SUPREME COURTSUPREME COURT

9 जनवरी 2026, Supreme Court का आवारा कुत्तों पर स्पष्टीकरण: Supreme Court ने 8 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों से संबंधित नीति पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर आवारा कुत्ते को सड़कों से हटाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुसार उनका इलाज किया जाना चाहिए। यह स्पष्टीकरण पशु अधिकारों की रक्षा करते हुए सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है। तीन जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और NV अंजारिया शामिल हैं, ने इस मामले की सुनवाई की। इस फैसले से कुत्तों की अंधाधुंध हटाने की आशंकाओं को दूर किया गया है, और नियमों के सख्त पालन पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में हम इस स्पष्टीकरण की विस्तृत जानकारी, पृष्ठभूमि, प्रमुख बिंदु और प्रभाव पर चर्चा करेंगे।

यह मामला देश भर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जुड़ा है, जहां कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। Supreme Court ने कहा कि ABC नियमों का उल्लंघन बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे दुर्घटनाएं और मौतें हो रही हैं। जस्टिस मेहता ने हल्के अंदाज में कहा, “कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन हैं। हमें अधिक बिल्लियां बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि वे चूहों की दुश्मन हैं।” यह टिप्पणी चूहों की समस्या पर इशारा करती है। कोर्ट ने दिसंबर 2025 के एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें लद्दाख में आवारा कुत्तों द्वारा दुर्लभ प्रजातियों को नुकसान पहुंचाने की बात है। इस स्पष्टीकरण से उम्मीद है कि पशु कल्याण और मानव सुरक्षा में संतुलन बनेगा।

स्पष्टीकरण की डिटेल्स

Supreme Court ने स्पष्ट किया कि उनका आदेश कुत्तों को हटाने का नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार प्रबंधन का है। बेंच ने कहा कि ABC नियमों के तहत कुत्तों को नसबंदी, टीकाकरण और डीवर्मिंग के बाद वापस उसी जगह छोड़ा जाना चाहिए।

बेंच के बयान

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “एक कुत्ता हमेशा उस इंसान को सूंघ सकता है जो कुत्तों से डरता है या जिसे कुत्ता काट चुका है, और वह हमला करेगा।” जस्टिस मेहता ने स्पष्ट किया, “हमने हर कुत्ते को सड़कों से हटाने का निर्देश नहीं दिया है। निर्देश नियमों के अनुसार इलाज का है।” कोर्ट ने नगर निकायों और स्थानीय अधिकारियों की निष्क्रियता पर चिंता जताई, कहा कि एबीसी नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सुनवाई के दौरान, कुत्तों की आक्रामकता, रोड एक्सीडेंट और रैबीज से मौतों पर चर्चा हुई। कोर्ट ने महिलाओं को कुत्तों को खाना खिलाने पर उत्पीड़न की शिकायतों पर कहा कि ऐसी घटनाओं पर FIR दर्ज कराएं और हाई कोर्ट जाएं।

मामले का पृष्ठभूमि

यह मामला 2025 में शुरू हुआ, जब एक बच्चे की रैबीज से मौत की रिपोर्ट पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। जुलाई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद बेंच ने दिल्ली के आसपास आवारा कुत्तों को शेल्टर में ले जाने का आदेश दिया, लेकिन पशु प्रेमियों ने विरोध किया। अगस्त 2025 में आदेश संशोधित किया गया, जिसमें आक्रामक या रैबीज संक्रमित कुत्तों को न छोड़ने का निर्देश था। देश में 5.2 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, लेकिन केवल 66 मान्यता प्राप्त एबीसी केंद्र हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी, और गैर-अनुपालन पर मुख्य सचिवों को तलब किया।

प्रमुख बिंदु और उद्धरण

Supreme Court ने निर्दिष्ट फीडिंग क्षेत्र बनाने, सार्वजनिक फीडिंग पर रोक और हेल्पलाइन स्थापित करने के आदेश दिए। पशु कल्याण समूहों के वकील सीयू सिंह ने कहा, “कुत्तों को अचानक हटाने से चूहों की संख्या बढ़ेगी, जो बीमारी फैलाते हैं।” उन्होंने दिल्ली में चूहों और बंदरों की समस्या का जिक्र किया। सीनियर एडवोकेट कृष्णन वेणुगोपाल ने संसाधनों की कमी बताई, कहा कि प्रति जिले एक एबीसी केंद्र बनाने में 1,600 करोड़ रुपये लगेंगे। पीईटीए और अन्य समूहों ने कुत्तों को कैप्चर जगह पर छोड़ने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं से 25,000 रुपये और एनजीओ से 2,00,000 रुपये जमा करने का आदेश दिया।

प्रभाव और निहितार्थ

यह स्पष्टीकरण पशु अधिकारों के लिए सकारात्मक है, क्योंकि यह मानवीय प्रबंधन पर जोर देता है। कुत्तों को शेल्टर में रखने से बीमारियां फैल सकती हैं, इसलिए रिलीज जरूरी है। सार्वजनिक सुरक्षा के लिए, कुत्तों के काटने की घटनाओं (जो बढ़ रही हैं) को कम करने में मदद मिलेगी। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में कुत्ते चूहों और बंदरों को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, संसाधनों की कमी एक चुनौती है। यह फैसला अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा, और रैबीज उन्मूलन में योगदान देगा।

भविष्य की योजनाएं और सुझाव

Supreme Court ने अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की है, जहां लद्दाख रिपोर्ट पर चर्चा होगी। सरकार को एबीसी केंद्र बढ़ाने, प्रशिक्षित वेटरिनेरियन नियुक्त करने और जीआईएस मैपिंग जैसे कदम उठाने चाहिए। पशु प्रेमियों से अपील है कि नियमों का पालन करें। कुल मिलाकर, यह स्पष्टीकरण संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है, जो भारत को रैबीज मुक्त बनाने में मदद करेगा।

Sources: एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ़ इंडिया

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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