22 दिसंबर 2025, Madubani: बिहार के Madubani जिले में रविवार की देर रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सिहरा दिया। शहर के लहेरियागंज मुसहरी दलित टोला में एक नशेड़ी युवक ने चाकू लहराकर अंधाधुंध हमला बोल दिया। इस खौफनाक चाकूबाजी में दो निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में से एक की हालत नाजुक बनी हुई है, और डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताने से इनकार कर दिया है। यह घटना न केवल स्थानीय निवासियों के बीच दहशत पैदा कर रही है, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था की खस्ता हालत पर भी सवाल खड़े कर रही है। दलित बहुल इस टोले में हुई हिंसा ने सामाजिक तनाव को भी बढ़ावा दिया है, हालांकि पुलिस ने इसे नशे के नशे में की गई अंधी हिंसा करार दिया है।
घटना की शुरुआत रविवार रात करीब 11 बजे हुई, जब लहेरियागंज भवानीपुर मोहल्ले के दलित टोले में शांति का माहौल था। स्थानीय लोग रात्रि भोजन के बाद आराम कर रहे थे, तभी एक युवक, जो कथित तौर पर शराब के नशे में धुत था, अचानक चाकू लेकर टोले में घुस आया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बिना किसी भेदभाव के लोगों पर ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। जो लोग उसे रोकने या बचाने के लिए आगे आए, उन पर भी उसने चाकू चला दिया। आंखों देखा हाल बताने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “वह चिल्ला रहा था और बड़बड़ा रहा था। हमने सोचा कोई झगड़ा होगा, लेकिन वह अचानक चाकू निकालकर वार करने लगा। दो लोग जमीन पर गिर पड़े, और खून की होली खेलने लगी।” चीख-पुकार मचने पर पड़ोसी जुटे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान Madubani शहर के ही निवासी रामेश्वर पासवान (45 वर्ष) और उनके भतीजे संतोष पासवान (28 वर्ष) के रूप में हुई है। रामेश्वर टोले के एक गरीब मजदूर थे, जो दिनभर रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते थे। संतोष उनके साथ रहते थे और स्थानीय बाजार में छोटा-मोटा काम करते थे। दोनों को चाकू के कई गहरे घाव लगे, जिनमें से एक सीधे हृदय को चीर गया। घायलों में रामेश्वर का छोटा भाई रमेश पासवान (40 वर्ष) और एक पड़ोसी महिला सुनीता देवी (35 वर्ष) शामिल हैं। रमेश को पेट और छाती पर गंभीर चोटें आई हैं, जबकि सुनीता के हाथ और कंधे पर घाव हैं। दोनों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने रमेश की सर्जरी की है। सुनीता की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन रमेश के परिवार वाले चिंतित हैं। “भैया की जान बच जाए, बस यही दुआ है। वह हमारा इकलौता सहारा था,” रमेश की पत्नी ने आंसुओं के बीच कहा।
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल कार्रवाई की। नगर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी की पहचान चकदह गांव के निवासी अजय कुमार चौधरी (32 वर्ष) के रूप में हुई है। अजय स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे झगड़ों के लिए कुख्यात रहा है और नशे की लत का शिकार है। घटना के महज 12 घंटों के अंदर विशेष जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय सूचनाओं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से खून से सना चाकू बरामद कर लिया गया है। प्रभारी ने कहा, “आरोपी नशे में था और किसी पुराने लेन-देन के विवाद से प्रेरित होकर टोले में घुसा। पूछताछ में वह बड़बड़ा रहा है, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।” अजय के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें शराब पीकर मारपीट के मामले शामिल हैं। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और आगे की जांच जारी है।
यह घटना दलित टोले में हुई होने से सामाजिक संगठनों में आक्रोश फैल गया है। बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय नेता ने इसे “दलितों पर सुनियोजित हमला” करार देते हुए एसपी से तत्काल कार्रवाई की मांग की। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इसमें कोई जातिगत कोण नहीं है, बल्कि नशे की अंधी हिंसा है। टोले के निवासी डर के मारे घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “रात को दरवाजा बंद करके सोते हैं, लेकिन अब तो नींद ही नहीं आती। सरकार सोचती क्या है? ऐसे अपराधी घूमते रहें?” स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि पैसे से जिंदगी नहीं लौटेगी।
बिहार में ऐसी घटनाएं अब आम हो चली हैं। राज्य में नशे और हिंसा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ही Madubani जिले में चाकूबाजी के 150 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से 20 फीसदी नशे से जुड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में शराब की आसान उपलब्धता और बेरोजगारी युवाओं को हिंसक बना रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार शराबबंदी का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। विपक्षी दल आरजेडी और कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “नीतीश राज में बिहार जंगलराज बन गया है। दलितों की सुरक्षा कौन करेगा?” वहीं, बीजेपी ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन वादा किया कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
यह हादसा न केवल एक परिवार का दुख है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि ऐसे तांडव दोबारा न हों। Madubani के इस छोटे से टोले में आज शोक का माहौल है। रामेश्वर और संतोष का अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रशासन को अब न केवल आरोपी को सजा दिलानी है, बल्कि टोले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी करने हैं। अन्यथा, यह घटना बिहार की कानून-व्यवस्था पर एक काला धब्बा बनकर रह जाएगी।उम्मीद है कि न्याय मिलेगा और पीड़ित परिवारों को इंसाफ।