7 जनवरी 2026, Araria DM ने जिला कोषागार का निरीक्षण किया: बिहार के सीमावर्ती जिले अररिया में जिला मजिस्ट्रेट (DM) श्री विनोद दुहन (IAS) ने जिला कोषागार का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोषागार के रिकॉर्ड्स के रखरखाव, वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया और समग्र अनुशासन पर विस्तृत निर्देश दिए। यह निरीक्षण 7 जनवरी 2026 को किया गया, जो DM के जनवरी माह के टूर प्रोग्राम का हिस्सा था। DM का यह कदम सरकारी धन के पारदर्शी उपयोग और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के विभिन्न आयामों पर चर्चा करेंगे, जिसमें निरीक्षण की पृष्ठभूमि, डीएम के निर्देश, कोषागार की भूमिका, तथा इससे जुड़े व्यापक प्रभाव शामिल हैं।
निरीक्षण की पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
अररिया जिला, जो नेपाल की सीमा से सटा हुआ है और मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र है, में सरकारी कोषागार जिले की वित्तीय गतिविधियों का केंद्र बिंदु है। यहां सरकारी योजनाओं के लिए धन का वितरण, पेंशन, वेतन और अन्य वित्तीय लेन-देन होते हैं। DM विनोद दुहन, जो हाल ही में दिसंबर 2025 में अररिया के DM के रूप में पदस्थापित हुए हैं, ने अपने टूर प्रोग्राम के तहत कोषागार का निरीक्षण किया। यह प्रोग्राम पत्र संख्या 2741/सी, दिनांक 31 दिसंबर 2025 के अनुसार तैयार किया गया था, जिसमें जनवरी 2026 के पूरे माह के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों का दौरा शामिल है।
निरीक्षण के दौरान DM ने कोषागार के विभिन्न अनुभागों का दौरा किया, जिसमें लेखा शाखा, नकद प्रबंधन कक्ष, और रिकॉर्ड रूम शामिल थे। उन्होंने जिला कोषागार अधिकारी विजय कुमार रजक और अन्य कर्मचारियों से विस्तृत चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण लगभग दो घंटे चला, जिसमें पुराने रिकॉर्ड्स की जांच, डिजिटल डेटा की सत्यापन, और कर्मचारियों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया गया। DM ने पाया कि कुछ रिकॉर्ड्स में विसंगतियां हैं, जैसे अपडेट न होने वाले लेजर और अनियमित फाइलिंग। इसके अलावा, वित्तीय अनुशासन में कमी, जैसे समय पर रिपोर्टिंग न करना, भी उजागर हुई।
विनोद दुहन, जो पहले खान विभाग में निदेशक के रूप में कार्यरत थे, प्रशासनिक सुधारों के लिए जाने जाते हैं। इस निरीक्षण का उद्देश्य न केवल वर्तमान स्थिति का आकलन करना था, बल्कि भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी। उन्होंने कर्मचारियों को चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित ऑडिट को अनिवार्य बनाया जाएगा।
डीएम के प्रमुख निर्देश
निरीक्षण के बाद DM ने एक बैठक बुलाई, जिसमें कोषागार अधिकारी और संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
- रिकॉर्ड्स का रखरखाव: सभी रिकॉर्ड्स को डिजिटल फॉर्मेट में अपडेट करने का आदेश दिया गया। पुराने कागजातों को स्कैन कर ई-फाइलिंग सिस्टम में शामिल करने पर जोर दिया। डीएम ने कहा कि रिकॉर्ड्स की सुरक्षा और पहुंच आसान होनी चाहिए, ताकि किसी भी जांच में देरी न हो।
- वित्तीय अनुशासन: वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी व्यय और प्राप्तियां समय पर दर्ज की जाएं और मासिक रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को भेजी जाए। अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जिसमें निलंबन तक शामिल है।
- कर्मचारी प्रशिक्षण: कर्मचारियों के लिए डिजिटल टूल्स और वित्तीय प्रबंधन पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का सुझाव दिया। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
- ऑडिट और मॉनिटरिंग: नियमित आंतरिक ऑडिट की व्यवस्था करने और सीसीटीवी कैमरों से कोषागार की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
ये निर्देश बिहार सरकार की ‘सुशासन’ नीति के अनुरूप हैं, जो भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर केंद्रित है।
जिला कोषागार की भूमिका और चुनौतियां
अररिया जिला कोषागार बिहार राज्य के वित्त विभाग के अधीन कार्य करता है। यह जिले के सभी सरकारी विभागों के लिए धन का प्रबंधन करता है, जिसमें मनरेगा, पीएम किसान, और स्वास्थ्य योजनाएं शामिल हैं। जिले की आबादी लगभग 28 लाख है, और कोषागार से सालाना करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में होने के कारण यहां चुनौतियां अधिक हैं, जैसे इंटरनेट की कमी, कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या, और पुरानी प्रणालियां।
पिछले वर्षों में अररिया कोषागार में कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं, जैसे 2024 में एक घोटाला जिसमें लाखों रुपये की हेराफेरी हुई थी। ऐसे में डीएम का निरीक्षण समय पर हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार कम होगा। बिहार के अन्य जिलों जैसे पूर्णिया और किशनगंज में भी इसी प्रकार के निरीक्षण हो रहे हैं, जो राज्य स्तर पर वित्तीय सुधार का हिस्सा हैं।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
इस निरीक्षण का प्रभाव जिले के प्रशासन पर सकारात्मक पड़ा है। कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ी है, और स्थानीय निवासियों ने DM की सक्रियता की सराहना की है। एक स्थानीय व्यापारी, रामेश्वर प्रसाद ने कहा, “डीएम साहब का यह कदम सरकारी धन की सुरक्षा के लिए जरूरी था। अब योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचेगा।” वहीं, विपक्षी नेताओं ने इसे दिखावा बताते हुए कहा कि असली समस्या कर्मचारियों की कमी है, जिस पर ध्यान देना चाहिए।
व्यापक रूप से, यह निरीक्षण बिहार सरकार की डिजिटल इंडिया पहल से जुड़ा है। राज्य में ई-कोषागार सिस्टम को मजबूत करने के प्रयास हो रहे हैं, जिससे सभी जिलों में एकरूपता आएगी। अररिया जैसे सीमावर्ती जिलों में जहां तस्करी और अवैध लेन-देन की आशंका अधिक है, ऐसे निरीक्षण सुरक्षा बढ़ाते हैं।
अन्य जिलों में समान प्रयास: तुलनात्मक दृष्टि
बिहार के अन्य जिलों में भी डीएम स्तर पर निरीक्षण बढ़े हैं। उदाहरण के लिए, पटना में डीएम ने हाल ही में राजस्व विभाग का निरीक्षण किया, जबकि मुजफ्फरपुर में वित्तीय अनियमितताओं पर जांच चल रही है। अररिया का मामला विशेष है क्योंकि यहां नेपाल सीमा के कारण अंतरराष्ट्रीय लेन-देन भी प्रभावित होते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से राज्य कोषागारों के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जो डिजिटल ट्रैकिंग पर जोर देते हैं।
निष्कर्ष और सुझाव
अररिया DM विनोद दुहन का कोषागार निरीक्षण प्रशासनिक दक्षता का एक उदाहरण है। यह न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि भविष्य में पारदर्शी वित्त प्रबंधन की नींव रखेगा। सरकार को सुझाव है कि ऐसे निरीक्षण नियमित हों और कर्मचारियों की क्षमता निर्माण पर फोकस किया जाए। साथ ही, जनता को वित्तीय प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक बनाने के लिए अभियान चलाए जाएं। उम्मीद है कि यह कदम अररिया को एक मॉडल जिला बनाएगा, जहां सुशासन की मिसाल दी जाए।
Sources: अररिया डिस्ट्रिक्ट वेबसाइट