Israel Al JazeeraIsrael Al Jazeera

23 दिसंबर 2025, Israel Al-Jazeera– Israel की संसद कनेसेट ने सोमवार को एक विवादास्पद विधेयक को दो वर्षों के लिए बढ़ाने का फैसला किया है, जिसके तहत विदेशी मीडिया आउटलेट्स को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बंद करने की अनुमति मिलती है। यह कदम विशेष रूप से कतर स्थित अल जज़ीरा नेटवर्क को निशाना बनाता है, जिसके इज़राइली संचालन मई 2024 से बंद पड़े हैं। नए संशोधन के अनुसार, यह कानून अब 2027 तक लागू रहेगा, और इसमें न्यायिक निगरानी की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इससे सरकार को आपातकाल की स्थिति के बिना भी मीडिया पर मनमानी कार्रवाई करने की शक्तियां मिल गई हैं।

कनेसेट में दूसरे और तीसरे चरण के मतदान में 22 सांसदों ने पक्ष में वोट दिया, जबकि 10 ने विरोध किया, जिनमें अधिकांश फिलिस्तीनी मूल के सदस्य थे। संचार मंत्री श्लोमो कारही को अब अल जज़ीरा के बंदी को 2027 के अंत तक बढ़ाने का अधिकार मिल गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सुरक्षा एजेंसियों से परामर्श के बाद प्रसारण प्रतिबंध लगाने की स्वतंत्रता दी गई है। रक्षा मंत्री को उपग्रह प्रसारण रोकने के लिए तकनीकी उपाय करने का निर्देश दिया गया, जो कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भी प्रभावी होगा। यह फैसला गाजा युद्ध के दौरान इज़राइल की मीडिया नीतियों को और सख्त करने का संकेत देता है, जहां प्रेस स्वतंत्रता पहले से ही खतरे में है।

इस कानून की जड़ें अप्रैल 2024 में हैं, जब इज़राइल ने “अल जज़ीरा कानून” नामक आपातकालीन विधेयक पारित किया था। यह गाजा पर Israel के सैन्य अभियान के बीच लाया गया, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था। मई 2024 में Al-Jazeera के इज़राइली कार्यालयों को बंद कर दिया गया, उपकरण जब्त कर लिए गए, और वेबसाइट तथा टीवी चैनल को ब्लॉक कर दिया गया। नेतन्याहू ने अप्रैल 2024 में एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि अल जज़ीरा इज़राइल की सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहा है, हमास के प्रचार का माध्यम बन रहा है, और इज़राइली सैनिकों के खिलाफ उकसावा दे रहा है। उन्होंने इसे तत्काल बंद करने का वादा किया था।

इज़राइली अधिकारियों का तर्क है कि Al-Jazeera जैसे चैनल “शत्रुतापूर्ण” हैं और वे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हैं। चरम दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर ने कहा कि Al-Jazeera देखने वालों की पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए। लेकिन आलोचक इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित सेंसरशिप मानते हैं, जो गाजा युद्ध की कवरेज को दबाने का प्रयास है। अल जज़ीरा, अरब दुनिया का प्रमुख न्यूज नेटवर्क, इज़राइल की कार्रवाइयों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है, जिसे इज़राइली सरकार “प्रोपगैंडा” कहती है।

Al-Jazeera ने इस विस्तार की कड़ी निंदा की है। नेटवर्क ने इसे “मानहानिकारक आरोपों” और “राजनीतिक सेंसरशिप” का उदाहरण बताया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का उल्लंघन है। हम नेतन्याहू सरकार को अपने पत्रकारों और कार्यालयों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं, और कानूनी कदम उठाने का अधिकार रखते हैं।” अल जज़ीरा ने प्रतिबद्धता जताई कि वह इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष की “साहसी कवरेज” जारी रखेगा। इतिहास में, अल जज़ीरा को पहले भी निशाना बनाया गया—2017 में नेतन्याहू ने इसके जेरूसलम ब्यूरो को बंद करने की धमकी दी थी, और 2021 में इज़राइली हवाई हमले में गाजा में इसका कार्यालय नष्ट हो गया था।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने इसे “प्रेस स्वतंत्रता पर सीधा हमला” करार दिया। सीपीजे के अनुसार, अक्टूबर 2023 से गाजा में इज़राइली हमलों में 10 Al-Jazeera पत्रकार और 9 फ्रीलांसर मारे गए हैं, जबकि कुल 200 से अधिक फिलिस्तीनी पत्रकार शहीद हो चुके हैं। मई 2022 में इज़राइली सैनिकों द्वारा पत्रकार शिरीन अबू अक्लेह की हत्या का मामला अनसुलझा है, जहां Israel ने पहले इनकार किया लेकिन बाद में स्वीकारा कि उसके सैनिक की गोलीबारी की “उच्च संभावना” थी।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने चिंता जताई कि न्यायिक निगरानी हटाने से विदेशी मीडिया पर मनमानी कार्रवाई बढ़ेगी। आरएसएफ की 2025 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में Israel 112वें स्थान पर है, और यह तीसरा लगातार वर्ष है जब गाजा पत्रकारों के लिए सबसे घातक क्षेत्र बना हुआ है। इस कानून का उपयोग अन्य आउटलेट्स पर भी हो चुका है—मई 2024 में एसोसिएटेड प्रेस के उपकरण जब्त कर लिए गए और लाइव फीड बंद कर दिया गया, हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद इसे उलट दिया गया।

यह विस्तार Israel में व्यापक सेंसरशिप का हिस्सा है। गाजा युद्ध के दौरान, इज़राइली सेना ने पत्रकारों के गाजा प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है, और विदेशी रिपोर्टरों को “सुरक्षा चिंताओं” का हवाला देकर रोका जा रहा है। फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (एफपीए) ने जून 2025 से गाजा पहुंच की मांग की है, लेकिन Israel ने इनकार कर दिया। आलोचकों का कहना है कि यह न केवल अल जज़ीरा को चुप कराने का प्रयास है, बल्कि फिलिस्तीनी दृष्टिकोण को वैश्विक मंच से हटाने की साजिश है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टर फ्रांसिस्का अल्बनेज़ ने कहा, “मीडिया पर हमले लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।”

विश्लेषण की दृष्टि से, यह फैसला Israel की आंतरिक राजनीति को उजागर करता है। नेतन्याहू सरकार, जो भ्रष्टाचार के आरोपों और युद्ध की आलोचना से जूझ रही है, मीडिया को “आंतरिक दुश्मन” के रूप में देख रही है। लेकिन इससे Israel की वैश्विक छवि पर बुरा असर पड़ सकता है। अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी पहले ही चिंता जता चुके हैं, और यह कानून अंतरराष्ट्रीय अदालतों में चुनौती का सामना कर सकता है। अल जज़ीरा ने यूरोपीय मानवाधिकार अदालत में अपील की तैयारी की है।

अंत में, यह विस्तार प्रेस स्वतंत्रता के लिए खतरे की घंटी है। डिजिटल युग में सूचना की स्वतंत्रता की लड़ाई में Israel जैसे लोकतांत्रिक देश का यह कदम चिंताजनक है। फिलिस्तीन संघर्ष की सच्चाई सामने लाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा वैश्विक जिम्मेदारी है। क्या यह कानून स्थायी सेंसरशिप का रास्ता बनेगा? समय बताएगा, लेकिन सत्य की आवाज दबाने की कोशिशें जारी हैं।

Sources: अल जज़ीरा, न्यू अरब

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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