6 जनवरी 2026, SIR वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची से कुल 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिसमें 46 लाख मृतकों के नाम शामिल हैं। यह कदम नागरिकता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि मूल रूप से 15.44 करोड़ मतदाताओं वाली सूची अब 12.55 करोड़ रह गई है। यह देश में सबसे अधिक नाम हटाने का मामला है, जो मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। इस प्रक्रिया ने राजनीतिक हलकों में विवाद पैदा कर दिया है, जहां विपक्षी दल इसे साजिश बता रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के विवरण, कारणों, प्रतिक्रियाओं और भविष्य के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। SIR प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और इसका उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना था, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने से जनता में असंतोष फैल रहा है।
SIR प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग की एक विशेष पहल है, जो मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चलाई जाती है। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया पिछले साल शुरू हुई, जिसमें घर-घर जाकर मतदाताओं की जांच की गई। आयोग ने बताया कि कुल 81.30 प्रतिशत मतदाताओं की पुष्टि हुई, जबकि शेष 18.70 प्रतिशत यानी 2.89 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। इस प्रक्रिया में ब्लॉक लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच करते हैं। SIR का मुख्य फोकस मृतकों, स्थायी प्रवासियों और डुप्लिकेट एंट्रीज को हटाना था। चुनाव आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि फर्जी मतदाता चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है, जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है।
SIR की आवश्यकता क्यों?
पिछले चुनावों में फर्जी वोटिंग की शिकायतें आई थीं, जिसके चलते SIR शुरू किया गया। आयोग ने कहा कि यह नागरिकता अधिनियम के तहत भी जरूरी है, ताकि केवल योग्य नागरिक ही वोट कर सकें। इस प्रक्रिया से न केवल नाम हटाए गए, बल्कि नए नाम भी जोड़े गए, लेकिन हटाए गए नामों की संख्या अधिक होने से विवाद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावी धांधली को रोकने में मददगार होगा।
हटाए गए नामों का विवरण
ड्राफ्ट सूची में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए, जिसमें से 46 लाख मृतकों के हैं। बाकी में स्थायी प्रवासी और डुप्लिकेट नाम शामिल हैं। सबसे अधिक हटावट मेरठ डिवीजन में हुई, जहां 50 लाख से अधिक नाम कटे। लखनऊ, कानपुर और अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम हटे। आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी थी, और हर नाम हटाने के लिए प्रमाण दिए गए। हालांकि, कई लोगों का कहना है कि उनके नाम बिना सूचना के हटाए गए। सूची में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के नाम अधिक हटे, जिससे सवाल उठ रहे हैं। कुल मिलाकर, यह देश की सबसे बड़ी मतदाता सफाई अभियान है।
जिलावार आंकड़े
मेरठ में 50 लाख, आगरा में 30 लाख, लखनऊ में 25 लाख नाम हटे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभाव पड़ा, जहां दस्तावेजों की कमी है। आयोग ने आंकड़े जारी किए, जो वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
कारण और प्रक्रिया
नाम हटाने के मुख्य कारण मृत्यु, स्थायी प्रवास और दोहरी एंट्री हैं। BLOs ने घर-घर सर्वे किया, और यदि मतदाता नहीं मिले, तो नाम हटा दिए गए। आयोग ने कहा कि 81.30% मतदाताओं की पुष्टि हुई, बाकी को हटा दिया। यह प्रक्रिया जनवरी 2026 में पूरी हुई, और ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी को जारी की गई। अब दावे और आपत्तियां 6 फरवरी तक दर्ज की जा सकती हैं।
तकनीकी पहलू
आयोग ने ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया, जहां मतदाता अपनी स्थिति चेक कर सकते हैं। लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी से समस्या हुई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस कदम पर राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इसे साजिश बताया, और कहा कि यह विपक्षी वोटरों को हटाने का तरीका है। कांग्रेस ने भी आलोचना की, जबकि बीजेपी ने इसे आवश्यक सफाई बताया। विवाद बढ़ने से चुनाव आयोग पर दबाव है। कई संगठनों ने प्रदर्शन की धमकी दी है।
विपक्ष का दृष्टिकोण
अखिलेश ने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है, और मांग की कि हटाए गए नामों की सूची सार्वजनिक की जाए।
आगे की प्रक्रिया और प्रभाव
ड्राफ्ट सूची पर आपत्तियां 6 फरवरी तक ली जाएंगी, उसके बाद फाइनल सूची जारी होगी। यह आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वोटर बेस कम हो गया। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मतदान प्रतिशत बढ़ाएगा, लेकिन असली मतदाताओं को प्रभावित न करे।
निष्कर्ष
SIR प्रक्रिया से उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची शुद्ध हुई, लेकिन विवादों से घिरी। आयोग को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। जनता को अपनी स्थिति चेक करनी चाहिए। यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
Sources: एनडीटीवी, इंडिया टुडे