11 जनवरी 2026, रिलायंस Jio का 2026 IPO प्लान: रिलायंस Jio प्लेटफॉर्म्स के IPO की खबरें सुर्खियों में हैं। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली यह कंपनी 2026 की पहली छमाही में 2.5% पब्लिक ऑफरिंग के साथ IPO लाने की योजना बना रही है, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इस रिपोर्ट में हम इस प्लान की डिटेल्स, बैकग्राउंड, वैल्यूएशन और मार्केट इम्पैक्ट पर चर्चा करेंगे। यह रिपोर्ट आपकी वेबसाइट के लिए तैयार की गई है, जिसमें हाल की रिपोर्ट्स और एनालिसिस शामिल हैं।
IPO की घोषणा और महत्व
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अगस्त 2025 में कंपनी की 48वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में जियो के IPO की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी जरूरी तैयारियां कर रही है और भारतीय मार्केट अथॉरिटीज से अप्रूवल मिलने पर 2026 की पहली छमाही में लिस्टिंग होगी। यह कदम जियो को ग्लोबल स्तर पर मजबूत बनाने का हिस्सा है, जहां कंपनी टेलीकॉम से आगे AI और डिजिटल सर्विसेज में विस्तार कर रही है।
IPO प्लान की डिटेल्स
टाइमलाइन और तैयारी
Jio का IPO 2026 की पहली छमाही, यानी जून तक लॉन्च होने की उम्मीद है। रिलायंस ने JPMorgan और Citigroup जैसे दो बड़े बैंक को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने के लिए नियुक्त किया है। 2019 में अंबानी ने पहली बार जियो को पांच साल में लिस्ट करने की बात कही थी, लेकिन 2025 से आगे बढ़ाकर कंपनी ने हाई वैल्यूएशन के लिए डिजिटल बिजनेस में एक्सपैंशन पर फोकस किया। अब, रेगुलेटरी अप्रूवल्स के साथ यह प्लान ट्रैक पर है।
स्टेक सेल और फंडरेजिंग
रिपोर्ट्स के अनुसार, Jio 2.5% स्टेक फ्लोट करके $4 बिलियन (करीब 33,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा जुटाने की योजना बना रही है। यह अमाउंट भारत के अब तक के सबसे बड़े IPO Airtel या LIC से भी ज्यादा हो सकता है। फंड्स का इस्तेमाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर, 5G एक्सपैंशन और न्यू डिजिटल वेंचर्स में किया जाएगा। Jio की पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इस IPO से अपनी डिजिटल आर्म को इंडिपेंडेंट वैल्यू क्रिएट करने का मौका देगी।
वैल्यूएशन अनुमान
एनालिस्ट्स Jio की वैल्यूएशन $134-170 बिलियन (करीब 11-14 लाख करोड़ रुपये) के बीच आंक रहे हैं। यह वैल्यूएशन जियो के 500 मिलियन से ज्यादा यूजर्स, मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और AI पार्टनरशिप्स पर आधारित है। Nvidia के साथ AI इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ने Jio को टेक जायंट के रूप में स्थापित किया है। तुलना में, 2020 में जियो ने Meta, Google जैसे इनवेस्टर्स से $20 बिलियन जुटाए थे, जो अब IPO के लिए मजबूत बेस दे रहा है।
जियो की ग्रोथ स्टोरी और बैकग्राउंड
टेलीकॉम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
2016 में लॉन्च हुई Jio ने फ्री डेटा ऑफर्स से भारतीय टेलीकॉम मार्केट को बदल दिया। आज, यह भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर है, जिसमें 5G रोलआउट पूरा हो चुका है। मुकेश अंबानी ने AGM में कहा कि जियो अब AI-ड्रिवन सर्विसेज पर फोकस कर रही है, जैसे JioBrain और क्लाउड कंप्यूटिंग। Nvidia पार्टनरशिप से जियो AI इंफ्रा बिल्ड कर रही है, जो IPO वैल्यू को बूस्ट देगी।
इनवेस्टर इंटरेस्ट और पास्ट फंडिंग
2020 में Jio ने 13 ग्लोबल इनवेस्टर्स से $20 बिलियन जुटाए, जिसमें Meta (9.99% स्टेक) और Google (7.7%) शामिल थे। यह फंडिंग जियो को $65 बिलियन वैल्यूएशन पर ले आई। अब, IPO से Jio पब्लिक मार्केट में एंट्री करेगी, जहां इनवेस्टर्स हाई ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटिशन (Airtel, Vodafone Idea) और रेगुलेटरी चैलेंजेस चुनौतियां हैं।
मार्केट इम्पैक्ट और चुनौतियां
भारतीय IPO मार्केट पर प्रभाव
Jio का IPO भारतीय स्टॉक मार्केट को बूस्ट दे सकता है, खासकर जब विदेशी इनवेस्टर्स जनवरी 2026 में 11,789 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह IPO रिटेल इनवेस्टर्स को आकर्षित करेगा और टेलीकॉम सेक्टर में इन्वेस्टमेंट बढ़ाएगा। CLSA जैसे ब्रोकरेज हाउस जियो को ‘Buy’ रेटिंग दे रहे हैं, वैल्यूएशन $146 बिलियन अनुमानित। हालांकि, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताएं (US टैरिफ्स) असर डाल सकती हैं।
संभावित चुनौतियां
IPO की सफलता वैल्यूएशन पर निर्भर है, जो मार्केट सेंटिमेंट से प्रभावित होगी। जियो को रेगुलेटरी अप्रूवल्स (SEBI) और हाई डेटा यूजेज पर प्राइसिंग स्ट्रैटेजी बैलेंस करनी होगी। इसके अलावा, AI एक्सपैंशन में इन्वेस्टमेंट रिटर्न्स महत्वपूर्ण होंगे। अंबानी की रणनीति Jio को ग्लोबल टेक लीडर बनाने की है, लेकिन कॉम्पिटिशन से निपटना चुनौतीपूर्ण होगा।
निष्कर्ष: फ्यूचर ऑफ जियो
रिलायंस Jio का 2026 IPO मुकेश अंबानी की विजन का हिस्सा है, जो कंपनी को $170 बिलियन वैल्यू वाली ग्लोबल एंटिटी बनाएगा। 2.5% ऑफरिंग से $4 बिलियन जुटाकर जियो AI और डिजिटल ग्रोथ पर फोकस करेगी। निवेशकों के लिए यह बड़ा अवसर है, लेकिन रिस्क्स भी हैं। कुल मिलाकर, यह IPO भारतीय इकोनॉमी को नई दिशा दे सकता है।
Sources: इकनोमिक टाइम्स