8 जनवरी 2026, Katihar में फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली रफ्तार: बिहार के Katihar जिले में फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने तेजी पकड़ ली है। जिलाधिकारी (DM) आशुतोष द्विवेदी ने अभियान के दूसरे दिन खुद मैदान में उतरकर विभिन्न पंचायतों का दौरा किया, जिससे किसानों में उत्साह बढ़ा और रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी आई। यह अभियान 6 से 9 जनवरी तक चल रहा है, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM KISAN) और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए अनिवार्य है। DM की सक्रिय भागीदारी से न केवल व्यवस्था मजबूत हुई, बल्कि किसानों को यह संदेश भी मिला कि रजिस्ट्री अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके भविष्य की कुंजी है। इस रिपोर्ट में हम अभियान की पृष्ठभूमि, डीएम की भूमिका, प्रगति और प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
अभियान की पृष्ठभूमि और महत्व
बिहार सरकार ने किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया है। यह अभियान राज्य स्तर पर 6 से 9 जनवरी तक चलाया जा रहा है, जिसमें विशेष कैंप लगाए गए हैं। रजिस्ट्री के बिना पीएम किसान योजना की अगली किस्त सहित कोई भी कृषि सब्सिडी, फसल बीमा या ऋण नहीं मिलेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों का एक सटीक डाटाबेस तैयार करना है, जो आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज और बैंक खाते से जुड़ा होगा। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगा।
Katihar जिले में यह अभियान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है। जिले के करीब 231 पंचायतों में कैंप लगाए गए हैं, जहां किसान आधार कार्ड, जमीन के कागजात और बैंक पासबुक लेकर पहुंच रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, रजिस्ट्री से किसानों की पहचान सत्यापित होगी, जो भविष्य में डिजिटल कृषि योजनाओं का आधार बनेगी। जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने कहा, “फार्मर रजिस्ट्री से किसानों का एक सटीक और पारदर्शी डाटाबेस तैयार होगा। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।” अभियान की शुरुआत से ही ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाई जा रही है, जहां कृषि सलाहकार और किसान मित्र घर-घर जाकर जानकारी दे रहे हैं।
बिहार में कुल लक्ष्य लाखों किसानों का रजिस्ट्री है, लेकिन Katihar जैसे जिलों में चुनौतियां हैं जैसे दस्तावेजों की कमी या तकनीकी समस्या। सरकार ने ई-मित्र केंद्र, ग्राम पंचायत, तहसील कार्यालय और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को इस अभियान में शामिल किया है। यह कदम डिजिटल एग्रीकल्चर को मजबूत करेगा, जहां ड्रोन तकनीक से खेती की निगरानी और रोग नियंत्रण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
डीएम आशुतोष द्विवेदी की सक्रिय भूमिका
अभियान के दूसरे दिन (7 जनवरी) डीएम आशुतोष द्विवेदी ने खुद मैदान में उतरकर प्रक्रिया का जायजा लिया। वे जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार, अपर समाहर्ता डॉ. विनोद कुमार और सदर एसडीओ प्रद्युम्न सिंह यादव के साथ विभिन्न पंचायतों में पहुंचे। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी पात्र किसान को रजिस्ट्री से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा, “अभियान की सफलता तभी मानी जाएगी जब जिले का हर वास्तविक किसान फार्मर रजिस्ट्री के दायरे में आ जाए।”
डीएम की मौजूदगी से कैंपों में व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही। किसानों की कतारें लगी रहीं, और तकनीकी सहायता तुरंत उपलब्ध कराई गई। यह दौरा न केवल निरीक्षण था, बल्कि किसानों को प्रोत्साहन भी प्रदान कर रहा था। डीएम ने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं का समाधान किया, जैसे दस्तावेज अपलोड में देरी या नेटवर्क समस्या। उनकी सक्रियता से अभियान में रफ्तार आई, और कई पंचायतों में रजिस्ट्री की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।
Katihar डीएम का टूर प्रोग्राम जनवरी 2026 में पहले से निर्धारित था, जिसमें अभियान की निगरानी शामिल है। यह पहल अन्य जिलों के लिए उदाहरण बनेगी, जहां उच्च अधिकारियों की भागीदारी से लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
अभियान की प्रगति और चुनौतियां
अभियान की शुरुआत से ही Katihar में उत्साह है। सभी 231 पंचायतों में कैंप चल रहे हैं, जहां सुबह से शाम तक रजिस्ट्री हो रही है। फल्का जैसे इलाकों में विशेष कैंप लगाए गए, जहां 800 से अधिक किसानों ने रजिस्ट्री कराई और 1107 का ई-केवाईसी पूरा हुआ। जिले में धान खरीद भी 68% तक पहुंच गई है, जो रजिस्ट्री से जुड़ी है, जहां 3531 किसानों से 27826 MT धान खरीदा गया। लक्ष्य 92200 MT है।
किसान आधार, भूमि दस्तावेज और बैंक विवरण लेकर आ रहे हैं। कृषि विभाग की टीमें ड्रोन तकनीक से खेती में क्रांति लाने की ट्रेनिंग भी दे रही हैं, जो रजिस्ट्री के बाद उपलब्ध होगी। हालांकि, चुनौतियां हैं जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी या दस्तावेजों की अनुपलब्धता। कुछ किसान अंतिम तिथि का इंतजार कर रहे हैं, जिसके लिए कृषि पदाधिकारी ने अपील की कि “अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द रजिस्ट्री करा लें।”
अभियान के तहत एग्रीस्टैक ड्राइव भी चल रही है, जहां वरिष्ठ अधिकारी जमाबंदी सत्यापन के लिए नियुक्त हैं, लक्ष्य जनवरी अंत तक।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह अभियान Katihar के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। रजिस्ट्री से डिजिटल पहचान बनेगी, जो सब्सिडी, बीमा और ऋण को आसान बनाएगी। किसानों का कहना है कि इससे फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी, जैसे ड्रोन से छिड़काव और रोग नियंत्रण। राज्य स्तर पर यह पीएम किसान की 22वीं किस्त से जुड़ा है, जहां बिना रजिस्ट्री के लाभ नहीं मिलेगा।
हालांकि, मौसम की चुनौतियां हैं जैसे कोल्ड वेव, लेकिन अभियान जारी है। भविष्य में यह डाटाबेस कृषि नीतियों को मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, डीएम की पहल से अभियान सफल हो रहा है, जो बिहार के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा है। अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें।
Sources: हिंदुस्तान