5 जनवरी 2026, बिहार कृषि विभाग का ऐतिहासिक कदम 2 करोड़ किसानों को Digital ID– बिहार के कृषि विभाग ने किसानों के कल्याण के लिए एक क्रांतिकारी पहल की घोषणा की है। राज्य के लगभग 2 करोड़ किसानों को डिजिटल पहचान पत्र (Digital ID) जारी किए जाएंगे, जो कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगे। यह कदम केंद्र सरकार की ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ (DAM) के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से जोड़ना है। कृषि मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, “यह Digital ID किसानों को सब्सिडी, बीमा और ऋण जैसी सुविधाओं तक आसानी से पहुंच प्रदान करेगी। भ्रष्टाचार कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।” घोषणा के साथ ही विभाग ने 2026-27 तक पूर्ण क्रियान्वयन का लक्ष्य रखा है, जो बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर चल रही ‘एग्री स्टैक’ योजना का हिस्सा है, जिसमें देशभर में 11 करोड़ किसानों के लिए Digital ID का लक्ष्य है। बिहार में 2 करोड़ किसानों को लक्षित करने से राज्य की 80% कृषि आबादी कवर हो जाएगी। विभाग के अनुसार, Digital ID जारी करने की प्रक्रिया जनवरी से शुरू हो जाएगी, जिसमें आधार कार्ड और भूमि रिकॉर्ड से लिंकिंग होगी। इससे किसान पोर्टल पर एक क्लिक से योजनाओं का लाभ मिलेगा।
पृष्ठभूमि: डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन का विस्तार
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत 2024 में हुई, जब केंद्र सरकार ने 4,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों के डेटा को डिजिटाइज करना और योजनाओं को टारगेटेड बनाना है। राष्ट्रीय स्तर पर फरवरी 2025 तक 2.05 करोड़ Digital ID जारी हो चुकी हैं, और अगस्त 2025 तक यह संख्या 7 करोड़ पहुंच गई। बिहार में पहले से ‘फार्मर रजिस्ट्री’ का कार्य चल रहा था, लेकिन अब इसे डिजिटल Digital ID के रूप में विस्तारित किया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार कृषि विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 लाख किसानों को Digital ID वितरित की, जिससे सब्सिडी वितरण में 30% तेजी आई।
Digital ID में किसान का नाम, आधार नंबर, भूमि विवरण, फसल इतिहास और बैंक खाता शामिल होगा। यह ‘अग्री स्टैक’ के चार घटकों—फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, सॉइल प्रोफाइल और एग्री मार्केटप्लेस—पर आधारित है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहां 70% आबादी खेती पर निर्भर है, यह कदम उत्पादकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “Digital ID से फसल बीमा योजना (PMFBY) का क्लेम सेटलमेंट 15 दिनों में हो जाएगा, जबकि पहले महीनों लगते थे।”
लाभ: किसानों के लिए डिजिटल क्रांति
यह योजना किसानों को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाएगी। सबसे पहले, सब्सिडी वितरण पारदर्शी बनेगा। उदाहरण के लिए, उर्वरक और बीज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी, जिससे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। दूसरा, डिजिटल क्रॉप सर्वे से फसल नुकसान का तत्काल आकलन होगा, जो मुआवजे को तेज करेगा। तीसरा, ऋण और बीमा के लिए पात्रता सत्यापन आसान होगा। आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 2025 में 50 लाख किसानों को ऋण वितरण में देरी हुई थी; आईडी से यह समस्या हल हो जाएगी।
महिलाओं और छोटे किसानों के लिए विशेष प्रावधान हैं। विभाग ने 50 लाख महिला किसानों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है। इसके अलावा, मोबाइल ऐप के माध्यम से आईडी रजिस्ट्रेशन होगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच को आसान बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार की कृषि GDP में 5-7% की वृद्धि हो सकती है।
प्रतिक्रियाएं: सराहना और चुनौतियां
घोषणा पर किसान संगठनों ने स्वागत किया। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने कहा, “यह डिजिटल इंडिया का सच्चा रूप है, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी।” बिहार किसान सभा ने इसे “किसान हितैषी” बताया, लेकिन डिजिटल डिवाइड की चिंता जताई। विपक्षी दलों ने सरकार की पीठ थोड़ी ठोकी, लेकिन पूछा कि “ग्रामीण साक्षरता पर क्या कदम?” आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, “अच्छी पहल, लेकिन पिछले सालों की योजनाओं का क्या हुआ?”
सरकार ने चुनौतियों का समाधान बताया। विभाग ने 1,000 मोबाइल वैन तैनात करने और जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय स्तर पर, आलोचना है कि डेटा प्राइवेसी का खतरा है, लेकिन मंत्रालय ने कहा कि Aadhaar जैसी सुरक्षा होगी।
प्रभाव: आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन
यह योजना बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। राज्य में धान, गेहूं और मक्का की खेती प्रमुख है; Digital ID से सटीक सलाह और बाजार लिंकेज बढ़ेगा। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, डिजिटल कृषि से किसान आय 20% बढ़ सकती है। सामाजिक रूप से, यह प्रवासन कम करेगा, क्योंकि बेहतर सुविधाओं से ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा। पर्यावरणीय लाभ भी: सॉइल हेल्थ कार्ड से टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। बिहार के 40% गांवों में इंटरनेट कमजोर है, और बुजुर्ग किसानों को प्रशिक्षण की जरूरत है। विभाग ने 2026 तक 80% कवरेज का लक्ष्य रखा है।
भविष्य: पूर्ण डिजिटलीकरण की ओर
2027 तक बिहार सभी योजनाओं को डिजिटल मोड में ले जाएगा। केंद्र के साथ साझेदारी से फंडिंग सुनिश्चित है। यदि सफल रही, तो यह अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनेगी। किसान नेता प्रहलाद सिंह ने कहा, “यह क्रांति का बीज है, जो फलेगा तो देश बदलेगा।”
संक्षेप में, 2 करोड़ Digital ID बिहार के किसानों को सशक्त बनाएंगी। पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता से कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा। लेकिन सफलता के लिए ग्रामीण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना अनिवार्य है।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स