7 जनवरी 2026, Katihar में कड़ाके की ठंड: बिहार के उत्तर-पूर्वी जिले Katihar में जारी शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने के कारण जिला मजिस्ट्रेट (DM) आशुतोष द्विवेदी ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 8 तक की पढ़ाई 10 जनवरी 2026 तक स्थगित करने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। ठंड की इस लहर ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि यातायात, कृषि और दैनिक गतिविधियों को भी ठप कर दिया है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसमें मौसम की स्थिति, प्रशासनिक कदम, छात्रों पर प्रभाव, तथा इससे जुड़ी अन्य जानकारियां शामिल हैं।
ठंड की वर्तमान स्थिति और कारण
Katihar जिला, जो गंगा नदी के मैदानी इलाके में स्थित है और नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, सर्दियों में हमेशा ठंड का सामना करता रहा है। लेकिन 2026 की शुरुआत में ठंड का प्रकोप असाधारण रूप से तीव्र है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, कटिहार में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 14-16 डिग्री के आसपास रह रहा है। घना कोहरा सुबह के समय दृश्यता को 100 मीटर से कम कर देता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। आईएमडी ने बिहार के कई जिलों समेत कटिहार, के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है, जिसमें अगले 2-3 दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना जताई गई है।
यह शीतलहर हिमालय से आने वाली ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्पन्न हुई है। Katihar जैसे ग्रामीण-शहरी मिश्रित इलाकों में जहां अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, ठंड का प्रभाव अधिक गंभीर है। लोग अलाव जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईंधन की कमी और वायु प्रदूषण की समस्या इसे जटिल बना रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार ठंड की तीव्रता 25-35% अधिक है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को इंगित करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग से मौसम के चरम रूप अधिक बार देखने को मिल रहे हैं, जिसमें शीतलहरें भी शामिल हैं। IMD की रिपोर्ट में उल्लेख है कि बिहार में औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री कम है, जो स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा रहा है।
डीएम आशुतोष द्विवेदी का आदेश: विवरण और पालन
Katihar जिला मजिस्ट्रेट आशुतोष द्विवेदी ने 7 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों के लिए स्कूल 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। यह आदेश सभी सरकारी, निजी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि, प्री-बोर्ड और बोर्ड परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग क्लासेस को छूट दी गई है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रशासनिक कार्य जारी रहेंगे, और शिक्षक-कर्मचारियों को स्कूल आना होगा। डीएम ने ठंड से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया, खासकर छोटे बच्चों के लिए जो सुबह के समय ठंड में स्कूल जाने से बीमार पड़ सकते हैं।
आशुतोष द्विवेदी, जो एक अनुभवी IAS अधिकारी हैं और पहले भी आपदा प्रबंधन में अपनी भूमिका निभा चुके हैं, ने इस आदेश के साथ स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा है। उन्होंने निर्देश दिया कि ठंड से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाए जाएं और कंबल वितरण तेज किया जाए। आदेश के पालन के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है, और उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है। इस कदम की सराहना करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक था। एक शिक्षक ने बताया, “ठंड में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा होता, यह आदेश समय पर आया है।”
छात्रों और अभिभावकों पर प्रभाव
इस स्कूल बंदी का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों पर पड़ा है। Katihar जिले में लगभग 60,000 छात्र कक्षा 1 से 8 तक के हैं, जो अब घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। कई स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने की कोशिश की है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी और स्मार्टफोन की अनुपलब्धता के कारण यह प्रभावी नहीं हो पा रही है। अभिभावक चिंतित हैं कि यह बंदी छात्रों की शिक्षा को प्रभावित करेगी, खासकर उन बच्चों की जो सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील पर निर्भर हैं। ठंड के कारण कई परिवारों में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, जैसे सर्दी, खांसी और बुखार, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ गया है।
एक स्थानीय अभिभावक, मोहम्मद अली ने बताया, “हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, लेकिन घर पर ठंड से बचाना भी मुश्किल है। सरकार को ऑनलाइन शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करनी चाहिए।” वहीं, शिक्षक संघों ने मांग की है कि बंदी के दौरान शिक्षकों को ऑनलाइन मोड में काम करने की सुविधा दी जाए। इस स्थिति ने शिक्षा की असमानता को उजागर किया है, जहां शहरी क्षेत्रों के बच्चे आसानी से ऑनलाइन जुड़ सकते हैं, लेकिन ग्रामीण बच्चे पिछड़ जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, ठंड से जुड़ी बीमारियों में 40% वृद्धि हुई है, और बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक है।
अन्य जिलों में समान स्थिति: तुलनात्मक विश्लेषण
Katihar की यह स्थिति पूरे बिहार और उत्तर भारत में व्याप्त शीतलहर का हिस्सा है। उदाहरण के लिए, किशनगंज में भी कक्षा 8 तक के स्कूल बंद हैं, जबकि पटना में 8 जनवरी तक बंदी है। पूर्वी चंपारण में कक्षा 12 तक की पढ़ाई स्थगित है, और भगलपुर में 8 जनवरी तक। राजस्थान के जयपुर में कक्षा 5 तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 10 जनवरी तक। ये बंदियां छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी बंदी से छात्रों का लर्निंग लॉस बढ़ सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत, सरकार को ऐसे समय में वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। अन्य जिलों की तुलना में Katihar में बंदी की अवधि कम है, लेकिन ठंड की तीव्रता यहां अधिक है।
स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव
ठंड का प्रकोप केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। कटिहार में ठंड से संबंधित मौतों की संख्या बढ़ रही है, खासकर बेघर और मजदूर वर्ग में। स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट किया कि पिछले सप्ताह में ठंड से जुड़ी बीमारियों के 300 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक है, क्योंकि वे घरेलू कामों में अधिक समय बाहर बिताते हैं। सामाजिक संगठन जैसे रेड क्रॉस और स्थानीय एनजीओ कंबल और गर्म कपड़ों का वितरण कर रहे हैं, लेकिन मांग अधिक है।
सरकार ने राहत के लिए 15 लाख रुपये का फंड जारी किया है, लेकिन स्थानीय नेता मांग कर रहे हैं कि इसे बढ़ाया जाए। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वनों की कटाई और प्रदूषण ने ठंड को और तीव्र बनाया है, इसलिए लंबे समय के समाधान की जरूरत है।
निष्कर्ष और सुझाव
Katihar में ठंड का यह प्रकोप एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है। Katihar डीएम आशुतोष द्विवेदी का आदेश समय पर लिया गया कदम है, लेकिन अब फोकस शिक्षा की निरंतरता पर होना चाहिए। सरकार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ानी चाहिए। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उम्मीद है कि 10 जनवरी के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि ठंड जारी रही, तो आगे के कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने हमें सतर्क और तैयार रहना चाहिए।
Sources: हिंदुस्तान