10 जनवरी 2026, बेगूसराय में Donald Trump के खिलाफ प्रदर्शन: बिहार के बेगूसराय जिले में आज अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। भाकपा (माले) और उसके सहयोगी संगठनों – जन संस्कृति मंच (JSM), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) तथा ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIDF) ने संयुक्त रूप से प्रतिरोध मार्च निकाला। कार्यकर्ताओं ने ट्रंप का पुतला दहन किया और ‘डोनाल्ड ट्रंप मुर्दाबाद’, ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से वेनेजुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेंस पर अमेरिकी हमले और गिरफ्तारी के विरोध में था। प्रदर्शनकारी भारत सरकार से ट्रंप की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करने की मांग कर रहे थे।
पृष्ठभूमि: वैश्विक संदर्भ में ट्रंप की नीतियां
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की विदेश नीति लंबे समय से विवादों में रही है। 2025 में दोबारा सत्ता में आने के बाद Donald Trump ने कई देशों में आक्रामक रुख अपनाया है। हालिया वेनेजुएला संकट इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां अमेरिका पर मादुरो दंपति की गिरफ्तारी और हमले का आरोप है। वामपंथी संगठन इसे अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई मिसाल बता रहे हैं।
वेनेजुएला संकट और अमेरिकी दखल
वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार को अमेरिका लंबे समय से अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। हाल के घटनाक्रम में मादुरो और उनकी पत्नी पर हमले की खबरें सामने आईं, जिसे Donald Trump प्रशासन की साजिश बताया जा रहा है। भारत सहित कई देशों में वामपंथी दलों ने इसका विरोध किया है। पटना, कोलकाता और ओंगोल जैसे शहरों में पहले ही प्रदर्शन हो चुके हैं, जहां Donald Trump का पुतला दहन किया गया। बेगूसराय का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है, जो स्थानीय स्तर पर वैश्विक मुद्दों से जुड़ाव दिखाता है।
वर्तमान घटनाक्रम: प्रतिरोध मार्च और पुतला दहन
आज सुबह भाकपा माले के जिला कार्यालय से प्रदर्शन शुरू हुआ। सैकड़ों कार्यकर्ता बैनर-पोस्टर लेकर शहर के मुख्य रास्तों से गुजरे और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। यहां Donald Trump का पुतला दहन किया गया, जिसके बाद सभा हुई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शहर में कुछ देर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस बल तैनात था, जिसने किसी अप्रिय घटना को रोका।
प्रदर्शन की झलकियां
कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’, ‘ट्रंप गो बैक’, ‘वेनेजुएला की जनता के साथ एकजुटता’ जैसे नारे गूंजे। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका की मानवाधिकार और सभ्यता की दावेदारी पर सवाल उठाए। यह प्रदर्शन बिहार में वामपंथी संगठनों की सक्रियता को दर्शाता है, जो स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी आवाज उठाते हैं।
कारण और मांगें: साम्राज्यवाद विरोध की बुनियाद
प्रदर्शन का मुख्य कारण वेनेजुएला में अमेरिकी दखलअंदाजी है। प्रदर्शनकारी इसे आतंकवादी कृत्य बता रहे हैं और भारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि वह Donald Trump के कदमों का कड़ा विरोध करे।
नेताओं के बयान
भाकपा माले के जिला सचिव दिवाकर प्रसाद ने कहा, “अमेरिका की यह साम्राज्यवादी नीति शर्मनाक है। वेनेजुएला की जनता के साथ हम एकजुट हैं। भारत सरकार को Donald Trump के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।” जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा, आइसा की सोनू फरनाज, माले नगर सचिव राजेश श्रीवास्तव और शिक्षाविद राजाराम आर्य ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने प्रगतिशील जनता से साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ खड़े होने की अपील की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
इस प्रदर्शन पर अन्य दलों की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन वामपंथी दलों ने इसे व्यापक समर्थन दिया है। बिहार में CPI-ML की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए, ऐसे प्रदर्शन स्थानीय राजनीति में भी असर डाल सकते हैं।
व्यापक संदर्भ में विरोध
देश के अन्य हिस्सों में भी Donald Trump की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कोलकाता में CPI-ML ने अमेरिकी केंद्र के पास विरोध किया, जबकि पुडुचेरी में CPI(M) ने अलग प्रदर्शन आयोजित किया। ये सभी वेनेजुएला मुद्दे से जुड़े हैं, जो ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति को उजागर करते हैं।
विश्लेषण: वामपंथ की वैश्विक एकजुटता
बेगूसराय जैसे छोटे शहर में अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर प्रदर्शन वामपंथी संगठनों की वैश्विक दृष्टि को दिखाता है। यह स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का माध्यम भी है। हालांकि, ऐसे प्रदर्शन मुख्यधारा की राजनीति में कितना असर डालते हैं, यह देखना बाकी है। Donald Trump की नीतियां भारत-अमेरिका संबंधों को भी प्रभावित कर रही हैं, जिससे ऐसे विरोध और बढ़ सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
यदि वेनेजुएला संकट गहराता है, तो बिहार सहित पूरे देश में ऐसे प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। वामपंथी दल इसे अमेरिकी इंपीरियलिज्म के खिलाफ बड़ा आंदोलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
निष्कर्ष: लोकतंत्र और संप्रभुता की रक्षा
बेगूसराय का यह प्रदर्शन छोटा जरूर था, लेकिन वैश्विक मुद्दों पर स्थानीय आवाज का प्रतीक है। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और वेनेजुएला की जनता के साथ एकजुटता जताई। आने वाले दिनों में ऐसे विरोध और तेज हो सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की भूमिका पर भी सवाल उठाते हैं। यह घटना बिहार की राजनीति में वामपंथ की सक्रियता को रेखांकित करती है।
Sources: जी न्यूज़, प्रभात खबर