8 जनवरी 2026, RDX बम धमकी: बिहार में आज एक बड़ी घटना ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। पटना, गया, अररिया और किशनगंज के सिविल कोर्ट्स को RDX बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिससे कोर्ट परिसरों में हड़कंप मच गया। यह धमकी ईमेल के माध्यम से आई, जिसमें विस्फोटकों के प्लांट होने का दावा किया गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और जांच शुरू कर दी। इस घटना ने न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया बल्कि आम जनता में भी भय का वातावरण पैदा कर दिया। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसमें धमकी का विवरण, पुलिस की कार्रवाई और संभावित पृष्ठभूमि शामिल है।
घटना का विस्तृत विवरण
इस घटना की शुरुआत आज सुबह हुई जब बिहार के चार प्रमुख सिविल कोर्ट्स के रजिस्ट्रार कार्यालयों को एक संदिग्ध ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि कोर्ट परिसरों में RDX आधारित विस्फोटक उपकरण प्लांट किए गए हैं और उन्हें उड़ाने की तैयारी है। धमकी देने वाले ने खुद को अज्ञात बताया और ईमेल का IP एड्रेस प्रारंभिक जांच में तमिलनाडु से जुड़ा पाया गया। यह धमकी इतनी गंभीर थी कि तुरंत कोर्ट्स को खाली कराने का आदेश जारी किया गया। पटना सिविल कोर्ट में जजों, वकीलों और कर्मचारियों को तत्काल परिसर छोड़ने के लिए कहा गया, जिससे सुनवाईयां रुक गईं।
धमकी कैसे और कब मिली?
धमकी ईमेल के जरिए भेजी गई, जो आज सुबह लगभग 10 बजे प्राप्त हुई। ईमेल में विस्तार से लिखा गया था कि “कोर्ट परिसर में तीन से चार RDX बम प्लांट किए गए हैं, जो किसी भी समय विस्फोट कर सकते हैं।” इसमें श्रीलंका के ईस्टर बम विस्फोटों जैसी घटना दोहराने की चेतावनी भी दी गई थी। प्रारंभिक जांच से पता चला कि ईमेल एक फर्जी ID से भेजा गया था, और इसमें बिहारी मजदूरों को तमिलनाडु भेजने से रोकने की मांग भी की गई थी। यह पहली बार नहीं है जब बिहार के कोर्ट्स को ऐसी धमकी मिली है; इससे पहले भी पटना सिविल कोर्ट को कई बार बम धमकियां मिल चुकी हैं, लेकिन इस बार इसमें आरडीएक्स का जिक्र होने से स्थिति और गंभीर हो गई। ईमेल की भाषा हिंदी और अंग्रेजी मिश्रित थी, जो संकेत देती है कि धमकी देने वाला व्यक्ति शिक्षित हो सकता है। पुलिस की साइबर सेल अब ईमेल के IP ट्रेस करने में जुटी है, और संभावना है कि यह एक होक्स कॉल हो, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा।
प्रभावित कोर्ट्स और उनका महत्व
धमकी के निशाने पर मुख्य रूप से चार कोर्ट्स थे: पटना सिविल कोर्ट, गया सिविल कोर्ट, अररिया सिविल कोर्ट और किशनगंज सिविल कोर्ट। पटना सिविल कोर्ट बिहार का सबसे बड़ा न्यायिक केंद्र है, जहां रोजाना हजारों मामले सुनाए जाते हैं। यहां वकीलों की संख्या भी सबसे अधिक है, और धमकी मिलने से सैकड़ों वकीलों और लिटिगेंट्स प्रभावित हुए। गया कोर्ट, जो धार्मिक और पर्यटन महत्व के शहर में स्थित है, वहां भी सुनवाईयां स्थगित कर दी गईं। अररिया और किशनगंज, जो सीमावर्ती जिलों में हैं, वहां सुरक्षा पहले से ही संवेदनशील है क्योंकि ये नेपाल बॉर्डर से सटे हैं। इन कोर्ट्स में मुख्य रूप से सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई होती है, और धमकी से पूरे दिन का कार्य प्रभावित हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में पांचवें कोर्ट का भी जिक्र है, लेकिन आधिकारिक रूप से चार की पुष्टि हुई है। इन कोर्ट्स का चयन क्यों किया गया, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राज्य की न्याय व्यवस्था को लक्षित करने की साजिश हो सकती है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
धमकी मिलते ही बिहार पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पटना पुलिस ने बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड को तैनात किया, और पूरे कोर्ट परिसर की सघन तलाशी ली गई। अब तक किसी भी संदिग्ध वस्तु की बरामदगी नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है। अररिया कोर्ट में भी इसी तरह की तलाशी अभियान चलाया गया, जहां पुलिस ने परिसर को सील कर दिया। किशनगंज और गया में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ राज्य स्तर की एजेंसियां शामिल हैं। बिहार पुलिस के डीजीपी ने एक बयान में कहा कि “यह धमकी गंभीर है, और हम हर संभावित खतरे की जांच कर रहे हैं। साइबर सेल ईमेल की ट्रेसिंग कर रही है, और जल्द ही दोषी पकड़े जाएंगे।” सुरक्षा बढ़ाने के लिए कोर्ट्स में अतिरिक्त CCTV और मेटल डिटेक्टर लगाने की योजना है। साथ ही, एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भी सूचित किया गया है, क्योंकि इसमें अंतरराज्यीय कनेक्शन हो सकता है।
जांच की चुनौतियां
जांच में मुख्य चुनौती ईमेल की ट्रेसिंग है, क्योंकि यह VPN या प्रॉक्सी के जरिए भेजा गया हो सकता है। पुलिस ने तमिलनाडु पुलिस से संपर्क किया है, क्योंकि IP वहां का लग रहा है। इसके अलावा, कोर्ट्स में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होने से सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी धमकियां अक्सर होक्स होती हैं, लेकिन आरडीएक्स का जिक्र होने से इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। पुलिस अब कोर्ट कर्मचारियों और वकीलों से पूछताछ भी कर रही है कि क्या कोई संदिग्ध गतिविधि देखी गई है।
संभावित कारण और पृष्ठभूमि
इस धमकी के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईमेल में बिहारी मजदूरों को तमिलनाडु भेजने से रोकने की मांग की गई, जो इंगित करता है कि यह अंतरराज्यीय मजदूर विवाद से जुड़ा हो सकता है। बिहार से बड़ी संख्या में मजदूर दक्षिण भारत जाते हैं, और वहां कभी-कभी स्थानीय विरोध होता है। दूसरी संभावना आतंकवादी संगठनों की है, क्योंकि RDX का उपयोग अक्सर ISI या अन्य ग्रुप्स द्वारा किया जाता है। इससे पहले भी पटना कोर्ट को 2025 में कई धमकियां मिली थीं, जैसे अगस्त 2025 में चार RDX IED की धमकी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह न्याय व्यवस्था को बाधित करने की साजिश हो सकती है, खासकर जब राज्य में चुनाव या अन्य राजनीतिक गतिविधियां चल रही हों।
पिछली समान घटनाएं
बिहार में कोर्ट्स को धमकियां मिलना नया नहीं है। अक्टूबर 2025 में पटना सिविल कोर्ट को आरडीएक्स प्लांटेड होने की धमकी मिली थी, जिसके बाद कोर्ट खाली कराया गया। इसी तरह, अगस्त 2025 में एक ईमेल में श्रीलंका ईस्टर ब्लास्ट जैसी घटना की चेतावनी दी गई थी। इन घटनाओं से साफ है कि कोर्ट्स को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
जनता और वकीलों की प्रतिक्रिया
इस घटना से वकील समुदाय में गुस्सा है। पटना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “सरकार को सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, वरना 100 वकीलों की मौत के बाद जागेगी।” आम जनता में भी दहशत है, क्योंकि कोर्ट्स सार्वजनिक जगह हैं। लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न्याय तक पहुंच को प्रभावित करती हैं।
निष्कर्ष और आगे की राह
यह घटना बिहार की न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में है। अब जरूरत है कि साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाए और कोर्ट्स में स्थायी सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं। अगर यह होक्स साबित होती है, तो भी दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कुल मिलाकर, यह घटना हमें सतर्क रहने की याद दिलाती है।
Sources: भास्कर