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1 जनवरी 2026, Araria: नए साल 2026 की शुरुआत धूमधाम से हुई, और बिहार के Araria जिले में स्थित कुसियारगांव बायोडायवर्सिटी पार्क इसकी चमकदार मिसाल बन गया। सीमांचल का यह हरा-भरा स्वर्ग हजारों पर्यटकों, परिवारों और युवाओं का केंद्र बन गया, जहां ठंडी हवा, हरियाली और उत्सव का संगम लोगों को बांधे रखा। पार्क में दिनभर पिकनिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्यावरण जागरूकता वर्कशॉप और आतिशबाजी के आयोजन हुए, जो न केवल मनोरंजन का माध्यम बने बल्कि प्रकृति संरक्षण के संदेश को भी मजबूत किया। अनुमान के मुताबिक, 31 दिसंबर की शाम से 1 जनवरी तक यहां 20 हजार से अधिक लोग पहुंचे, जो पार्क के इतिहास में अब तक का रिकॉर्ड है।

कुसियारगांव बायोडायवर्सिटी पार्क, जो बिहार का पहला जैव विविधता पार्क है, 2018 में स्थापित हुआ था। Araria जिले के बिशुनपुर प्रखंड में फैला यह 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र का जंगल इलाका बिहार सरकार द्वारा अधिसूचित वन भूमि है। पहले हसनपुर बालू डीहा के नाम से जाना जाने वाला यह क्षेत्र अब रानीगंज वृक्ष वाटिका के रूप में विकसित हो चुका है। पार्क का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता को संरक्षित करना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। यहां दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे, पक्षी और वन्यजीवों का घर है, जो शोधकर्ताओं के लिए एक खजाना साबित हो रहा है। पत्थरों और बोल्डर्स से निर्मित एम्फीथिएटर सांस्कृतिक प्रदर्शनों और पर्यावरण कार्यशालाओं के लिए आदर्श स्थान है, जबकि घने जंगलों और झीलों का नजारा पर्यटकों को शांति का एहसास कराता है।

नए साल पर पार्क प्रबंधन ने विशेष तैयारियां की थीं। सुबह 6 बजे से ही प्रवेश द्वार पर स्वागत समिति गठित की गई, जहां पर्यावरण थीम पर आधारित बैंड और डांस ग्रुप्स ने लोगों का स्वागत किया। पार्क के केंद्रीय मैदान में ‘ग्रीन न्यू ईयर’ नामक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने मैथिली लोकगीतों और होली-जैसे रंगों से सजा प्रदर्शन किया। बच्चे वृक्षारोपण अभियान में शामिल हुए, जहां 500 नए पौधे लगाए गए। दोपहर में पिकनिक स्पॉट्स पर परिवारों की भीड़ उमड़ी। मैरून ग्रास के मैदानों पर चटाई बिछाकर लोग भोजन का आनंद ले रहे थे, जबकि झूले और ट्रेकिंग पाथ पर युवा जोश भर रहे थे। एक पर्यटक रीना देवी ने बताया, “पिछले साल हम पटना गए थे, लेकिन इस बार कुसियारगांव ने दिल जीत लिया। यहां की शुद्ध हवा और पक्षियों की चहचहाहट ने नए साल को यादगार बना दिया। बच्चे घंटों जंगल में घूमते रहे, बिना किसी मोबाइल की जरूरत के।”

पार्क की लोकप्रियता का एक कारण इसका विविधतापूर्ण आकर्षण है। यहां हिमालयी वनस्पतियों से लेकर स्थानीय औषधीय जड़ी-बूटियों तक का संग्रह है। प्राकृतिक झरने और कृत्रिम जलाशय पक्षी प्रेक्षकों के लिए स्वर्ग हैं, जहां साल भर 150 से अधिक प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं। ट्रिप.कॉम जैसी साइटों पर पार्क को ‘नेचर एंड वाइल्डलाइफ’ कैटेगरी में टॉप रेटिंग मिली है, जहां आउटडोर एक्टिविटीज जैसे माउंटेन क्लाइंबिंग और बर्ड वॉचिंग को हाइलाइट किया गया है। पर्यटन विभाग, बिहार सरकार ने फेसबुक पर हाल ही में पोस्ट किया था, “प्रकृति से जुड़ने का सही स्थान – कुसियारगांव बायोडायवर्सिटी पार्क!” इस पोस्ट को हजारों लाइक्स मिले, जो नए साल की भीड़ का पूर्वानुमान दे रहे थे।

हालांकि, उत्साह के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। ठंड की लहर के बावजूद पार्क में ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बनी, जिसे स्थानीय पुलिस ने डायवर्जन से संभाला। पार्क अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने कहा, “हमने 2026 के लिए पार्क को रिन्यूएबल एनर्जी पर आधारित बनाया है। सोलर लाइट्स, वाटर हार्वेस्टिंग और प्लास्टिक-फ्री जोन ने पर्यटकों को आकर्षित किया। लेकिन भीड़ प्रबंधन के लिए हमें और वॉलंटियर्स की जरूरत है।” उन्होंने आगे बताया कि पार्क में अब वर्चुअल रियलिटी जोन भी शुरू किया गया है, जहां विजिटर्स प्राचीन वनों का डिजिटल अनुभव ले सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से युवाओं में लोकप्रिय रही, जो सोशल मीडिया पर #GreenNewYearAraria हैशटैग के साथ फोटो शेयर कर रहे थे।

नए साल का यह आयोजन पर्यावरण जागरूकता का भी प्रतीक बना। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार उपस्थित हुए, जिन्होंने कहा, “कुसियारगंज न केवल मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी लड़ाई का प्रतीक है। 2026 में हम पार्क को इको-टूरिज्म हब बनाएंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता भी आएंगे।” उनके भाषण के बाद एक वर्कशॉप हुई, जिसमें 200 से अधिक लोगों ने जैव विविधता संरक्षण पर चर्चा की। स्थानीय एनजीओ ‘ग्रीन अर्थ फाउंडेशन’ ने कचरा प्रबंधन अभियान चलाया, जिससे पार्क साफ-सुथरा रहा। एक बुजुर्ग पर्यटक रामलाल यादव ने भावुक होकर कहा, “यह पार्क हमारी धरोहर है। नए साल पर यहां आकर लगा कि भविष्य हरा-भरा ही रहेगा।”

Araria जैसे सीमावर्ती जिले में कुसियारगांव पार्क का महत्व और बढ़ जाता है। यहां नेपाल सीमा से सटा होने के कारण पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। पिछले साल पार्क से 5 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया, जो 2026 में दोगुना होने की उम्मीद है। सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत पार्क में स्थानीय हस्तशिल्प स्टॉल भी लगाए गए, जहां मैथिली पेंटिंग्स और जैविक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध थे। यह न केवल आय का स्रोत बना बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया।

निष्कर्षतः नया साल 2026 कुसियारगांव बायोडायवर्सिटी पार्क के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। यह स्थान अब केवल एक पार्क नहीं, बल्कि उत्सव, शिक्षा और संरक्षण का प्रतीक है। जैसे-जैसे सूर्यास्त के साथ आतिशबाजी की चमक आकाश को रंगीन कर रही थी, वैसे ही लोगों के चेहरों पर उम्मीद की किरण चमक रही थी। आने वाले वर्षों में यह पार्क सीमांचल को पर्यटन मानचित्र पर चमकाने का माध्यम बनेगा। यदि आप भी प्रकृति के करीब आना चाहते हैं, तो कुसियारगंज आपका इंतजार कर रहा है। नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं!

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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