lalu prasad yadav & tejasvi yadavlalu prasad yadav & tejasvi yadav

9 जनवरी 2026, दिल्ली कोर्ट ने लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में Lalu Prasad Yadav और परिवार पर आरोप तय किए: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री Lalu Prasad Yadav, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव सहित अन्य पर लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले में आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियां देकर बदले में सस्ती दरों पर जमीन हासिल की गई थी। अदालत ने इसे एक बड़ा आपराधिक षड्यंत्र करार दिया है, जहां रेल मंत्रालय को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। इस फैसले से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है, क्योंकि यादव परिवार बिहार की राजनीति का प्रमुख हिस्सा है। रिपोर्ट में हम मामले की पृष्ठभूमि, आरोप, अदालती कार्यवाही और आगे की दिशा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाला भारतीय राजनीति के बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। यह घोटाला उस समय का है जब Lalu Prasad Yadav यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, रेलवे के विभिन्न जोनों में ग्रुप डी की नौकरियां बिना पारदर्शी प्रक्रिया के दी गईं। इन नौकरियों के बदले में उम्मीदवारों या उनके परिवारों से सस्ती दरों पर जमीनें खरीदी गईं, जो मुख्य रूप से लालू प्रसाद के परिवार के नाम पर या इससे जुड़ी कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गईं।

सीबीआई की आरोप

CBI ने 2022 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और जांच में पाया कि यह एक संगठित अपराध था। एजेंसी का दावा है कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्रालय को अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया। जमीनें मुख्य रूप से पटना और अन्य जगहों पर ली गईं, जहां बाजार मूल्य से काफी कम दाम पर सौदे हुए। कई मामलों में नकद लेन-देन हुआ, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू भी जुड़ा। सीबीआई ने कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया, जिसमें रेलवे अधिकारी, निजी व्यक्ति और यादव परिवार के सदस्य शामिल हैं। जांच में पाया गया कि नौकरियां देने के लिए रेलवे के नियमों को ताक पर रखा गया और यह सब एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अलग से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है और कई संपत्तियों को जब्त कर चुका है।

आरोपी व्यक्ति

अदालत ने कुल 41 से 46 आरोपियों पर आरोप तय किए हैं, जबकि 52 को बरी कर दिया गया। मुख्य आरोपी Lalu Prasad Yadav हैं, जिन्हें इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना गया है। उनकी पत्नी राबड़ी देवी, जो पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, पर भी आरोप हैं कि उन्होंने जमीन सौदों में हिस्सा लिया। बच्चों में तेजस्वी यादव (आरजेडी नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री), तेज प्रताप यादव (विधायक), मीसा भारती (सांसद) और हेमा यादव शामिल हैं। अन्य आरोपी रेलवे के पूर्व अधिकारी और निजी व्यक्ति हैं, जो कथित तौर पर इस साजिश में शामिल थे। मूल रूप से 103 आरोपी थे, लेकिन पांच की मौत हो चुकी है।

अदालती कार्यवाही

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 9 जनवरी 2026 को आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने CBI की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के सबूत हैं। सुनवाई के दौरान तेज प्रताप, तेजस्वी और मीसा भारती व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए, जबकि Lalu Prasad Yadav, राबड़ी देवी और अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह ने तर्क दिया कि पर्याप्त सबूत हैं, जबकि लालू प्रसाद के वकील मनींदर सिंह ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि जमीनें पैसे देकर खरीदी गईं, न कि नौकरियों के बदले। अदालत ने 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा था और अब 29 जनवरी को औपचारिक रूप से आरोप पढ़े जाएंगे, जहां आरोपी अपना पक्ष रखेंगे।

तय किए गए आरोप

आरोप मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत हैं, साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराएं शामिल हैं। अदालत ने कहा कि लालू प्रसाद ने रेलवे को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। परिवार के सदस्यों पर आरोप है कि वे इस साजिश में सक्रिय भागीदार थे।

पक्षों की प्रतिक्रियाएं

यादव परिवार ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। लालू प्रसाद के वकील ने अदालत में दलील दी कि कोई ठोस सबूत नहीं है और जमीन सौदों के दस्तावेज पैसे के लेन-देन को साबित करते हैं। आरजेडी ने बयान जारी कर कहा कि यह मोदी सरकार की साजिश है, खासकर बिहार चुनावों के मद्देनजर। विपक्षी पार्टियां जैसे भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार का प्रमाण बताया और कहा कि न्याय की जीत हुई है। सीबीआई और ईडी ने फैसले का स्वागत किया, जबकि यादव परिवार के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है।

आगे की दिशा

अदालत ने 29 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई तय की है, जहां आरोपी दोषी या निर्दोष का दावा करेंगे। अगर दोषी नहीं माने जाते, तो मुकदमा चलेगा, जिसमें गवाहों की गवाही और सबूत पेश किए जाएंगे। ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच अलग से चल रही है, जो संपत्ति जब्ती की ओर बढ़ सकती है। यह मामला बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि तेजस्वी यादव विपक्षी गठबंधन के प्रमुख चेहरे हैं। लंबी कानूनी लड़ाई की संभावना है, जो सुप्रीम कोर्ट तक जा सकती है।

निष्कर्ष

यह फैसला भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन राजनीतिक रंग दिए जाने से विवादास्पद भी। यादव परिवार के लिए यह बड़ा झटका है, जो पहले भी चारा घोटाले जैसे मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सबूतों के आधार पर आगे बढ़ना जरूरी है। बिहार के लोगों के लिए यह मामला सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग का उदाहरण है।

Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया, द हिन्दू

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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