6 जनवरी 2026, Araria रजिस्ट्री ऑफिस में भू-माफिया का घोटाला: भारत के ग्रामीण इलाकों में भूमि संबंधी घोटाले कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन बिहार के Araria जिले में हाल ही में उजागर हुआ रजिस्ट्री ऑफिस का कांड विशेष रूप से चिंताजनक है। यहां जिला अवर निबंधन कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में भू-माफिया की गहरी पैठ सामने आई है, जहां मूल दस्तावेजों को गायब कर फर्जी कागजात चिपकाकर अवैध भूमि हस्तांतरण किए जा रहे थे। इस मामले में दिसंबर 2025 में दर्ज FIR के 19 दिनों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। कुल 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बावजूद अभियुक्त फरार हैं, और जांच की गति धीमी है। यह रिपोर्ट इस घोटाले की पृष्ठभूमि, खुलासा, FIR विवरण, प्रभाव और संभावित समाधान पर प्रकाश डालती है, ताकि आम नागरिक जागरूक हों और ऐसे अपराधों पर अंकुश लग सके।
घोटाले की पृष्ठभूमि
बिहार में भू-माफिया की समस्या पुरानी है। राज्य के कई जिलों में भूमि रिकॉर्ड्स की हेराफेरी से किसानों को लाखों-करोड़ों का नुकसान होता है। Araria, जो नेपाल सीमा से सटा हुआ सीमांचल क्षेत्र का हिस्सा है, यहां भूमि विवाद और अतिक्रमण की घटनाएं आम हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में हर साल हजारों भूमि घोटाले के मामले दर्ज होते हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलना दुर्लभ है। अररिया में यह घोटाला कई वर्षों से चल रहा था, जहां भू-माफिया गिरोह रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहे थे। पिछले वर्ष भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था, जिसमें फर्जी दस्तावेजों पर म्यूटेशन (नामांतरण) किया गया। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि ऐसे घोटाले डिजिटलीकरण की कमी के कारण फल-फूल रहे हैं। भूमि की बढ़ती कीमतें, विशेष रूप से सीमा सड़कों और रेलवे ट्रैकों के कारण, माफियाओं को प्रोत्साहित करती हैं। रिकॉर्ड रूम में सुरक्षा की कमी, जैसे कोई बैरियर न होना, माफियाओं को आसानी से अंदर आने देती है।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ
घोटाले का खुलासा खुद जिला अवर निबंधक पदाधिकारी कौशल कुमार झा ने किया। उन्होंने पाया कि रिकॉर्ड रूम से मूल अभिलेख गायब कर दिए गए थे और उनकी जगह फर्जी कागजात तैयार कर चिपकाए गए थे। इससे भू-माफिया को सरकारी या निजी भूमि को अवैध रूप से दूसरे नाम पर ट्रांसफर करने में आसानी हो रही थी। जांच में पता चला कि आउटसोर्सिंग एजेंसी से नियुक्त MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) कर्मचारी रोहित रंजन और मोहम्मद शहनवाज मुख्य रूप से जिम्मेदार थे। ये लोग रिकॉर्ड रूम में घुसकर पन्ने फाड़ते थे और फर्जी दस्तावेज लगाकर म्यूटेशन करवा लेते थे। एक शिकायतकर्ता मोहम्मद निशाद की शिकायत पर जांच शुरू हुई, जिसमें खातियन नंबर 344, 345 और 346 में छेड़छाड़ पाई गई। इससे कई एकड़ भूमि प्रभावित हुई। विभाग ने CCTV फुटेज पुलिस को सौंपा, लेकिन माफियाओं का सिंडिकेट ऑफिस के आसपास सक्रिय रहता था।
FIR के विवरण और आरोपी
FIR नगर थाने में 15 दिसंबर 2025 को दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 338, 36(3), 340(2) और 61(2) के तहत धोखाधड़ी, दस्तावेजों की हेराफेरी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए। इसमें दो कर्मचारियों सहित कुल 10 आरोपी हैं: रोहित रंजन (फारबिसगंज), मोहम्मद शहनवाज (सुपौल), मोहम्मद साजिद, मोहम्मद नाजिम, शाह फहद आलम, मोजाहिद, मंजर, शाहबाज, सेनु और खजा (सभी Araria निवासी)। FIR अभिलेखापाल मोहम्मद शफी अनवर की शिकायत पर दर्ज हुई। दोनों आरोपी कर्मचारियों को पद से हटा दिया गया, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई।
कार्रवाई में देरी के कारण और वर्तमान स्थिति
19 दिनों बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, सभी नामजद अभियुक्त फरार हैं। Araria SP अंजनी कुमार ने कहा कि जांच चल रही है, लेकिन व्यावहारिक कार्रवाई का अभाव है। देरी के पीछे पुलिस की कमी, जांच की जटिलता या राजनीतिक दबाव हो सकता है। भू-माफिया अक्सर स्थानीय नेताओं से जुड़े होते हैं, जिससे जांच प्रभावित होती है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भू-माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात की, लेकिन व्यावहारिक रूप से कुछ नहीं हुआ। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि देरी से सबूत मिटाने का मौका मिल रहा है।
घोटाले के प्रभाव और समाधान
इस घोटाले के प्रभाव दूरगामी हैं। Araria जैसे गरीब जिले में किसान पहले से ही भूमि विवादों से जूझ रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों से उनकी जमीनें छिन सकती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के अलावा सामाजिक अशांति बढ़ती है। सरकारी योजनाएं जैसे PM किसान सम्मान निधि या ऋण सुविधाएं प्रभावित होती हैं। डिजिटलीकरण की कमी से ऐसे अपराध आसान हो जाते हैं। विभाग ने इस साल के अंत तक रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने की योजना बनाई है, जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन सवाल यह है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, तब तक कितने और घोटाले होंगे? विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, मांग कर रहे हैं कि CBI जांच हो।
निष्कर्ष और सुझाव
Araria का यह घोटाला बिहार के भूमि प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक मिसाल है। 19 दिनों बाद भी FIR पर कोई ऐक्शन नहीं होना शर्मनाक है। सरकार को तत्काल गिरफ्तारियां सुनिश्चित करनी चाहिए और डिजिटलीकरण को तेज करना चाहिए। यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो किसानों का विश्वास टूटेगा और विकास रुक जाएगा। आम नागरिकों के लिए सलाह है कि भूमि दस्तावेजों की जांच समय-समय पर कराएं और संदेह होने पर शिकायत करें। ऑनलाइन पोर्टल्स जैसे ‘भूमि जनकारी’ का उपयोग करें। जनता को जागरूक रहना होगा और ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स