26 दिसंबर 2025, Pappu Yadav: बिहार के पूर्णिया जिले में आज भूमि सुधार जनकल्याण संवाद के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जमकर आग बबूला हो गए। एक विधवा महिला की फूट-फूटकर रोने वाली शिकायत सुनकर भावुक हुए सिन्हा ने न केवल अधिकारियों को फटकार लगाई, बल्कि सीधे पूर्णिया सांसद Pappu Yadav पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “किसी नेता के दबाव में हम नहीं डरेंगे। भू-माफिया हो या कोई बड़ा नाम, कानून सबके लिए बराबर है।” यह बयान Pappu Yadav के हालिया आरोपों के जवाब में आया, जहां उन्होंने सिन्हा के विभाग के एक सीओ पर 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का इल्जाम लगाया था। संवाद में 50 से अधिक शिकायतें सुनी गईं, और सिन्हा ने मौके पर ही कई मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिए।
कार्यक्रम प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ, जहां सैकड़ों ग्रामीण और शहरी निवासी अपनी जमीन से जुड़ी परेशानियां लेकर पहुंचे। सिन्हा ने कहा कि भूमि विवाद बिहार की सबसे बड़ी समस्या है, जो गरीबों को सबसे अधिक सताता है। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि दबंगों ने उनकी पैतृक जमीन पर कब्जा कर लिया है, और थाने में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला की आंखों में आंसू देख सिन्हा खुद भावुक हो गए। उन्होंने सीओ और आरओ को तलब कर कहा, “यह क्या हो रहा है? अगर अफसर ही भू-माफिया के साथ हैं, तो जनता का क्या होगा?” उन्होंने तत्काल एफआईआर दर्ज करने और जमीन खाली कराने का आदेश दिया। इसी तरह, कसबा की नसरीन बानो ने पति की मौत के बाद फर्जी कागजात से जमीन हड़पने की शिकायत की, जिस पर सिन्हा ने जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए।
सिन्हा का Pappu Yadav पर सीधा प्रहार तब हुआ जब एक शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ प्रभावशाली लोग दबाव डालकर म्यूटेशन रद्द करा रहे हैं। सिन्हा ने इसे जोड़ते हुए कहा, “पूर्णिया में कुछ नेता खुद भू-माफिया के संरक्षक बने घूम रहे हैं। वे अफसरों पर दबाव डालते हैं, लेकिन हम किसी के आगे नहीं झुकेंगे।” यह बयान स्पष्ट रूप से पप्पू यादव की ओर इशारा कर रहा था, जिन्होंने चार दिन पहले एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर पूर्णिया के नगर सर्कल के सीओ दिवाकर कुमार पर 50 लाख रुपये की घूस मांगने का आरोप लगाया था। यादव ने लिखा था, “विजय सिन्हा जी, बड़ी-बड़ी बातें करने से कुछ नहीं होगा। आपका सीओ ही सबसे बड़ा भू-माफिया है। म्यूटेशन के लिए 50 लाख मांगता है, नहीं देने पर पुराना म्यूटेशन रद्द कर देता है।”
यह विवाद नया नहीं है। सिन्हा, जो राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग संभालते हैं, पिछले एक महीने से भूमि माफिया के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। 18 दिसंबर को पटना में विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा था कि माइनिंग माफिया की तरह भूमि माफिया को भी बख्शा नहीं जाएगा। सभी सीओ को 31 दिसंबर तक दाखिल-खारिज और म्यूटेशन में सुधार लाने का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन Pappu Yadav ने इसे खोखला बताते हुए कहा कि अफसर ही माफिया के साथ मिले हैं। Pappu Yadav का यह हमला सिन्हा के ‘एक्शन मोड’ को चुनौती देता है, जहां वे विभिन्न जिलों में अधिकारियों की फटकार लगा रहे हैं। एक वीडियो में Pappu Yadav ने कहा, “खाली बोलने से नहीं चलेगा। सीओ माफिया से बड़ा है।”
पूर्णिया जैसे सीमांचल क्षेत्र में भूमि विवाद गंभीर समस्या है। यहां बाढ़ और नदियों के कारण जमीन की सीमाएं बदलती रहती हैं, जिसका फायदा दबंग उठाते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, पिछले साल 5,000 से अधिक भूमि विवाद दर्ज हुए, जिनमें से 40 प्रतिशत गरीब महिलाओं और विधवाओं से जुड़े थे। सिन्हा ने आज के संवाद में 51 शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि मेडिकल लीव लेकर बचने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी, और भ्रष्ट अफसरों का पीछा श्मशान तक करेंगे। कार्यक्रम में डीएम और अन्य अधिकारी मौजूद थे, जिन्हें सिन्हा ने जमीन सर्वे और डिजिटलीकरण तेज करने को कहा।
Pappu Yadav की ओर से आज तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन उनके समर्थक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “सिन्हा जी खुद को हीरा बताते हैं, लेकिन उनके विभाग में कोयला है।” विपक्षी दल जैसे राजद ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने सिन्हा की तारीफ की। पूर्व सीएम राबड़ी देवी के सरकारी आवास खाली कराने के विवाद के बीच यह टकराव बिहार की राजनीति को और गरमा सकता है। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश सरकार भूमि सुधार को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन ऐसे आरोप सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
सिन्हा ने संवाद के अंत में कहा, “भूमि सुधार केवल कागजों पर नहीं, जनता के दरवाजे तक पहुंचेगा।” यदि यह अभियान सफल रहा, तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। लेकिन Pappu Yadav जैसे मुखर नेता इसे चुनौती देंगे। सवाल यह है कि क्या यह टकराव भूमि माफिया को जड़ से उखाड़ेगा, या केवल राजनीतिक बयानबाजी साबित होगा? पूर्णिया की सड़कों पर चर्चा यही है कि सत्ता और विपक्ष के बीच यह जंग जनहित में होगी या सत्ता की लड़ाई। अंततः, बिहार की मिट्टी पर किसान और गरीब ही असली जज हैं।
Sources: प्रभात खबर