21 दिसंबर 2025, PM-JANMAN: बिहार सरकार ने आदिवासी समुदाय के बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) योजना के तहत राज्य के छह जिलों—कैमूर, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर और पूर्णिया—में 15 नए आधुनिक आवासीय छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। ये छात्रावास विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष की आयु के आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए होंगे, जो कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कर रहे हैं। इस पहल से न केवल ड्रॉपआउट दर कम होगी, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवास की सुविधा मिलेगी। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को स्थानीय वित्त समिति की मंजूरी के बाद कैबिनेट में रखा जाएगा, और निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होने की संभावना है। प्रत्येक छात्रावास की अनुमानित लागत 3 करोड़ रुपये है, जिसका कुल खर्च लगभग 45 करोड़ रुपये होगा। केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत धनराशि वहन करेगी।
यह योजना PM-JANMAN का हिस्सा है, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के समग्र विकास पर केंद्रित है। बिहार में आठ PVTGs हैं—असुर, बिरहोर, बिरजिया, हिल खरिया, मल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, महेंद्र पहाड़िया और सौरा—जिनमें से सात के लिए ये छात्रावास बनाए जाएंगे। इन समुदायों के अधिकांश सदस्य जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं, जहां स्कूलों की कमी और परिवहन की समस्या के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। छात्रावासों में आवास के अलावा भोजन, अध्ययन सामग्री, खेलकूद सुविधाएं और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी, ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा, “यह योजना आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बनेगी। हमारा लक्ष्य है कि PVTGs के 100 प्रतिशत बच्चे शिक्षा प्राप्त करें।” यह बयान विभागीय बैठक में दिया गया, जहां योजना की रूपरेखा पर चर्चा हुई।
बिहार में आदिवासी आबादी लगभग 1.5 प्रतिशत है, लेकिन इनकी शिक्षा दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। 2021 की जनगणना के अनुसार, PVTGs के बच्चों में साक्षरता दर मात्र 40 प्रतिशत के आसपास है। दूरस्थ इलाकों जैसे किशनगंज के थरूहट क्षेत्र या कटिहार के बरारी ब्लॉक में स्कूल जाने के लिए बच्चे घंटों पैदल चलते हैं, जिससे ड्रॉपआउट बढ़ता है। इन 15 छात्रावासों से लगभग 1,500 से अधिक छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा, प्रत्येक छात्रावास में 100 बेड की क्षमता होगी। जिला प्रशासन को भूमि उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है, और निर्माण में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे रोजगार सृजन भी होगा। कैमूर जिले के एसडीएम ने बताया, “हमारी योजना के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में छात्रावास बनेंगे, जहां पहुंच आसान होगी। यह न केवल शिक्षा, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण भी सुनिश्चित करेगा।”
PM-JANMAN योजना नवंबर 2023 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य PVTGs के 75 लाख परिवारों को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और आजीविका से जोड़ना है। राष्ट्रीय स्तर पर 500 छात्रावासों का लक्ष्य है, जिसमें बिहार को 15 आवंटित किए गए हैं। पिछले वर्ष योजना के तहत बिहार में 1,308 आदिवासी परिवारों को पक्के मकान दिए गए थे, जो इसकी सफलता का प्रमाण है। लेकिन चुनौतियां भी हैं—भूमि अधिग्रहण में देरी और गुणवत्ता सुनिश्चित करना। विशेषज्ञों का मानना है कि ये छात्रावास यदि समय पर बने तो बिहार के आदिवासी युवाओं में सिविल सर्विसेज और तकनीकी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। सामाजिक कार्यकर्ता रीता देवी ने कहा, “आदिवासी लड़कियों के लिए अलग वार्ड हों, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो। यह योजना लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देगी।”
इन जिलों में आदिवासी बहुल इलाके हैं। किशनगंज में बिरहोर और सौरिया पहाड़िया समुदाय प्रमुख हैं, जबकि कटिहार में असुर और बिरजिया रहते हैं। भागलपुर और पूर्णिया में पहाड़िया जनजातियां प्रभावित हैं। मधेपुरा और कैमूर में हिल खरिया का वास है। इन क्षेत्रों में मौजूदा छात्रावासों की कमी से बच्चे शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन नई सुविधाएं स्थानीय स्तर पर शिक्षा को मजबूत करेंगी। केंद्र सरकार ने योजना के लिए 15,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें शिक्षा पर विशेष जोर है। बिहार सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के साथ इसे जोड़ दिया है, ताकि छात्रावासों में डिजिटल क्लासरूम और कोचिंग सुविधाएं हों।
यह पहल आदिवासी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। ठंड की इस ऋतु में जब ग्रामीण इलाकों में बच्चे शिक्षा से वंचित रहते हैं, ऐसी योजनाएं आशा की किरण जगाती हैं। उम्मीद है कि मंजूरी जल्द मिलेगी और निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा होगा। आदिवासी समुदायों से जुड़े संगठनों ने स्वागत किया है और सुझाव दिया है कि स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई पर जोर हो। कुल मिलाकर, PM-JANMAN बिहार के आदिवासी बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का वादा करता है, जहां शिक्षा ही विकास का आधार बनेगी।