25 दिसंबर 2025, Bihar: Biharके शराबबंदी कानून के बावजूद अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है, और इसका सबसे भयावह रूप सामने आया है। एक युवा सरकारी अधिकारी, जिसने हाल ही में सरकारी नौकरी हासिल की थी, अपने दोस्त की शादी के जश्न में ‘ब्रांडेड’ व्हिस्की पीने के बाद सुबह अचानक अंधा हो गया। दिल्ली के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने इस घटना की सच्चाई उजागर की है—यह कोई सामान्य नशा नहीं, बल्कि मिथेनॉल के जहर से ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाने वाला मामला है। राज्य में शराब की किलेबंदी के 9 साल बाद भी ऐसी घटनाएं आम हो रही हैं, जहां ब्रांडेड बोतलों में मिलावटी शराब बिक रही है। यह हादसा न केवल एक व्यक्ति की जिंदगी बर्बाद कर गया, बल्कि पूरे समाज को सतर्क कर रहा है।
घटना Bihar के किसी अनाम जिले में हुई, जहां युवा अधिकारी अपने मित्र की शादी में शामिल होने गया था। शादी के उत्साह में सभी मेहमानों को ‘प्रीमियम ब्रांडेड व्हिस्की’ परोसी गई, जो अवैध रूप से मंगाई गई थी। रात भर जश्न मनाने के बाद अगली सुबह अधिकारी को आंखों में कुछ गड़बड़ महसूस हुई। धीरे-धीरे उसकी दृष्टि धुंधली पड़ने लगी और कुछ ही घंटों में पूरी तरह चली गई। दर्द रहित यह अंधापन इतना अचानक था कि परिवार वाले स्तब्ध रह गए। तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां ब्रेन MRI और फंडस फोटोग्राफी से मिथेनॉल विषाक्तता की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि यह ‘मिथेनॉल इंड्यूस्ड टॉक्सिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी’ है, जिसमें ऑप्टिक नर्व फाइबर्स को अपूरणीय क्षति पहुंच जाती है।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में इसकी विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा, “मिथेनॉल एक जहरीला ऑर्गेनिक अल्कोहल है, जो लीवर द्वारा फॉर्मिक एसिड में टूट जाता है। यह एसिड सेलुलर स्तर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देता है और नर्व टिश्यू को सीधे नुकसान पहुंचाता है।” डॉ. चावला ने आगे चेतावनी दी, “ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचने पर सूजन, फूलन और नर्व फाइबर्स का डैमेज हो जाता है। दृष्टि हानि अचानक और बिना दर्द के होती है—धुंधली नजर, टनल विजन या पूर्ण अंधापन। आधुनिक चिकित्सा के पास इसे उलटने की सीमित क्षमता है। कोई ‘सुरक्षित’ मात्रा नहीं होती।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मिलावटी शराब की गंध या स्वाद से इसका पता नहीं चलता। “जो ब्रांडेड बोतल लगे, वह आसानी से मिलावटी हो सकती है।” यह विषाक्तता गरीबों तक सीमित नहीं, बल्कि शादियों और पार्टियों जैसे सामाजिक आयोजनों में भी घुसपैठ कर रही है, खासकर शुष्क राज्य में।
यह मामला Bihar की शराबबंदी नीति की विफलता का प्रतीक है। 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू की गई शराब निषेध कानून ने राज्य को ‘ड्राई स्टेट’ बना दिया, लेकिन इससे अवैध शराब का काला बाजार फल-फूल गया। मिलावटखोर अब सस्ते में उत्पादन के लिए इथेनॉल की जगह मिथेनॉल मिला देते हैं, जो ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है। मिथेनॉल की छोटी मात्रा भी अंधापन या मौत का कारण बन सकती है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों ऐसी घटनाएं दर्ज हुई हैं। उदाहरण के लिए, मार्च 2025 में पश्चिम Bihar के मकबूल हाशमी (30 वर्ष) ने अवैध शराब पीने के बाद स्थायी अंधापन झेला। अक्टूबर 2024 में भी एक व्यक्ति ने पंचायत चुनाव रैली के दौरान मिलावटी शराब पीकर अपनी आंखें गंवा दीं। दिसंबर 2022 में छपरा जिले में 82 से अधिक मौतें हुईं, जब जहरीली शराब का एक बैच घूम गया। कुल मिलाकर, शराबबंदी के बाद से बिहार में 500 से ज्यादा मौतें और असंख्य अंधेपन के मामले सामने आ चुके हैं।
सरकारी अधिकारी का यह हादसा और भी चिंताजनक है, क्योंकि यह दर्शाता है कि उच्च वर्ग भी इस जाल में फंस रहा है। युवा कर्मचारी, जो नौकरी पाकर खुश था, अब जिंदगी भर की अंधेरी जंग लड़ रहा है। डॉ. चावला के अनुसार, इलाज में एथेनॉल इंजेक्शन या फोलिनिक एसिड से विषाक्तता को कम किया जा सकता है, लेकिन अगर देरी हो जाए तो रिकवरी मुश्किल। वर्तमान में, अधिकारी की हालत स्थिर है, लेकिन दृष्टि बहाली की उम्मीद कम है। पुलिस ने अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की, लेकिन शादी के आयोजकों और सप्लायरों की जांच शुरू हो गई है। बिहार सरकार ने अवैध शराब पर सख्ती बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और बेरोजगारी अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रही है। आर्टिकल-14 की रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी और बेरोजगारी ने Bihar को ‘बूटलेगर्स’ का केंद्र बना दिया है, जहां सबसे गरीब तबका सबसे ज्यादा शिकार हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी की नीति को फिर से सोचना होगा। अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया कि दिसंबर 2022 के हादसे में 31 मौतें हुईं, और कई लोग अस्पताल में भर्ती थे। न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी 2019 में चेतावनी दी थी कि अवैध शराब में मिथेनॉल मिलाने से अंधापन और मौत आम हो गई है। बिहार में प्रति वर्ष 100 से अधिक मौतें हो रही हैं, फिर भी नीति में बदलाव नहीं। डॉ. चावला ने सलाह दी कि शराब लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खरीदें, और मिलावटी शराब के लक्षण—उल्टी, सिरदर्द, दृष्टि हानि—पर तुरंत मेडिकल मदद लें।
यह घटना पूरे देश को आईना दिखाती है। विकिपीडिया के अनुसार, बिहार गुजरात, मिजोरम और नागालैंड के साथ शराब निषेध वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन यहां अवैध कारोबार सबसे विकराल है। सोशल मीडिया पर इंस्टाग्राम रील्स में भी चेतावनी दी जा रही है कि मिथेनॉल की छोटी मात्रा भी घातक है। सरकार को न केवल सख्त कानून लागू करने, बल्कि जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। अन्यथा, ऐसे जश्न मौत के न्योते बनते रहेंगे। युवा अधिकारी का परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है—क्या यह हादसा व्यर्थ जाएगा, या बिहार की शराबबंदी पर सवाल उठेगा? समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि जहर की यह बोतलें राज्य की खुशहाली को निगल रही हैं।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स