21 दिसंबर 2025 Hijab Controversy: बिहार की राजनीति और समाज को हिलाने वाला Hijab Controversy अब एक नई दिशा ले चुका है। आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन, जिन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सार्वजनिक मंच पर नकाब हटाने की घटना ने राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया, ने अपनी नौकरी ज्वाइन करने से इनकार कर दिया है। 20 दिसंबर को निर्धारित अंतिम तिथि पर भी वे पटना सदर के सबलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नहीं पहुंचीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि न ज्वाइन करने पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन सरकार ने ज्वाइनिंग की समय-सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। न तो डॉ. नुसरत ने ज्वाइनिंग स्वीकार की है और न ही स्पष्ट इनकार किया है। यह दुविधा पूरे मामले को एक रहस्यमयी मोड़ दे रही है, जहां व्यक्तिगत अपमान, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव आपस में उलझ गए हैं।
Hijab Controversy की जड़: मंच पर अपमान की घटना
यह सबकी तब शुरू हुआ जब 15 दिसंबर 2025 को पटना के एक भव्य कार्यक्रम में बिहार सरकार ने 1,283 आयुष डॉक्टरों (आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथी) को नियुक्ति पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, मंत्री विजय चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मौजूद थे। डॉ. नुसरत परवीन, जो यूनानी चिकित्सक हैं और पटना के सरकारी तिब्बी कॉलेज की छात्रा रही हैं, की बारी आई। चेहरे पर नकाब (हिजाब) लगाए हुए वे मंच पर पहुंचीं। नीतीश कुमार ने नियुक्ति पत्र सौंपा और तत्काल कहा, “ये क्या लगाए हो?” फिर उन्होंने नकाब खींच लिया। यह क्षणिक घटना मोबाइल कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
वीडियो में नीतीश कुमार का यह व्यवहार एक पिता की नसीहत जैसा लगता है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम महिला के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस ने नीतीश पर निशाना साधा, जबकि जेडीयू ने इसे ‘पारिवारिक स्नेह’ बताया। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी बचाव किया, कहते हुए, “क्या पिता-बेटी के बीच विवाद होता है? नीतीश छात्राओं को अपनी बेटियों की तरह मानते हैं।” लेकिन डॉ. नुसरत के लिए यह घटना भावनात्मक आघात साबित हुई। उनके भाई ने मीडिया से कहा, “बहन बहुत आहत हैं। हम उन्हें ज्वाइनिंग के लिए मना रहे हैं, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं।”
ज्वाइनिंग का ड्रामा: इंतजार और अनुपस्थिति
नियुक्ति के बाद डॉ. नुसरत को पटना सदर पीएचसी में पोस्टिंग मिली। ज्वाइनिंग प्रक्रिया सरल थी: सिविल सर्जन कार्यालय से मेडिकल जांच और पत्र लेना, फिर पीएचसी पर रिपोर्ट करना। 19 दिसंबर को उनके करीबी दोस्तों ने कहा कि वे 20 दिसंबर को ज्वाइन करेंगी। पटना सिविल सर्जन अविनाश कुमार सिंह ने बताया, “सुबह 2 बजे तक इंतजार किया, शाम 6 बजे तक संभव था। लेकिन वे नहीं आईं।” पीएचसी के डॉ. विजय कुमार ने पुष्टि की, “पांच अन्य डॉक्टर ज्वाइन कर चुके थे, लेकिन नुसरत का लेटर ही नहीं पहुंचा।” दिनभर स्वास्थ्य अधिकारियों का इंतजार चला, लेकिन डॉ. नुसरत का कोई पता नहीं। न कोई फोन आया, न कोई सूचना। यह अनुपस्थिति न केवल विभाग को हैरान करने वाली थी, बल्कि पूरे विवाद को नया आयाम दे रही थी।
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, ज्वाइनिंग न करने पर उम्मीदवार को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, जिससे भविष्य में सरकारी नौकरियों का रास्ता बंद हो जाता है। लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय ने 20 दिसंबर को ही पत्र जारी कर सभी आयुष डॉक्टरों की ज्वाइनिंग 31 दिसंबर तक बढ़ा दी। यह फैसला मुख्य रूप से डॉ. नुसरत के लिए ही लगता है। सिविल सर्जन सिंह ने कहा, “अब निर्भर है कि वे ज्वाइन करती हैं या नहीं। विभाग दोबारा मौका दे सकता है।”
परिवार की दुविधा: न इकरार, न इनकार
डॉ. नुसरत की चुप्पी मामले को और पेचीदा बना रही है। उनके पति ने हाल ही में मीडिया से कहा, “हम नाराज नहीं हैं, लेकिन मीडिया कवरेज से बचना चाहते हैं। नुसरत इस पर पुनर्विचार कर रही हैं।” तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. मोहम्मद महफूजुर रहमान ने बताया, “नुसरत ने अपनी दोस्त बिलकिस से कहा कि मामला बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। वे पिछले चार दिनों से कॉलेज नहीं आईं।” परिवार दो रास्तों पर सोच रहा है: या तो विवाद भूलकर नौकरी ज्वाइन करें, या उच्च शिक्षा का बहाना बनाकर इस्तीफा दें। भाई ने जोड़ा, “परिवार मीडिया से दूर रहना चाहता है, लेकिन अपमान की टीस बनी हुई है।”
राजनीतिक तूफान और झारखंड का ऑफर
Hijab Controversy ने राजनीतिक रंग ले लिया। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत को 3 लाख रुपये मासिक वेतन, मनचाही पोस्टिंग, सरकारी आवास और सुरक्षा का ऑफर दिया। उन्होंने कहा, “बिहार में अमानवीय घटना हुई, जो संविधान का अपमान है। झारखंड में महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि है।” जेएमएम ने इसे सरकार का फैसला बताया, लेकिन जेडीयू ने झूठा करार दिया। पूर्व बीजेपी मंत्री सी.पी. सिंह ने विवादास्पद दावा किया कि डॉ. नुसरत का कनेक्शन दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट से हो सकता है, जो सोशल मीडिया पर बहस छेड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर #NusratParveen और #HijabVivad ट्रेंड कर रहा है। एक पोस्ट में कहा गया, “नीतीश से माफी मांगें, अन्यथा झारखंड चली जाएं।” न्यूज24 की पोस्ट ने ज्वाइनिंग सस्पेंस पर 342 लाइक्स पाए।
सामाजिक प्रभाव: सम्मान बनाम स्वतंत्रता
यह मामला केवल नौकरी का नहीं, बल्कि महिलाओं की धार्मिक पसंद और कार्यस्थल पर सम्मान का है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिजाब जैसे व्यक्तिगत मुद्दे सरकारी कार्यक्रमों में क्यों घुसपैठ करते हैं? बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय इसे असहिष्णुता का प्रतीक बता रहा है, जबकि समर्थक इसे ‘आधुनिकीकरण’ कह रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह कर्नाटक हिजाब विवाद की याद दिला रहा है।
निष्कर्ष: 31 दिसंबर का इंतजार
डॉ. नुसरत का फैसला अब पूरे बिहार की नजरों पर है। क्या वे अपमान भूलकर ज्वाइन करेंगी, या झारखंड का ऑफर स्वीकार करेंगी? ब्लैकलिस्ट का खतरा तो बना हुआ है, लेकिन सरकार का एक्सटेंशन एक राहत है। यह विवाद नीतीश सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल, न इकरार न इनकार की यह स्थिति एक नया ट्विस्ट दे रही है। आने वाले दिनों में क्या मोड़ आएगा, यह समय बताएगा।