10 जनवरी 2026, Russia ने ओरेसनिक हाइपरसोनिक मिसाइल का दूसरी बार इस्तेमाल किया: Russia ने अपनी नवीनतम हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ‘ओरेसनिक’ का दूसरी बार यूक्रेन पर इस्तेमाल किया है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से 10 गुना तेज उड़ती है और हवाई रक्षा प्रणालियों से बच सकती है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह हमला पश्चिमी यूक्रेन के ल्विव शहर के पास महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किया गया। यह कदम यूक्रेन युद्ध में एक नया मोड़ ला सकता है और पश्चिमी देशों को सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना की पृष्ठभूमि, तकनीकी विवरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और संभावित प्रभावों की विस्तृत चर्चा करेंगे।
पृष्ठभूमि: ओरेसनिक मिसाइल का विकास और पहला इस्तेमाल
ओरेसनिक मिसाइल रूस की उन्नत हथियार प्रणाली का हिस्सा है, जिसका विकास 2020 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ। यह इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है, जो परमाणु-सक्षम है और हाइपरसोनिक गति प्राप्त करती है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे ‘अपराजेय’ बताया है, जो पश्चिमी हवाई रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती है। पहला इस्तेमाल नवंबर 2024 में यूक्रेन पर किया गया था, जब रूस ने इसे कीव के पास एक सैन्य लक्ष्य पर दागा। उस समय पुतिन ने कहा कि यह मिसाइल ‘नई पीढ़ी का हथियार’ है, जो युद्ध की दिशा बदल सकती है।
युद्ध का संदर्भ और रणनीतिक महत्व
यूक्रेन युद्ध, जो फरवरी 2022 में शुरू हुआ, अब अपने चौथे वर्ष में है। रूस ने विभिन्न हथियारों का इस्तेमाल किया है, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों का उपयोग सीमित रहा। ओरेसनिक का दूसरा इस्तेमाल 9 जनवरी 2026 को हुआ, जो रूस की सबसे आक्रामक कार्रवाई मानी जा रही है। यह हमला ल्विव के पास हुआ, जो नाटो सीमा के करीब है, और इसमें अन्य मिसाइलों व ड्रोनों का भी इस्तेमाल किया गया। रूस का दावा है कि यह यूक्रेन की सैन्य क्षमता को निशाना बनाने के लिए था, लेकिन यूक्रेन ने इसे नागरिक क्षेत्रों पर हमला बताया।
तकनीकी विवरण: हाइपरसोनिक गति और विशेषताएं
ओरेसनिक मिसाइल की गति मैक 10 (ध्वनि की गति से 10 गुना) है, जो इसे पारंपरिक मिसाइलों से अलग करती है। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (एचजीवी) तकनीक पर आधारित है, जो वायुमंडल में तेजी से बदलाव कर सकती है और रडार से बच सकती है। इसकी रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर है, और यह परमाणु या पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अमेरिकी पैट्रियट या यूरोपीय एस-400 जैसी प्रणालियों को बेअसर कर सकती है।
अन्य हाइपरसोनिक हथियारों से तुलना
Russia के पास पहले से किंजाल और जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं, लेकिन ओरेसनिक अधिक उन्नत है। किंजाल हवाई जहाज से लॉन्च होती है, जबकि ओरेसनिक जमीन से। चीन और अमेरिका भी हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहे हैं, लेकिन रूस का दावा है कि वह इस क्षेत्र में आगे है। इस मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में रूस की तकनीकी श्रेष्ठता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: निंदा और चिंता
इस हमले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे ‘युद्ध अपराध’ बताया और नाटो से अधिक सहायता मांगी। अमेरिका ने कहा कि यह ‘पश्चिम को चेतावनी’ है, जबकि यूरोपीय संघ ने नए प्रतिबंधों की घोषणा की। नाटो महासचिव ने चिंता जताई कि यह यूरोप की सुरक्षा को खतरा है। रूस ने इन प्रतिक्रियाओं को ‘हिस्टीरिया’ बताया और कहा कि यह यूक्रेन की आक्रामकता का जवाब है।
सहयोगी देशों की भूमिका
चीन और ईरान ने Russia का समर्थन किया, जबकि भारत और ब्राजील जैसे देशों ने तटस्थ रुख अपनाया। संयुक्त राष्ट्र में चर्चा हुई, लेकिन रूस के वीटो के कारण कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ।
संभावित प्रभाव: युद्ध की दिशा और वैश्विक सुरक्षा
यह घटना यूक्रेन युद्ध को और लंबा खींच सकती है। Russia की हाइपरसोनिक क्षमता से यूक्रेन की रक्षा प्रणालियां कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे नाटो को हस्तक्षेप पर विचार करना पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर, यह हथियारों की दौड़ को तेज करेगा, जहां अमेरिका और चीन अपनी हाइपरसोनिक तकनीक को मजबूत करेंगे।
दीर्घकालिक परिणाम
यूक्रेन में नागरिक हताहत बढ़ सकते हैं, और आर्थिक प्रभाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होगा। शांति वार्ता की संभावना कम हुई है, क्योंकि Russia अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है।
निष्कर्ष: एक नया खतरा
ओरेसनिक मिसाइल का दूसरा इस्तेमाल Russia की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, जो पश्चिम को चुनौती देता है। यह घटना वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित करेगी और युद्ध के समाधान की जरूरत को रेखांकित करती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं निर्णायक होंगी।
Sources: अल जज़ीरा,