24 दिसंबर 2025, Sensex: 24 दिसंबर को भारतीय शेयर बाजार ने वर्ष के अंतिम कार्य दिवस पर हल्की गिरावट के साथ सत्र समाप्त किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक Sensex 116.14 अंकों की गिरावट के साथ 85,408.70 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 35.05 अंकों की कमी के साथ 26,142.10 पर सेटल हुआ। यह गिरावट कुल 0.14% और 0.13% की रही, जो क्रिसमस की छुट्टी से पहले की पतली ट्रेडिंग वॉल्यूम को दर्शाती है। आईटी, ऑयल एंड गैस तथा फार्मा सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.51% और निफ्टी फार्मा 0.51% नीचे बंद हुए। यह रिपोर्ट बाजार के इस सत्र की गहराई से पड़ताल करती है, जिसमें वैश्विक संकेत, एफआईआई बिकवाली और सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियों पर फोकस है। निवेशकों के लिए यह एक चेतावनी का संकेत है, क्योंकि 2025 का समापन स्थिरता के बजाय अनिश्चितता के साथ हो रहा है।
बाजार का बैकग्राउंड: वर्ष 2025 की यात्रा 2025 में भारतीय शेयर बाजार ने मिश्रित प्रदर्शन किया। जनवरी से सितंबर तक Sensex ने 12% की मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो मजबूत जीडीपी ग्रोथ (7.2%) और विदेशी निवेशों से प्रेरित थी। हालांकि, अक्टूबर से वैश्विक कारकों जैसे अमेरिकी फेड रिजर्व की टाइट मॉनेटरी पॉलिसी, मजबूत डॉलर और जियो-पॉलिटिकल टेंशन्स ने बाजार को दबाया। सेंसेक्स ने वर्ष की शुरुआत 76,000 के आसपास से की थी और नवंबर तक 86,000 के रिकॉर्ड हाई को छुआ, लेकिन दिसंबर में प्रॉफिट बुकिंग और एफआईआई आउटफ्लो ने इसे 85,000 के दायरे में ला खड़ा किया। आज के सत्र में Sensex ने दिन की शुरुआत 85,533 से की और दोपहर तक 85,738.18 के हाई को छुआ, लेकिन अंतिम घंटे में भारी बिकवाली से 116 अंकों की गिरावट आई। निफ्टी भी 26,177 के हाई से 26,142 पर सेटल हुआ। कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम 15% कम रहा, जो छुट्टी मूड और वर्षांत समीक्षा को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। कल, 25 दिसंबर को क्रिसमस के कारण बाजार बंद रहेगा, जिससे अगला सत्र 26 दिसंबर को खुलेगा।
गिरावट का विवरण: प्रमुख सूचकांकों पर नजर आज के सत्र में Sensex के 30 शेयरों में से 18 लाल निशान में बंद हुए। प्रमुख वजनदारों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और आईसीआईसीआई बैंक ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया, जहां आरआईएल 1.2% और आईसीआईसीआई बैंक 0.8% नीचे आया। निफ्टी के 50 शेयरों में 28 गिरावट के साथ समाप्त हुए। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप इंडेक्स 0.2% और स्मॉलकैप 0.1% नीचे रहे। एफएंडओ सेगमेंट में वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) 12.5 पर स्थिर रहा, जो बाजार की सतर्कता को दर्शाता है। रुपये की कीमत 83.45 प्रति डॉलर पर 0.15% कमजोर हुई, जो आयात-निर्भर सेक्टरों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। कुल बाजार पूंजीकरण में 1.2 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जो वर्षांत की सतर्कता का परिणाम है।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण: बहुआयामी दबाव यह गिरावट संयोग नहीं, बल्कि कई कारकों का मिश्रण है। पहला, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली—इस महीने अब तक 45,000 करोड़ रुपये की बिक्री हुई, जो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स (4.5%) और मजबूत डॉलर से प्रेरित है। दूसरा, प्रॉफिट बुकिंग: Sensex के 10% की वार्षिक वृद्धि के बाद निवेशक नकदीकरण कर रहे हैं, खासकर भारी वजनदारों में। तीसरा, वैश्विक संकेत कमजोर: अमेरिकी बाजार (डाउ 0.1% नीचे) और एशियाई सूचकांक (निक्केई 0.3% गिरा) ने नकारात्मक मूड सेट किया। इसके अलावा, टाइट मॉनेटरी पॉलिसी और उच्च जोखिम प्रीमियम ने उभरते बाजारों को प्रभावित किया। घरेलू मोर्चे पर, आरबीआई की लिक्विडिटी इंजेक्शन की उम्मीदें कमजोर पड़ीं, जबकि तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव (ब्रेंट 72 डॉलर) ने ऑयल एंड गैस को नुकसान पहुंचाया। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह ‘सांता क्लॉज रैली’ की बजाय ‘विंटर ब्लूज’ है, जो 2026 की शुरुआत में सुधार की गुंजाइश छोड़ती है।
सेक्टर प्रदर्शन: आईटी, ऑयल एंड गैस, फार्मा पर सबसे ज्यादा मार सेक्टर-आधारित विश्लेषण से साफ है कि चुनिंदा क्षेत्रों ने बाजार को नीचे खींचा। आईटी सेक्टर 0.51% गिरा, जहां विप्रो 2.1% और टेक महिंद्रा 1.8% नीचे आए—अमेरिकी लेऑफ्स और कमजोर क्वार्टरली गाइडेंस इसका कारण। ऑयल एंड गैस 0.81% की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद, जिसमें ओएनजीसी और रिलायंस जैसे स्टॉक्स 1-1.5% लुढ़के; वैश्विक तेल मंदी और रुपये की कमजोरी ने मार लगाई। फार्मा सेक्टर भी 0.51% नीचे रहा, जहां सन फार्मा 1.5% और डॉ. रेड्डीज 2% गिरे—एफडीए जांचों और निर्यात दबाव से। इसके विपरीत, मेटल्स 0.51% ऊपर बंद, हिंदुस्तान कॉपर 3.2% और हिंदुस्तान जिंक 2.8% चमके। बैंकिंग 0.20% नीचे, लेकिन बजाज फाइनेंस 1.2% ऊपर। ऑटो 0.02% स्थिर, जबकि एफएमसीजी 0.42% नीचे। कुल मिलाकर, 31 सेक्टरों में से 19 गिरावट के साथ समाप्त हुए, जो बाजार की असमानता को उजागर करता है।
टॉप गेनर्स और लूजर्स: स्टॉक-स्तरीय अंतर्दृष्टि निफ्टी में टॉप गेनर्स में ट्रेंट 2.5%, Sriram Finance 2.1%, अपोलो हॉस्पिटल्स 1.8%, उल्ट्राटेक सीमेंट 1.5% और अदानी पोर्ट्स 1.2% शामिल रहे, जो रिटेल और हेल्थकेयर की मजबूती दिखाते हैं। कोल इंडिया 1.4% और बजाज फाइनेंस 1.2% भी चमके। दूसरी ओर, लूजर्स में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) 2.3%, अदानी एंटरप्राइजेज 1.9%, डॉ. रेड्डीज 2.0%, विप्रो 2.1% और सन फार्मा 1.5% प्रमुख रहे। Sensex में टाटा स्टील 1.6% और एशियन पेंट्स 1.4% नीचे आए। ये आंदोलन सेक्टर ट्रेंड्स को प्रतिबिंबित करते हैं, जहां डिफेंसिव स्टॉक्स ने कुछ राहत दी।
बाजार पर प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं यह गिरावट छोटी लग सकती है, लेकिन वर्षांत के लिहाज से यह निवेशकों की सतर्कता बढ़ाती है। एफआईआई आउटफ्लो से रुपये पर दबाव बढ़ा, जो आयात बिल को महंगा करेगा। हालांकि, डीआईआई ने 25,000 करोड़ की खरीदारी से बाजार को संभाला। 2026 के लिए, एनालिस्ट्स 88,000 के Sensex टारगेट देख रहे हैं, बशर्ते फेड रेट कट्स और घरेलू सुधार। लेकिन ट्रेड वॉर्स और इन्फ्लेशन जोखिम बने रहेंगे। रिटेल निवेशकों को सलाह: डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर फोकस करें।
निष्कर्ष 24 दिसंबर 2025 का बाजार सत्र वर्षांत की शांति का प्रतीक था, लेकिन आईटी, ऑयल एंड गैस तथा फार्मा की कमजोरी ने चिंता पैदा की। 116 अंकों की गिरावट भले मामूली हो, लेकिन यह वैश्विक अनिश्चितताओं का आईना है। निवेशक क्रिसमस के बाद के सत्र में रिकवरी की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन जोखिम प्रबंधन जरूरी। बाजार की यह सांस थामने वाली रणनीति 2026 की मजबूत शुरुआत का आधार बनेगी।
Sources: इकनोमिक टाइम्स