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6 जनवरी 2026, Sensex और NIFTY में गिरावट: भारतीय शेयर बाजार ने आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की, जिसमें Sensex 376 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 85,063.34 पर बंद हुआ, जबकि NIFTY 71.60 पॉइंट्स गिरकर 26,178.70 पर पहुंचा। यह गिरावट मुख्य रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज और ट्रेंट जैसे हेवीवेट स्टॉक्स में भारी बिकवाली से प्रभावित हुई, जिसने बाजार की सेंटीमेंट को कमजोर किया। दिन के दौरान Sensex 540 पॉइंट्स तक गिरा था, लेकिन कुछ रिकवरी के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन्स, प्रॉफिट बुकिंग और विदेशी निवेशकों की बिकवाली इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के कारणों, प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बाजार की पृष्ठभूमि और हालिया ट्रेंड

भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। 2025 के अंत में बाजार ने नई ऊंचाइयों को छुआ था, जहां Sensex 85,500 से ऊपर और NIFTY 26,500 के करीब पहुंचा था। लेकिन 2026 की शुरुआत में ही बाजार में कमजोरी दिखाई देने लगी। 5 जनवरी को Sensex 322 पॉइंट्स गिरा था, और आज की गिरावट ने इसे लगातार दूसरा नकारात्मक दिन बना दिया। कुल मिलाकर दो दिनों में सेंसेक्स लगभग 800 पॉइंट्स गिर चुका है।

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत हैं। एशियाई बाजारों में सकारात्मक संकेत थे, लेकिन अमेरिकी बाजारों में जियोपॉलिटिकल चिंताओं के कारण दबाव देखा गया। विशेष रूप से, अमेरिका-वेनेजुएला तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने की चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका की नाराजगी भी बाजार पर असर डाल रही है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ दिनों में भारतीय इक्विटी से लगभग 85 बिलियन डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं, जो IT सेक्टर में H-1B वीजा प्रतिबंधों और स्लोडाउन की आशंकाओं से जुड़ा है।

गिरावट के प्रमुख कारण

  1. हेवीवेट स्टॉक्स में बिकवाली: रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर्स में 4-5% की गिरावट आई, जो 10 महीनों में सबसे बड़ी एकल-दिवसीय गिरावट है। इससे बाजार से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ट्रेंट के शेयर्स 8-9% गिरकर 4,060.65 रुपये पर पहुंचे, भले ही दिसंबर क्वार्टर में 17% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की गई। HDFC बैंक के शेयर्स 2% गिरे, जो 3 महीनों के निचले स्तर पर पहुंचे। ये हेवीवेट स्टॉक्स इंडेक्स के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं।
  2. जियोपॉलिटिकल टेंशन्स: अमेरिका की ओर से भारत पर टैरिफ बढ़ाने की आशंका बढ़ी है, जो भारत के रूस से तेल आयात से जुड़ी है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन वार्ताओं में प्रगति की खबरें भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ये कारक निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।
  3. प्रॉफिट बुकिंग और FII सेलिंग: हालिया रैली के बाद निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। FII ने IT स्टॉक्स में भारी बिकवाली की, जिससे निफ्टी IT इंडेक्स 1.4% गिरा। इंफोसिस और TCS जैसे स्टॉक्स में गिरावट देखी गई।
  4. सेक्टर-विशिष्ट दबाव: ऑयल एंड गैस सेक्टर में कमजोरी, जहां निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स अंडरपरफॉर्म कर रहा है। VIX इंडेक्स 6% बढ़ा, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।
  5. ग्लोबल क्यूज: हालांकि एशियाई बाजार सकारात्मक बंद हुए, लेकिन अमेरिकी बाजारों में गिरावट की आशंका ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया।

बाजार पर प्रभाव

यह गिरावट ब्रॉडर मार्केट को भी प्रभावित कर रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोर हुए, हालांकि रियल्टी सेक्टर ने आउटपरफॉर्म किया। बैंक निफ्टी फ्लैट रहा, लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट नकारात्मक है। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 83.50 के स्तर पर पहुंचा। कुछ स्टॉक्स जैसे इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) में 3-9% की बढ़त देखी गई, जो बिजली ट्रेड वॉल्यूम में 11.9% वृद्धि से आई।

X प्लेटफॉर्म पर यूजर्स ने इस गिरावट को ‘पैनिक’ बताया, जहां रिलायंस की गिरावट को प्रमुख रूप से जिम्मेदार ठहराया गया। एक यूजर ने कहा कि बाजार में ब्रेड्थ कमजोर है, और अगर 84,500 के नीचे ट्रेड हुआ तो और गिरावट आ सकती है।

विशेषज्ञ विश्लेषण और भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषकों का मानना है कि बाजार अभी भी प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है, और गिरावट को खरीदारी का मौका माना जा सकता है। हालांकि, अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन्स बढ़े, तो सेंसेक्स 84,000 के नीचे जा सकता है। सकारात्मक पक्ष पर, रूस-यूक्रेन डील की प्रगति बाजार को सपोर्ट दे सकती है। IDFC फर्स्ट बैंक के नए क्रेडिट कार्ड लॉन्च जैसे विकास रिटेल सेक्टर को बूस्ट दे सकते हैं।

दीर्घकालिक रूप से, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

निष्कर्ष

आज की गिरावट भारतीय बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाती है, जहां ग्लोबल घटनाएं और घरेलू प्रॉफिट बुकिंग बड़ा असर डालती हैं। हालांकि, बाजार में रिकवरी की गुंजाइश है, लेकिन निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर फोकस करना चाहिए। आने वाले दिनों में अमेरिकी नीतियों और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर नजर रहेगी।

Sources: मनी कंट्रोल, इक्विटी मास्टर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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