ईस्ट जिले में 27 बमों को निष्क्रिय किया है, जो राज्य में सुरक्षा अभियानों का हिस्सा है।
जनता पर प्रभाव
बंद के दूसरे दिन (11 जनवरी) तक ईंधन की कमी से ब्लैक मार्केट फल-फूल रहा है। दोपहिया वाहन चालक अनौपचारिक स्रोतों से 140-180 रुपये प्रति लीटर की दर पर पेट्रोल खरीद रहे हैं। इम्फाल वैली में पैनिक बाइंग शुरू हो गई है, और ईंधन की कमी से परिवहन, व्यापार और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कई लोग ईंधन के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पंप बंद होने से वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हैं।
यह संकट Manipur की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहा है, जहां ईंधन की कमी से कृषि, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्य में पहले से ही जातीय तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित है, और यह बंद स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
व्यापक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह घटना Manipur में उग्रवाद और जबरन वसूली की समस्या को उजागर करती है। राज्य में हाल के महीनों में पेट्रोल पंपों पर कई हमले हुए हैं, जो उग्रवादी समूहों की सक्रियता दर्शाते हैं। यदि बंद जारी रहा, तो ईंधन संकट गहरा सकता है, जिससे ब्लैक मार्केट और कीमतों में वृद्धि होगी। एमपीडीएफ ने कहा कि बिना सुरक्षा के वे सामान्य रूप से काम नहीं कर सकते।
सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए, जैसे सुरक्षा बढ़ाना और वसूली रोधी अभियान तेज करना। अन्यथा, यह बंद राज्य की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।
निष्कर्ष
Manipur का यह ईंधन संकट सुरक्षा की कमी और उग्रवाद का परिणाम है। MPDF की मांगें जायज हैं, और सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि जनता को राहत मिले। अन्यथा, राज्य में अराजकता बढ़ सकती है।
Sources: एनडीटीवी, हिंदुस्तान टाइम्स