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23 दिसंबर 2025, Araria: बिहार के Araria जिले में भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया की ईमानदारी पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिले के रजिस्ट्री कार्यालयों में बड़े पैमाने पर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है, जिसमें मूल पंजीकृत बिक्री दस्तावेजों (जिल्ड रिकॉर्ड) को नष्ट कर नकली पृष्ठों से बदल दिया गया। इस घोटाले के लिए 10 लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है, जिसमें आउटसोर्स्ड कर्मचारी और रजिस्ट्री कार्यालय के स्टाफ शामिल हैं। यह धांधली अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच की बताई जा रही है, जिससे सैकड़ों भूमि मालिकों की संपत्ति पर खतरा मंडरा रहा है। जिला उप-पंजीयक कौशल किशोर झा के आदेश पर हुई जांच में यह पुष्टि हुई कि बिना आधिकारिक सहयोग के ऐसी हेराफेरी संभव नहीं। यह मामला न केवल Araria, बल्कि पूरे बिहार की भूमि प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है, जहां डिजिटल सुधारों के बावजूद भौतिक दस्तावेजों का दुरुपयोग जारी है।

पृष्ठभूमि: पुरानी समस्या, नया रूप

Araria जिले में भूमि रजिस्ट्री से जुड़े घोटाले कोई नई बात नहीं। 1914-1922 के बीच नकली दस्तावेजों के मामले सामने आए थे, और पूर्व एसपी शिवदीप लांडे के कार्यकाल में एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ था, जिसके किंगपिन ने कबूल किया कि जिले में 10,000 से अधिक नकली बिक्री दस्तावेज तैयार किए गए थे। वर्तमान मामला जिल्ड नंबर 65 से जुड़ा है, जो मूल पंजीकृत बिक्री दस्तावेजों का बंधित संकलन होता है। यहां 1960 के एक पंजीकृत बिक्री दस्तावेज (नंबर 10272) के पृष्ठ 344, 345 और 346 को फाड़कर नकली पृष्ठों से बदल दिया गया। इन नकली पृष्ठों में खरीदार का नाम बदल दिया गया, जिससे जामाबंदी (भूमि राजस्व) रजिस्टर से असली मालिक का नाम हट गया। स्टांप ड्यूटी चुकाने के बावजूद, प्रमाणित प्रतियां जारी कर दी गईं, जिससे असली खरीदारों को लंबी कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है। यह घोटाला रजिस्ट्री कार्यालय की आंतरिक साजिश का नतीजा लगता है, जहां आउटसोर्स्ड स्टाफ की भूमिका संदिग्ध है।

धांधली का खुलासा: एक शिकायत ने खोला पिटारा

यह मामला जोकीहाट निवासी मोहम्मद निशाद की शिकायत से सामने आया। निशाद ने अपनी पंजीकृत बिक्री दस्तावेज में विसंगतियां पाईं, जिसकी जांच जिला उप-पंजीयक कौशल किशोर झा ने रिकॉर्ड कीपर मोहम्मद साफी अनवर से कराई। अनवर की जांच में पुष्टि हुई कि मूल पृष्ठ नष्ट कर नकली डाली गई हैं। यह पांचवां ऐसा मामला है—इससे पहले चार एफआईआर अलग-अलग थानों में दर्ज हो चुकी हैं। नौ महीने पहले भी अनवर की जांच पर रानीगंज, फारबिसगंज और अररिया थानों में तीन एफआईआर हुई थीं, जिसमें पांच लोग आरोपी बनाए गए थे। जांच में सामने आया कि हेराफेरी के लिए रजिस्ट्री कार्यालय में पहुंच जरूरी थी, जहां मूल जिल्ड को निकालकर नकली सामग्री डाली गई। प्रमाणित प्रतियां जारी करने वाले मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।

हेराफेरी की कार्यप्रणाली: व्यवस्थित साजिश

धांधली का तरीका बेहद चालाकी भरा था। आरोपी मूल जिल्ड से पृष्ठ फाड़कर नकली पृष्ठ चिपका देते थे, जिसमें खरीदार का नाम बदल दिया जाता। फिर फीस चुकाने पर प्रमाणित प्रतियां जारी की जातीं, जो जामाबंदी रजिस्टर में नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होतीं। अगस्त-अक्टूबर 2025 के दौरान यह सिलसिला चला, जब रजिस्ट्री कार्यालय में आउटसोर्स्ड एजेंसी के कर्मचारी सक्रिय थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि बिना स्टाफ के सहयोग के मूल रिकॉर्ड हटाना और नकली डालना असंभव है। आउटसोर्स्ड स्टाफ ने दस्तावेजों की लोकेशन और जारी करने की प्रक्रिया का फायदा उठाया। इससे न केवल फर्जी लाभार्थी बने, बल्कि असली मालिकों की संपत्ति पर कब्जे की कोशिश हुई। पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष विनय ठाकुर ने कहा, “Araria के रजिस्ट्री कार्यालयों में सब ठीक नहीं। पूर्व एसपी शिवदीप लांडे के समय एक गिरोह पकड़ा गया था, जिसने 10,000 नकली दस्तावेज बनाए थे।”

आरोपी: आउटसोर्स्ड स्टाफ और आंतरिक साजिश

एफआईआर में 10 नामजद आरोपी हैं, जिनमें आउटसोर्स्ड एजेंसी के रोहित रंजन और मोहम्मद शाहनवाल प्रमुख हैं। इसके अलावा दो एमटीएस स्टाफ, जो मूल जिल्ड निकालने और प्रतियां जारी करने के जिम्मेदार थे, भी आरोपी हैं। शेष आठ फर्जी लाभार्थी और सहयोगी हैं, जिनके नाम जांच में सामने आए। रिकॉर्ड कीपर मोहम्मद साफी अनवर की शिकायत पर टाउन थाने में एफआईआर दर्ज हुई। आईपीसी की धाराओं के तहत फ्रॉड, फॉर्जरी, झूठी गवाही और आधिकारिक दस्तावेज बदलने के आरोप लगे हैं। Araria एसडीपीओ सुशील कुमार और टाउन थाने के एसएचओ ने कार्यालय का दौरा कर पुष्टि की कि “बिना आधिकारिक स्टाफ की मदद के मूल रिकॉर्ड हटाना संभव नहीं।” जिला उप-पंजीयक कौशल किशोर झा ने बताया, “इससे पहले चार एफआईआर अलग-अलग थानों में हो चुकी हैं। कार्यालय कर्मियों के बिना फ्रॉड, फॉर्जरी और दस्तावेज बदलना असंभव है।”

प्रशासन की कार्रवाई: जांच और सख्ती का वादा

जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर आरोपी तलाशी में लगे हैं। एसडीपीओ सुशील कुमार ने कहा कि आंतरिक स्टाफ की संलिप्तता की गहन जांच होगी। जिला प्रशासन ने रजिस्ट्री कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जैसे डिजिटल लॉगिंग और सीसीटीवी। पूर्व मामलों में गिरोहों का पर्दाफाश हुआ था, लेकिन आउटसोर्स्ड सिस्टम की कमजोरी बनी हुई है। सरकार की राजस्व महा अभियान (अगस्त-सितंबर 2025) के दौरान भी रिकॉर्ड सुधार का दावा था, लेकिन यह घोटाला विफलता दर्शाता है।

भूमि मालिकों पर असर: डर और अनिश्चितता

इस घोटाले से Araria के सैकड़ों भूमि मालिकों में दहशत फैल गई है। पंजीकरण और स्टांप ड्यूटी चुकाने के बावजूद, नाम जामाबंदी से हट जाना मतलब लंबी अदालती जंग। मोहम्मद निशाद जैसे खरीदारों को संपत्ति खोने का खतरा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद बढ़ सकते हैं, जो सामाजिक तनाव पैदा करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिहार की भूमि प्रणाली की जड़ें हिला रहा है, जहां 1960 जैसे पुराने दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं।

व्यापक प्रभाव: बिहार की भूमि प्रणाली पर सवाल

यह मामला बिहार की भूमि रजिस्ट्री व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। भौतिक जिल्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की जरूरत है। आउटसोर्स्ड स्टाफ की निगरानी बढ़ानी होगी, क्योंकि उनकी पहुंच दुरुपयोग का कारण बनी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिहार के म्यूटेशन नियमों पर सवाल उठाए थे, जो इस संदर्भ में प्रासंगिक हैं। यदि समय रहते सुधार न हुए, तो भूमि लेन-देन पर भरोसा कम होगा। अररिया प्रशासन ने वादा किया है कि दोषियों को सजा दिलाई जाएगी, लेकिन मालिकों को तत्काल राहत की जरूरत है। यह घोटाला एक सबक है—नवाचार के बिना पुरानी प्रणाली घातक साबित हो सकती है।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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