28 दिसंबर 2025, Bihar: Bihar की राजधानी पटना में दूध की एक बूंद के बिना नकली पनीर की सबसे बड़ी मंडी फल-फूल रही है। यहां के सब्जी बाजारों, रेलवे लाइनों के किनारे और व्यस्त चौराहों पर एजेंट खुले आम सौदेबाजी कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ कि असली पनीर के 400 रुपए प्रति किलो दाम वाले माल को 80-90 रुपए में बेचा जा रहा है। एक सिंगल डील में 12 हजार किलो पनीर की सप्लाई का दावा किया गया, जो होटलों, कैटरिंग और पार्टियों तक पहुंच रहा है। यह न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जहर घोल रहा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
नकली पनीर की फैक्ट्रियां: दूध की जगह केमिकल का राज
पटना के आसपास के इलाकों जैसे बख्तियारपुर, खुशरोपुर, रघोपुर (दियारा क्षेत्र) और मनेर में छोटी-छोटी ‘जनता डेयरी’ जैसी इकाइयों में यह काला कारोबार पनप रहा है। यहां कोई दूध नहीं, सिर्फ केमिकल और पाउडर का इस्तेमाल होता है। सामग्री में बेकिंग सोडा, पाम ऑयल, मैदा, डिटर्जेंट, कोल टार डाई, यूरिया, सल्फ्यूरिक एसिड, स्टार्च और कभी-कभी कॉस्टिक सोडा शामिल होता है। प्रक्रिया सरल लेकिन घातक है: एक बड़े कढ़ाई में पानी डालकर इन पाउडरों और केमिकल को मिलाया जाता है। गैस पर उबालने पर मिश्रण दूध जैसा सफेद हो जाता है। इसे गाढ़ा करके हिलाया जाता है और छान लिया जाता है। एक क्विंटल नकली पनीर मात्र 40 मिनट में तैयार! दो किस्में बनाई जाती हैं—एक ज्यादा पानी वाली (नरम, जो सिकने पर 20 किलो कम हो जाती है) और दूसरी टाइट (बेहतर क्वालिटी)।
एजेंटों का दावा है कि दो-तीन घंटे में जितना चाहिए, उतना पनीर बन जाएगा। टाटा पार्क के पास एक एजेंट रवि राय ने स्टिंग में कहा, “कितना चाहिए? हो जाएगा। तीन घंटे में सब तैयार कर देते हैं… 80 रुपए में भी लग जाएगा। जहां बोलेंगे, वहां भेज दिया जाएगा। ऑटो, ट्रेन से जाता है… 400 वाला पनीर 80 रुपए में। कहीं पुलिस का डर तो नहीं? नहीं, कुछ नहीं होगा। सब मिल-जुलकर चलता है।” इसी तरह, आशोक राजपथ के गोपी राय ने बोला, “खुद बनाता हूं… हो जाएगा (3 क्विंटल)। लेकिन रेट 200 का ही लगेगा। रोज होटल में दे रहा हूं। कोई शिकायत नहीं मिल रही। मेरा माल रोज आसनसोल, रांची भी जाता है। सब ट्रेन से सप्लाई करते हैं, कहीं कोई नहीं पकड़ता।”
बाजार का पैमाना: 12 हजार किलो की डील और मुनाफे का खेल
पटना के टाटा पार्क (पटना जंक्शन के पास), आशोक राजपथ सब्जी बाजार, गुलजार बाग, अगमकुआं शीतला मंदिर बाजार, दिनकर गोलंबर और कंकरबाग सब्जी बाजार इनकी मुख्य मंडियां हैं। यहां प्लास्टिक में लिपटा नकली पनीर खुले में रखा रहता है। डीलर एक बार में 1,000 से 5,000 किलो तक सप्लाई करने को तैयार। स्टिंग में 12 हजार किलो की डील कैमरे पर कैद हुई, जहां एजेंटों ने कहा, “जितना बोलिएगा, उतना दे देंगे।” दैनिक बिक्री 35-40 किलो से शुरू होकर 2 क्विंटल तक पहुंच जाती है। न्यू ईयर और बर्थडे पार्टियों के लिए 1.5-2 क्विंटल, होटलों के लिए 3 क्विंटल की डिमांड रहती है।
मुनाफा जबरदस्त है। एजेंट 80-90 रुपए किलो में खरीदते हैं, फिर होटलों को 150 रुपए में बेचते हैं। होटल वाले इसे 280-380 रुपए में ग्राहकों को थमा देते हैं। एक डीलर राय जी ने कहा, “ये सब पाउडर से तैयार होता है… 100 रुपए किलो। हो जाएगा (1.5 क्विंटल)… इसीलिए बोल रहा हूं, 100 रुपए वाला आंख मूंदकर ले जाइए। कोई शिकायत नहीं मिलेगी। होटल वाले, बड़े-बड़े होटल वाले, सब यहीं से लेते हैं।” मध्यस्थ जैसे जेपी बाजार को जोड़ते हैं, और उत्पादन पटना की फैक्ट्रियों में होता है।
वितरण नेटवर्क: चार राज्यों तक जहर का निर्यात
यह नकली पनीर सिर्फ पटना तक सीमित नहीं। झारखंड (रांची), पश्चिम बंगाल (आसनसोल, कोलकाता), नेपाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सप्लाई होती है। साउथ Bihar एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों, ऑटो और पिकअप से माल भेजा जाता है। होटल, कैटरिंग, शादियां और पार्टियां मुख्य ग्राहक। एजेंट नीरज ने कंकरबाग में कहा, “जितना बोलिएगा, उतना दे देंगे… मिल जाएगा (2 क्विंटल)। जहां बोलिएगा, वहां पहुंचा भी दे देंगे। रोज पहुंचाते हैं।” एजेंटों का दावा है कि पुलिस से कोई डर नहीं, सब ‘मिल-जुलकर’ चलता है।
स्वास्थ्य पर घातक असर: जहर का धंधा
यह नकली पनीर उपभोक्ताओं के लिए जहर है। डिटर्जेंट किडनी-लीवर को नुकसान पहुंचाता है, यूरिया-कॉस्टिक सोडा कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। स्टार्च से वजन बढ़ना, डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम। तत्काल प्रभाव: पेट दर्द, डायरिया, उल्टी, ब्लोटिंग और फूड पॉइजनिंग। स्किन एलर्जी और ऑर्गन डैमेज लंबे समय में घातक। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों-न्यू ईयर पर डिमांड बढ़ने से लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। FSSAI ने 17 दिसंबर को नकली पनीर-दूध पर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया, लेकिन Bihar में संसाधनों की कमी से कार्रवाई धीमी।
प्रशासन की चुप्पी: कार्रवाई की जरूरत
हालांकि स्टिंग से कारोबार उजागर हुआ, लेकिन कोई छापेमारी नहीं। डीलरों की बेफिक्री से साफ है कि निगरानी की कमी है। Bihar सरकार और FSSAI को तत्काल सैंपलिंग, छापे और सख्त कानून लागू करने चाहिए। उपभोक्ता सतर्क रहें: असली पनीर सिकने पर ब्राउन होता है, नकली तेल छोड़ता है। घर पर टेस्ट: पानी में उबालें, नकली घुल जाता है।
यह काला कारोबार न केवल अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहा, बल्कि जन स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा। न्यू ईयर पर जश्न के बीच जहर न थमे, इसके लिए तुरंत एक्शन जरूरी। अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें।
Sources: दैनिक भास्कर