10 जनवरी 2026, Trump प्रशासन द्वारा संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका की वापसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से अमेरिका को दर्जनों संयुक्त राष्ट्र (UN) निकायों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग करने का फैसला किया है। इस कदम को बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून पर सीधा हमला माना जा रहा है। Trump प्रशासन का दावा है कि ये संगठन अमेरिकी हितों के विपरीत हैं, जबकि आलोचक इसे वैश्विक सहयोग की कमजोरी बता रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम इस फैसले की पृष्ठभूमि, वर्तमान घटनाक्रम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और संभावित प्रभावों की विस्तृत पड़ताल करेंगे।
पृष्ठभूमि: ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय अलगाववाद की नीति
Trump का पहला कार्यकाल (2017-2021) अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका की वापसी के लिए जाना जाता है। उन्होंने पेरिस जलवायु समझौते, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनेस्को से अमेरिका को अलग किया था। इन कदमों का उद्देश्य ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूत करना था, जहां ट्रंप ने इन संगठनों को अमेरिकी करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया। 2025 में दोबारा सत्ता में आने के बाद Trump ने इस नीति को और तेज किया। जनवरी 2026 में जारी कार्यकारी आदेश 14199 इसी का हिस्सा है, जो अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग करता है, जिसमें 31 से अधिक यूएन से जुड़े निकाय शामिल हैं।
ट्रंप की पहली टर्म की वापसियां
Trump के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) और ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (TPP) से भी हाथ खींचे। इन फैसलों ने वैश्विक सहयोग को प्रभावित किया, खासकर जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर। अब 2026 में यह फैसला और व्यापक है, जिसमें जलवायु, स्वास्थ्य, शांति और लोकतंत्र से जुड़े फोरम शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिकी अलगाववाद की चरम स्थिति है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने वैश्विक ढांचे को चुनौती दे रही है।
वर्तमान घटनाक्रम: कार्यकारी आदेश का विवरण
7 जनवरी 2026 को जारी राष्ट्रपति मेमोरेंडम में Trump ने सभी अमेरिकी विभागों और एजेंसियों को 66 संगठनों में भागीदारी और फंडिंग रोकने का आदेश दिया। इनमें यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC), इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) और अन्य स्वास्थ्य व पर्यावरण संबंधी निकाय शामिल हैं। स्टेट डिपार्टमेंट ने इसे ‘बेकार, अक्षम या हानिकारक’ संगठनों से वापसी बताया। ट्रंप ने कहा कि ये संगठन अमेरिकी संप्रभुता पर हमला करते हैं और करदाताओं के पैसे की बर्बादी हैं।
प्रभावित संगठनों की सूची
प्रभावित संगठनों में जलवायु परिवर्तन से जुड़े यूएन निकायों के अलावा मानवाधिकार, शांति और विकास से जुड़े फोरम भी हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से जलवायु परिवर्तन, शांति और लोकतंत्र पर केंद्रित प्रमुख मंच प्रभावित होंगे। एनपीआर ने बताया कि 66 में से कई संगठन स्वास्थ्य और जलवायु मुद्दों पर काम करते हैं, जिनकी वापसी वैश्विक चुनौतियों को और जटिल बनाएगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: निंदा और चिंता
इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूएन महासचिव ने कहा कि अमेरिका का इन संगठनों को फंड करने का ‘कानूनी दायित्व’ है। यूरोपीय संघ और चीन ने इसे बहुपक्षवाद पर हमला बताया। अफ्रीका और एशिया के कई देशों ने चिंता जताई कि इससे मानवीय सहायता और सुरक्षा सहयोग प्रभावित होगा। सोशल मीडिया पर #TrumpUNWithdrawal ट्रेंड कर रहा है, जहां कार्यकर्ता इसे ‘शर्मनाक’ बता रहे हैं।
घरेलू और वैश्विक आलोचना
अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने इसे अलगाववादी कदम बताया, जबकि रिपब्लिकन्स ने समर्थन किया। वैश्विक मीडिया जैसे गार्जियन और ब्रेटबार्ट ने इसे वैश्विक व्यवस्था पर खतरा माना। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन हो सकता है।
प्रभाव और विश्लेषण: वैश्विक व्यवस्था पर असर
यह फैसला वैश्विक मुद्दों पर गहरा असर डालेगा। जलवायु परिवर्तन से लड़ाई कमजोर होगी, क्योंकि अमेरिका सबसे बड़ा दानदाता है। स्वास्थ्य और मानवीय सहायता प्रभावित होगी, खासकर विकासशील देशों में। विश्लेषकों का मानना है कि इससे चीन और रूस जैसे देश यूएन में अपना प्रभाव बढ़ाएंगे। अमेरिकी संप्रभुता मजबूत होगी, लेकिन वैश्विक नेतृत्व कमजोर।
दीर्घकालिक परिणाम
यह कदम अमेरिका को अलग-थलग कर सकता है, जबकि बहुपक्षीय मंचों की जरूरत बढ़ेगी। भारत जैसे देशों को नए गठबंधनों की तलाश करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष: वैश्विक सहयोग की चुनौती
Trump का यह फैसला वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देता है। जहां एक ओर अमेरिकी हितों की रक्षा का दावा है, वहीं दूसरी ओर बहुपक्षवाद की कमजोरी। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और तेज होंगी, जो वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगी।
Sources: वाइट हाउस वेबसाइट,