25 दिसंबर, 2025, Kuldeep Singh Sengar: 2017 के कुख्यात उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता ने पूर्व बीजेपी विधायक Kuldeep Singh Sengar की जमानत रद्द करने की जोरदार अपील की है। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता और उनकी मां ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की, जहां उन्होंने न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता ने कहा कि यह फैसला उनके लिए “मौत की सजा” जैसा है और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने की इच्छा जताई। सीबीआई ने जमानत का विरोध करने का ऐलान किया है, जबकि विपक्ष ने इसे “न्यायिक हत्या” करार दिया। पूर्व जम्मू-कश्मीर सीएम मेहबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने निंदा की। पीड़िता सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं, जो इस मामले को फिर से राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना रहा है।
यह घटना 2017 के उस दर्दनाक अध्याय को फिर से जीवंत कर रही है, जब 17 वर्षीय एक लड़की ने Sengar पर बलात्कार का आरोप लगाया। सेंगर, जो उस समय बीजेपी के विधायक थे, ने कथित तौर पर पीड़िता को अपनी कार में बुलाया और रायबरेली के एक सुनसान स्थान पर दुराचार किया। पीड़िता के परिवार ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन Sengar के प्रभाव से पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद परिवार पर हमले हुए—पीड़िता के पिता को Sengar के समर्थकों ने पीटा, जिससे उनकी मौत हो गई। 2019 में सड़क हादसे में पीड़िता के वकील, चाचा और मौसी की मौत हो गई, जिसे साजिश माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित किया और CBI को जांच सौंपी। 2020 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने Sengar को बलात्कार और पीड़िता के पिता की हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई। सेंगर को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था।
मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने Sengar की अपील पर सुनवाई करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी और जमानत मंजूर कर ली, जब तक अपील का फैसला न हो। कोर्ट ने कहा कि Sengar ने जेल में सात वर्ष से अधिक समय बिता चुके हैं और स्वास्थ्य कारणों से जमानत दी जा रही है। लेकिन यह फैसला पीड़िता के लिए सदमा साबित हुआ। बुधवार को उन्होंने मंडी हाउस के पास धरना दिया, जहां पुलिस ने उनकी मां को कथित तौर पर धक्का दिया। इसके बाद राहुल गांधी के आवास पर पहुंचीं। राहुल ने उन्हें आश्वासन दिया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। पीड़िता ने कहा, “मैं आत्महत्या करना चाहती थी, लेकिन अब न्याय के लिए लड़ूंगी। Sengar की जमानत रद्द होनी चाहिए।” उन्होंने राहुल से कानूनी सहायता और कांग्रेस शासित राज्य में स्थानांतरण की मांग की। राहुल ने इसे “मृत अर्थव्यवस्था से आगे मृत समाज” का प्रतीक बताया और बीजेपी पर न्याय व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।
मुलाकात के दौरान पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई के जांच अधिकारी (आईओ) से समझौता हो गया है, जो Sengar के पक्ष में काम कर रहे हैं। “मुझे लगता है कि न्याय मेरे खिलाफ हो रहा है। पीएम से मिलना चाहती हूं, ताकि वे समझें कि यह फैसला कितना दर्दनाक है,” उन्होंने कहा। राहुल गांधी ने कहा, “यह न केवल मृत अर्थव्यवस्था, बल्कि मृत समाज का संकेत है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्याय मिलना चाहिए।” पूर्व जम्मू-कश्मीर सीएम मेहबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा, “यह फैसला पीड़ितों के लिए झटका है। Sengar जैसे अपराधियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।” अन्य विपक्षी दलों ने भी हंगामा किया। दिल्ली में प्रदर्शन हुए, जहां “न्याय दो, सेंगर को जेल भेजो” के नारे लगे।
CBI ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। एजेंसी ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी और जमानत का विरोध करेगी। “हम कोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर चुके हैं और अपील करेंगे,” एक अधिकारी ने कहा। सेंगर के वकील ने स्वास्थ्य आधार पर जमानत का बचाव किया, लेकिन पीड़िता के वकील ने इसे “अन्यायपूर्ण” बताया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है, जहां हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 4% वृद्धि हुई, और जमानत जैसे फैसले पीड़ितों का विश्वास कम करते हैं।
यह विवाद राजनीतिक रंग भी ले चुका है। बीजेपी ने सेंगर को 2019 में ही निष्कासित कर दिया था, लेकिन विपक्ष इसे “दोहरी नैतिकता” बता रहा है। राहुल गांधी ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाने का संकेत दिया। पीड़िता का परिवार अब दिल्ली में ही रह रहा है, लेकिन वे सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। 2020 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद परिवार को सीआरपीएफ सुरक्षा दी गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाने की बात हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने #JusticeForUnnao कैंपेन शुरू किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इस मामले ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्याय की प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सजा निलंबन के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है, जिससे पीड़ित असुरक्षित महसूस करते हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर चिंता जताई और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। पीड़िता की अपील न केवल व्यक्तिगत न्याय की मांग है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक परीक्षा है।
निष्कर्षतः उन्नाव पीड़िता की यह लड़ाई न्याय व्यवस्था की मजबूती का इम्तिहान है। क्रिसमस के इस पावन अवसर पर, जब शांति और करुणा का संदेश गूंज रहा है, यह घटना समाज को आईना दिखाती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही तय करेगा कि क्या अपराधियों को सजा का डर बना रहेगा। पीड़िता की हिम्मत प्रेरणा है, और उम्मीद है कि न्याय जल्द मिलेगा, ताकि ऐसी घटनाएं इतिहास बन जाएं।