27 दिसंबर 2025, MGNREGA: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ग्रामीण भारत के करोड़ों मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में केंद्रीय कार्यसमिति (CWC) की बैठक में ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया गया, जो 5 जनवरी 2026 से पूरे देश में धूमधाम से चलेगा। यह आंदोलन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करने और उसके स्थान पर प्रस्तावित ‘विकसित भारत-ग्राम रोजगार अधिनियम’ (VB-G RAM G Act) को रद्द करने की मांग पर केंद्रित होगा। कांग्रेस का कहना है कि यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और सरकार का यह प्रयास लाखों परिवारों को बेरोजगारी की ओर धकेल देगा। CWC बैठक में लिए गए इस संकल्प से पार्टी ने न केवल ग्रामीण मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति को भी मजबूत किया।
MGNREGA, जो 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, 100 दिनों का गारंटीड रोजगार प्रदान करता है। 2025 में इस योजना के तहत 5 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ मिला, और कुल व्यय 1.2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा। लेकिन विपक्ष के आरोप हैं कि केंद्र सरकार ने फंडिंग में कटौती की, Aadhaar लिंकिंग जैसे नियमों से लाभार्थियों को परेशान किया, और अब VB-G RAM G Act के जरिए इसे पूरी तरह बदलने की साजिश रच रही है। यह नया अधिनियम कथित तौर पर ‘विकसित भारत’ के नाम पर ग्रामीण रोजगार को कॉर्पोरेट हितों के हवाले करने का प्रयास है, जिसमें रोजगार की गारंटी कमजोर हो जाएगी।
CWC बैठक: संकल्प और रणनीति
27 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित CWC की इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत प्रमुख नेता मौजूद थे। खड़गे ने कहा, “CWC बैठक में हमने मनरेगा बचाओ आंदोलन 5 जनवरी 2026 से शुरू करने का संकल्प लिया है। हमने शपथ ली है कि हम इस योजना को बचाने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।” बैठक में अन्य मुद्दों जैसे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और राज्य कार्यान्वयन रिपोर्ट (SIR) पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने VB-G RAM G Act को ‘ग्रामीण भारत के खिलाफ साजिश’ करार देते हुए इसकी तत्काल वापसी की मांग की।
आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट है: 5 जनवरी से राज्य स्तर पर रैलियां, धरने और पदयात्राएं होंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर संघों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा, “मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों का अधिकार है। सरकार इसे छीनना चाहती है, लेकिन हम इसे बचाएंगे।” पार्टी ने सभी प्रदेश इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय मुद्दों को जोड़कर आंदोलन को व्यापक बनाएं।
MGNREGA पर संकट: कारण और आंकड़े
कांग्रेस का आरोप है कि 2025 में MGNREGA के लिए बजट 60,000 करोड़ रुपये से घटाकर 40,000 करोड़ किया गया, जिससे 2 करोड़ मजदूरों को प्रभावित हुआ। VB-G RAM G Act इस समस्या को और गहरा करेगा, क्योंकि इसमें रोजगार की अवधि 100 से घटाकर 50 दिन करने का प्रस्ताव है, और निजी कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, योजना ने 2025 में 300 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित किया, जो सूखे और बेरोजगारी से जूझते गांवों के लिए वरदान साबित हुआ।
विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताया है। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वे आंदोलन में भाग लेंगे। हालांकि, भाजपा ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बताते हुए खारिज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन ग्रामीण मतदाताओं को एकजुट कर सकता है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले।
| मुद्दा | वर्तमान स्थिति (MGNREGA) | प्रस्तावित बदलाव (VB-G RAM G Act) | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| रोजगार अवधि | 100 दिन | 50 दिन | बेरोजगारी में वृद्धि |
| बजट आवंटन | 1.2 लाख करोड़ (2025) | 50% कटौती | फंड की कमी |
| लाभार्थी | 5 करोड़ परिवार | कॉर्पोरेट प्राथमिकता | गरीबों का नुकसान |
| कार्यान्वयन | पंचायत स्तर | निजी भागीदारी | पारदर्शिता में कमी |
आंदोलन का महत्व: ग्रामीण भारत की आवाज
यह आंदोलन केवल MGNREGA तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र ग्रामीण संकट का प्रतीक है। कोविड के बाद ग्रामीण प्रवासन बढ़ा है, और बेरोजगारी दर 7% से ऊपर बनी हुई है। मनरेगा ने महिलाओं को 60% भागीदारी दी, जिससे सशक्तिकरण बढ़ा। यदि यह योजना कमजोर हुई, तो लाखों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। कांग्रेस का यह कदम UPA के विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी है, जो 2024 लोकसभा चुनावों में ग्रामीण वोटों पर केंद्रित था।
आंदोलन में डिजिटल अभियान भी शामिल होंगे, जैसे #SaveMGNREGA हैशटैग के साथ सोशल मीडिया कैंपेन। पार्टी ने मजदूरों से अपील की है कि वे स्थानीय कांग्रेस कार्यालयों से जुड़ें।
निष्कर्ष: संघर्ष की शुरुआत
‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ ग्रामीण भारत के लिए एक नई उम्मीद की किरण है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह चुप नहीं बैठेगी। 5 जनवरी से सड़कें गवाह बनेंगी इस संघर्ष की, जहां करोड़ों आवाजें एक होंगी। सरकार को अब फैसला लेना होगा—क्या वह गरीबों के अधिकारों की अनदेखी करेगी?