12 जनवरी 2026, Israel का अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों पर प्रतिबंध: Israel सरकार ने हाल ही में गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में काम कर रहे 37 अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे क्षेत्र में पहले से ही विकट मानवीय स्थिति और भी बदतर होने की आशंका है। यह फैसला 30 दिसंबर 2025 को घोषित किया गया, और 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया। प्रभावित संगठनों में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ), ऑक्सफैम, वर्ल्ड विजन, मर्सी कोर्प्स और रिलीफ इंटरनेशनल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जो स्वास्थ्य सेवाएं, पानी आपूर्ति, भोजन वितरण और अन्य जीवनरक्षक सहायता प्रदान करते हैं। इस प्रतिबंध के पीछे इज़राइल का दावा है कि ये संगठन नए रजिस्ट्रेशन नियमों का पालन नहीं कर रहे, जो मार्च 2025 में लागू किए गए थे। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और प्रभावित एनजीओ इसे मानवीय सहायता को बाधित करने का एक जानबूझकर प्रयास मानते हैं, जो गाजा में लाखों लोगों की जान जोखिम में डाल सकता है।
इस घटना की पृष्ठभूमि समझने के लिए, हमें इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के संदर्भ में देखना होगा। गाजा और वेस्ट बैंक, जो फिलिस्तीनी क्षेत्र हैं, लंबे समय से इज़राइली कब्जे और प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। 2023-2024 के इज़राइल-हमास युद्ध के बाद से गाजा में मानवीय संकट चरम पर है, जहां बुनियादी ढांचा नष्ट हो चुका है, अस्पताल बर्बाद हैं और लाखों लोग विस्थापित हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा की 2.3 मिलियन आबादी में से 1 मिलियन से अधिक लोग भुखमरी और बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
इज़राइल सरकार का दृष्टिकोण
Israel ने मार्च 2025 में नए नियम लागू किए, जिनके तहत इन NGO को अपने फिलिस्तीनी स्टाफ की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे नाम, पता और संपर्क विवरण, इज़राइली अधिकारियों को सौंपने होते हैं। इज़राइल का कहना है कि यह सुरक्षा उपाय है, ताकि हमास या अन्य मिलिटेंट समूहों से घुसपैठ रोकी जा सके। डायस्पोरा मंत्रालय ने इसे “आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को रोकने” का तरीका बताया है। लेकिन एनजीओ का तर्क है कि यह जानकारी साझा करना उनके स्टाफ की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है, क्योंकि इससे वे इज़राइली हमलों या प्रतिशोध का शिकार हो सकते हैं।
इज़राइली सरकार के दृष्टिकोण से, यह प्रतिबंध आवश्यक है। अधिकारियों का कहना है कि 23 एनजीओ ने इन नियमों का पालन किया है, जिससे सहायता जारी रहेगी। लेकिन 37 संगठनों ने अस्वीकार कर दिया, इसलिए उनके परमिट रद्द कर दिए गए। इज़राइल का आरोप है कि कुछ एनजीओ हमास से जुड़े हैं या आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, हालांकि कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए। यह कदम Israel की व्यापक नीति का हिस्सा लगता है, जिसमें पहले यूएनआरडब्ल्यूए (संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी) पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। Israel का मानना है कि ये संगठन राजनीतिक रूप से पक्षपाती हैं और फिलिस्तीनी कारणों को समर्थन देते हैं, जो उनके सुरक्षा हितों के खिलाफ है।
अंतरराष्ट्रीय और फिलिस्तीनी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तीखी रही है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इसे “अमानवीय” बताया और चेतावनी दी कि इससे गाजा में जीवनरक्षक सेवाएं ठप हो जाएंगी। 53 अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह प्रतिबंध 60 दिनों के बाद पूरी तरह से लागू होगा, लेकिन पहले से ही सहायता प्रभावित हो रही है। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी निंदा की, और कहा कि इससे गाजा में भोजन, चिकित्सा और पानी की कमी और बढ़ेगी। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के महासचिव क्रिस्टोफर लॉकर ने कहा कि अगर एमएसएफ को गाजा से बाहर किया गया, तो लाखों लोगों की चिकित्सा पहुंच खत्म हो जाएगी। कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, क्योंकि जेनेवा कन्वेंशन के तहत कब्जाधारी शक्ति को सहायता सुनिश्चित करनी होती है।
फिलिस्तीनी पक्ष से प्रतिक्रिया और भी कड़ी है। फिलिस्तीनी मानवाधिकार संगठन अल-हक ने इसे “नरसंहार का हिस्सा” बताया, क्योंकि इससे युद्ध अपराधों की जांच रुक जाएगी। फिलिस्तीनी राष्ट्रीय पहल के मुस्तफा बरघौती ने कहा कि Israel जानबूझकर गाजा को निर्जन बनाने की कोशिश कर रहा है। वेस्ट बैंक में भी, जहां इज़राइली सेना की कार्रवाई में हाल ही में दो फिलिस्तीनी मारे गए, यह प्रतिबंध विस्थापन और हिंसा को बढ़ावा दे सकता है। फिलिस्तीनी नेताओं का मानना है कि यह प्रतिबंध पत्रकारों और गवाहों को रोकने का तरीका है, ताकि गाजा में होने वाली घटनाओं की रिपोर्टिंग न हो।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस प्रतिबंध के प्रभाव दूरगामी हैं। गाजा में पहले से ही सर्दी के कारण ठंड से मौतें हो रही हैं, और अब सहायता रुकने से भुखमरी बढ़ सकती है। एमएसएफ जैसे संगठन कैंसर वार्ड और पानी उपचार संयंत्रों की मरम्मत में लगे थे, जो अब बंद हो जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इससे 1 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित होंगे, विशेषकर बच्चे और महिलाएं। भविष्य में, अगर यह प्रतिबंध जारी रहा, तो अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इज़राइल के खिलाफ मामले मजबूत हो सकते हैं, क्योंकि इसे नरसंहार का हिस्सा माना जा सकता है।
निष्कर्ष
निष्कर्ष में, यह प्रतिबंध न केवल मानवीय सहायता को बाधित करता है, बल्कि इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को और जटिल बनाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दबाव बढ़ाना चाहिए ताकि सहायता बहाल हो। अन्यथा, गाजा और वेस्ट बैंक में लाखों निर्दोष जीवन खतरे में पड़ जाएंगे।
Sources: मिडिल ईस्ट मॉनिटर, डॉक्टर्स विदाउट बोर्डरस