19 दिसंबर 2025 – भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया मोड़ आ गया है। बढ़ते सुरक्षा जोखिमों और उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ने बांग्लादेश के राजशाही और खुलना शहरों में अपने दो Visa आवेदन केंद्र (IVAC) अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। यह कदम 18 दिसंबर को लिया गया, जब स्थानीय रेडिकल समूहों ने भारतीय उच्चायोग और सहायक मिशनों के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। ढाका में IVAC को फिर से खोल दिया गया है, लेकिन इन दो केंद्रों का बंद होना हजारों वीजा आवेदकों को प्रभावित कर रहा है। यह घटना शेख हसीना की भारत में शरण और बांग्लादेश की आंतरिक अस्थिरता से उपजी तनावों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
इस रिपोर्ट में हम इस घटना की पूरी पृष्ठभूमि, विरोध प्रदर्शनों के कारणों, भारत की प्रतिक्रिया, प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह एक चेतावनी का संकेत है, जहां आर्थिक सहयोग के बावजूद राजनीतिक उथल-पुथल हावी हो रही है।
घटना की पृष्ठभूमि: शेख हसीना का निर्वासन और बांग्लादेश की अस्थिरता
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। हसीना, जो 15 साल तक सत्ता में रहीं, ने भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए थे – व्यापार, सुरक्षा और जल बंटवारे पर सहयोग के जरिए। लेकिन छात्र आंदोलनों के बाद उनका निर्वासन हुआ, और वे भारत में शरण ले चुकी हैं। नवंबर 2024 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली, जो हसीना समर्थकों पर कार्रवाई कर रही है।
इस बीच, एंटी-इंडिया सेंटिमेंट बढ़ा है। रेडिकल इस्लामिस्ट ग्रुप्स जैसे “जुलाई ओइक्या” (July Oikya) ने हसीना की वापसी, भारत के हस्तक्षेप और तीसरे टर्म के आरोप लगाए। 17 दिसंबर को ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला, जिसमें पुलिस ने हस्तक्षेप किया। एक छात्र नेता ने उग्र बयान दिया: “पार्लियामेंट में पहुंचे तो दिल्ली का सिर काट देंगे।” यह नारा वायरल हो गया, जिसने तनाव को भड़काया। राजशाही और खुलना में भी समान प्रदर्शन हुए, जहां भारतीय सहायक उच्चायोगों के बाहर नारे लगाए गए।
IVAC सिस्टम, जो VFS ग्लोबल द्वारा संचालित है, बांग्लादेश में वीजा प्रक्रिया को सुगम बनाता है। ढाका के अलावा राजशाही और खुलना में ये केंद्र महत्वपूर्ण हैं, जहां सालाना लाखों आवेदन आते हैं – ज्यादातर पर्यटन, शिक्षा और मेडिकल के लिए। लेकिन सुरक्षा खतरे ने इनकी कार्यप्रणाली को बाधित कर दिया।
विरोध प्रदर्शनों का विवरण: उग्र नारे और सुरक्षा चिंताएं
18 दिसंबर को राजशाही में “जुलाई ओइक्या” समर्थकों ने भारतीय सहायक उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर लहराए, जिनमें लिखा था “हसीना को सौंपो” और “भारत हस्तक्षेप बंद करो।” खुलना में भी समान दृश्य देखे गए, जहां स्थानीय पुलिस को भारी सुरक्षा तैनात करनी पड़ी। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में 500 से अधिक लोग शामिल थे, जो हसीना की प्रत्यर्पण और भारत की कथित साजिश की मांग कर रहे थे।
भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “जब भी सुरक्षा स्थिति बिगड़ती है, हम संचालन रोक देते हैं।” IVAC की आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिस जारी किया गया: “सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, IVAC राजशाही और खुलना आज (18.12.2025) बंद रहेंगे। जिनके अपॉइंटमेंट हैं, उन्हें बाद की तारीख दी जाएगी।” ढाका सेंटर, जो 17 दिसंबर को बंद हुआ था, 18 को फिर से खुल गया, लेकिन ये दो केंद्र प्रभावित रहे।
ये प्रदर्शन बांग्लादेश की व्यापक अस्थिरता का हिस्सा हैं। यूनुस सरकार पर इस्लामिस्ट दबाव बढ़ रहा है, और भारत को निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हसीना समर्थकों को कमजोर करने की कोशिश है, लेकिन इससे द्विपक्षीय व्यापार (2024 में $16 बिलियन) को खतरा है।
भारत की तत्काल प्रतिक्रिया: राजदूत को समन और कूटनीतिक दबाव
घटना के तुरंत बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेशी उच्चायोग के अधिकारी को समन किया और विरोध प्रदर्शनों की निंदा की। एक प्रवक्ता ने कहा, “प्रदर्शनकारी उग्र बयानों से संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम बांग्लादेश सरकार से भारतीय मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हैं।” यह समन हसीना के निर्वासन के बाद तीसरा ऐसा कदम है।
भारतीय उच्चायोग ढाका ने स्थानीय अधिकारियों से बात की, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के कारण केंद्र बंद रखे गए। साथ ही, भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई। MEA ने कहा कि वीजा सेवाएं न्यूनतम रखी जाएंगी, और ऑनलाइन आवेदन को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम अमेरिकी और यूरोपीय दूतावासों के समान है, जो बांग्लादेश में सुरक्षा अलर्ट जारी कर चुके हैं।
प्रभाव: Visa आवेदकों पर बोझ, आर्थिक नुकसान
यह बंदी तत्काल प्रभाव डाल रही है। राजशाही और खुलना से सैकड़ों आवेदक प्रभावित हुए, जिनमें छात्र, व्यापारी और मरीज शामिल हैं। एक बांग्लादेशी छात्र ने कहा, “मेरा भारत स्टडी वीजा अपॉइंटमेंट था, अब देरी होगी।” सालाना इन केंद्रों से 2 लाख आवेदन आते हैं, और बंदी से प्रक्रिया में 2-3 सप्ताह की देरी हो सकती है।
आर्थिक रूप से, भारत-बांग्लादेश व्यापार प्रभावित होगा। बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी व्यापारिक साझेदार है, लेकिन तनाव से सीमा पर कस्टम डिले बढ़ सकते हैं। पर्यटन और रेमिटेंस ($5 बिलियन) पर असर पड़ेगा। राजनीतिक रूप से, यह यूनुस सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, जो भारत के साथ संतुलन बनाने में असफल साबित हो रही है।
सामाजिक स्तर पर, एंटी-इंडिया सेंटिमेंट सोशल मीडिया पर फैल रहा है, जहां #BoycottIndia ट्रेंड कर रहा है। लेकिन कई बांग्लादेशी बुद्धिजीवी भारत की भूमिका की सराहना कर रहे हैं, खासकर हसीना के निर्वासन के दौरान।
भविष्य की संभावनाएं: संवाद या और तनाव?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रदर्शन जारी रहे, तो और केंद्र बंद हो सकते हैं। भारत BIMSTEC और SAARC जैसे मंचों पर दबाव बढ़ा सकता है। यूनुस सरकार को इस्लामिस्ट ग्रुप्स को नियंत्रित करने की जरूरत है, वरना आर्थिक सहायता (भारत से $1 बिलियन लोन) पर असर पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष: दोनों देश जल बंटवारे (फरक्का समझौता) पर बातचीत जारी रख सकते हैं।
लंबे समय में, हसीना का प्रत्यर्पण मुद्दा हल होना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया है कि यह बांग्लादेशी अदालत का मामला है। यदि संवाद बढ़े, तो संबंध सुधर सकते हैं, लेकिन वर्तमान में सतर्कता बरतनी होगी।
निष्कर्ष: सतर्कता का समय
बांग्लादेश में दो IVAC के बंद होने से भारत ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी – नागरिकों और मिशनों की सुरक्षा। एंटी-इंडिया प्रदर्शनों का असर न केवल वीजा सेवाओं पर, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ रहा है। यह घटना द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है, लेकिन संवाद ही समाधान है।