21 दिसंबर 2025, Ukraine War: Ukraine युद्ध के तीन साल से ज्यादा चले लंबे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अमेरिकी और रूसी अधिकारी आज मियामी में आमने-सामने बैठे। ट्रंप प्रशासन की पहल पर शुरू हुई यह वार्ता Ukraine संकट को सुलझाने का नया प्रयास है, जहां रूसी दूत ने इसे ‘रचनात्मक’ बताया है। लेकिन क्या यह Ukraine War पर अमेरिका-रूस वार्ता वास्तव में शांति की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, या फिर सिर्फ कूटनीतिक दिखावा? विशेषज्ञों का मानना है कि मियामी शांति सम्मेलन में चर्चा का केंद्र अमेरिकी शांति प्लान रहेगा, जिसमें क्षेत्रीय समझौते और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।
Ukraine War, जो फरवरी 2022 में रूस के आक्रमण से शुरू हुआ, अब तक 5 लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका है और यूरोपीय अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिका ने यूक्रेन को 1,75,000 करोड़ डॉलर से ज्यादा की सैन्य सहायता दी, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नीति में बदलाव आया है। ट्रंप ने चुनावी वादे के तहत ’24 घंटे में युद्ध खत्म’ का दावा किया था, और मियामी वार्ता उसी दिशा में पहला बड़ा कदम है। पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जबकि रूस की ओर से क्रेमलिन के विशेष दूत सर्गेई रयाबकोव वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।
मियामी वार्ता का बैकग्राउंड: ट्रंप शांति प्लान क्या कहता है?
Ukraine War पर अमेरिका-रूस वार्ता का आधार ट्रंप प्रशासन का प्रस्तावित शांति प्लान है, जो पिछले हफ्ते यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ वाशिंगटन में चर्चा का हिस्सा था। एनपीआर के अनुसार, इस प्लान में रूस को पूर्वी यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण की अनुमति देने का सुझाव है, बदले में मॉस्को को नाटो विस्तार पर रोक लगाने और Ukraine की सुरक्षा गारंटी देने का वादा। रूसी दूत रयाबकोव ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “वार्ता रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। हम अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन Ukraine की निष्पक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए।” यह बयान रूस की ओर से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि क्रेमलिन अक्सर पश्चिमी पहलों को ‘अप्रभावी’ बताता रहा है।
मियामी का चयन रणनीतिक है। फ्लोरिडा में ट्रंप का मजबूत आधार होने से यह स्थान कूटनीतिक दबाव बनाने में मददगार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि वार्ता शुक्रवार को यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ अमेरिकी चर्चाओं के बाद शुरू हुई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पोलिटिको यूरोप को बताया, “ट्राइलेटरल मीटिंग (अमेरिका-रूस-यूक्रेन) अभी संभव नहीं लग रही, लेकिन कुछ नया निकल सकता है।” ज़ेलेंस्की ने जोर दिया कि कोई भी समझौता Ukraine की संप्रभुता को कमजोर नहीं कर सकता। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि, जिसमें जर्मनी और फ्रांस के अधिकारी शामिल हैं, मियामी में अलग से अमेरिका से मिले, लेकिन रूस के साथ सीधी बातचीत से परहेज किया।
रूसी दृष्टिकोण: ‘रचनात्मक’ वार्ता के पीछे छिपी शर्तें
रूस ने हमेशा यूक्रेन युद्ध को ‘विशेष सैन्य अभियान’ कहा है, और मियामी वार्ता को स्वीकार करना उसके लिए कूटनीतिक जीत है। डीडब्ल्यू की लाइव अपडेट्स के मुताबिक, रूसी दूत फ्लोरिडा पहुंचे तो यूरोपीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की संभावना नकार दी गई। मॉस्को का मुख्य मुद्दा डोनबास क्षेत्र पर नियंत्रण और क्रीमिया की मान्यता है। रयाबकोव ने कहा कि अमेरिकी प्लान में ‘यथार्थवादी’ तत्व हैं, लेकिन नाटो की पूर्वी विस्तार नीति पर पूर्ण रोक जरूरी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रूस आर्थिक प्रतिबंधों से राहत चाहता है, जो 2022 से लागू हैं और रूसी अर्थव्यवस्था को 2% की मंदी में धकेल चुके हैं।
हालांकि, वार्ता में ठहराव भी दिख रहा है। यूक्रेन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ट्राइलेटरल फॉर्मेट से इनकार कर रहे हैं, जिससे रूस-यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत का दबाव रूस पर है। यूट्यूब पर प्रसारित एक वीडियो विश्लेषण में कहा गया कि मॉस्को प्रमुख क्षेत्रीय मांगें मानने को तैयार नहीं, जिससे मियामी शांति सम्मेलन रुका हुआ है। रूस ने हाल ही में ओडेसा पर मिसाइल हमला किया, जिसमें 8 मौतें हुईं, जो वार्ता के बीच तनाव बढ़ा रहा है।
Ukraine और पश्चिम का रुख: सुरक्षा गारंटी पर अड़िग
Ukraine के लिए मियामी वार्ता दोधारी तलवार है। एक ओर ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से सहायता में कटौती का डर, दूसरी ओर शांति की उम्मीद। ज़ेलेंस्की ने कहा कि कोई समझौता यूक्रेन की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करे। यूरोपीय नेता, जैसे जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़, ने जोर दिया कि रूस को सैन्य दबाव बनाए रखना होगा। एनएचपीआर की रिपोर्ट बताती है कि वार्ता के दौरान अमेरिका ने Ukraine को अतिरिक्त हथियारों का वादा किया, लेकिन शांति प्लान पर सहमति के लिए रूस से लचीलापन मांगा।
विश्लेषकों का कहना है कि मियामी वार्ता यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका-रूस वार्ता का टेस्ट केस है। यदि सफल रही, तो 2026 में जेनेवा में बड़ा सम्मेलन हो सकता है। लेकिन विफलता से ट्रंप की कूटनीति पर सवाल उठेंगे। क्यिव पोस्ट के अनुसार, ब्रेकथ्रू की कमी से अमेरिका ने रूस पर जिम्मेदारी डाली है।
संभावित परिणाम: शांति की राह में बाधाएं
Ukraine War को खत्म करने के लिए मियामी सम्मेलन महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। आर्थिक मोर्चे पर, युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा कीमतें 30% बढ़ाई हैं, और शांति से तेल $70 प्रति बैरल तक गिर सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव भी गंभीर हैं, जहां ब्लैक सी में प्रदूषण बढ़ा है। भारत जैसे देश, जो तटस्थ रहे, अब शांति का समर्थन कर रहे हैं।
निष्कर्षतः मियामी में अमेरिका-रूस वार्ता ‘रचनात्मक’ लग रही है, लेकिन यूक्रेन संकट सुलझाने के लिए सभी पक्षों को समझौता करना होगा। क्या यह ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक बनेगा? समय बताएगा। Ukraine War पर नजर रखें।
Sources- रॉयटर्स