19 दिसंबर 2025, Tamil Nadu: Tamil Nadu में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर एक बड़ा कदम उठाया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) अभियान के तहत राज्य की ड्राफ्ट सूची से करीब 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह सफाई अभियान मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लिकेट एंट्री और अपुष्ट पते जैसे कारणों से चला। चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है, जहां 14.25 लाख नाम कट गए। कुल मिलाकर, राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई है, जो चुनावी परिदृश्य को नया रूप दे सकती है। यह ड्राफ्ट सूची आज दोपहर 2 बजे जारी की गई, और अब अगले कुछ दिनों में आपत्तियां दर्ज करने का समय है।
इस रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि यह अभियान क्या है, कितने नाम क्यों हटाए गए, प्रमुख जिलों पर असर, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं, और आगे क्या होगा। अगर आप Tamil Nadu के वोटर हैं, तो अपनी ड्राफ्ट सूची चेक करना न भूलें, वरना आपका वोट खो सकता है।
SIR अभियान का बैकग्राउंड: वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने की मुहिम
भारतीय निर्वाचन आयोग ने 2025 के विधानसभा चुनावों को पारदर्शी बनाने के लिए 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR 2.0 अभियान चलाया। Tamil Nadu में यह अभियान 25 नवंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चला, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने घर-घर जाकर फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म 7 (नाम हटाने) और फॉर्म 8 (सुधार) वितरित किए। लेकिन समस्या तब आई जब लाखों फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’ (एकत्र न हो सकने वाले) साबित हुए। राज्य में कुल 6.23 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद ड्राफ्ट में यह संख्या घटकर करीब 5.33 करोड़ रह गई, यानी 90 लाख से अधिक नाम कट गए।
ईसीआई के अनुसार, यह अभियान ‘घुसपैठियों’ और फर्जी वोटरों को रोकने के लिए है। Tamil Nadu जैसे घनी आबादी वाले राज्य में डुप्लिकेट वोटिंग आम समस्या है, खासकर प्रवासी मजदूरों के मामले में। अभियान के दौरान 84.91 लाख फॉर्म अनकलेक्टेबल पाए गए, जो सीधे नाम हटाने का आधार बने। अन्य राज्यों जैसे बंगाल (58 लाख) और राजस्थान में भी इसी तरह की सफाई हुई, लेकिन तमिलनाडु में आंकड़ा सबसे ऊंचा है। यह पहली बार नहीं है; 2019 में भी SIR से 2 करोड़ नाम पूरे देश से हटे थे, लेकिन 2025 का यह दौर और सख्ती से चला।
हटाए गए नामों का ब्रेकडाउन: जिला-वार आंकड़े
SIR के तहत हटाए गए नामों का वितरण राज्यभर में असमान है। चेन्नई जैसे शहरी क्षेत्रों में प्रवास और मौत के कारण ज्यादा प्रभाव पड़ा, जबकि ग्रामीण जिलों में डुप्लिकेट एंट्री प्रमुख रही। आइए, प्रमुख जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें:
| जिला | हटाए गए नाम (लाख में) | कुल मतदाता (पहले) | कुल मतदाता (ड्राफ्ट में) | प्रमुख कारण |
|---|---|---|---|---|
| चेन्नई | 14.25 | 40.04 लाख | 25.79 लाख | मौत (1.56 लाख), स्थानांतरण (12.22 लाख) |
| कोयंबटूर | 6.50 | – | – | डुप्लिकेट (18,772 मामले) |
| डिंडीगुल | 2.34 | 19.35 लाख | 16.09 लाख | अपुष्ट पते (27,323) |
| कांचीपुरम | 2.74 | – | – | अनकलेक्टेबल फॉर्म |
| करूर | 0.80 | 8.79 लाख | 8.18 लाख | सामान्य सफाई |
| कुल राज्य | 90+ | 6.23 करोड़ | 5.33 करोड़ | मिश्रित |
ये आंकड़े ईसीआई के प्रारंभिक डेटा पर आधारित हैं। चेन्नई में 16 विधानसभा क्षेत्र प्रभावित हुए, जहां कुल वोटर 37% घट गए। कोयंबटूर जैसे औद्योगिक जिले में प्रवासी मजदूरों के नाम ज्यादा कटे, जो चुनावी गणित बदल सकते हैं। कुल मिलाकर, महिलाओं और युवाओं के नामों में भी कमी आई, जो डेमोग्राफिक शिफ्ट का संकेत देती है।
कारणों की गहराई: क्यों हटे इतने नाम?
नाम हटाने के पीछे कई ठोस कारण हैं, जो SIR की सफलता दर्शाते हैं:
- मृत्यु: राज्य में 1.56 लाख लोगों की मौत दर्ज हुई, लेकिन उनके नाम लिस्ट में बने हुए थे। ईसीआई ने आधार और अन्य रिकॉर्ड्स से वेरिफाई किया।
- स्थानांतरण: 12.22 लाख वोटर दूसरे पते पर शिफ्ट हो चुके थे, लेकिन पुरानी एंट्री बनी रही। खासकर चेन्नई से बाहरी जिलों या अन्य राज्यों में जाने वालों के मामले।
- डुप्लिकेट एंट्री: 18,772 मामलों में एक ही व्यक्ति के दो नाम मिले, अक्सर नाम में मामूली अंतर से।
- अपुष्ट पते: 27,323 वोटरों के घर बीएलओ नहीं पहुंच सके, या फॉर्म वापस नहीं आए। अनकलेक्टेबल फॉर्म 84.91 लाख थे।
ये कारण न केवल फर्जी वोटिंग रोकते हैं, बल्कि चुनाव की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह अभियान गरीब और प्रवासी वोटरों को निशाना बना रहा है, जो DMK जैसे दलों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी परिदृश्य पर असर: सियासत में हलचल
यह सफाई Tamil Nadu की 2026 विधानसभा चुनावों को नया मोड़ देगी। चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में वोटर बेस घटने से AIADMK और BJP जैसे विपक्षी दलों को फायदा हो सकता है, जबकि सत्ताधारी DMK को युवा और प्रवासी वोटर्स का नुकसान। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुल वोटिंग प्रतिशत 2-3% गिर सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। DMK नेता ने इसे ‘वोटर सप्रेशन’ बताया, कहते हुए कि गरीबों के नाम जानबूझकर काटे जा रहे। वहीं, BJP ने इसे ‘स्वच्छ चुनाव’ की जीत कहा, और घुसपैठियों पर चुटकी ली। AIADMK ने मांग की कि आपत्ति प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। सोशल मीडिया पर #VoterListScam ट्रेंड कर रहा है, जहां वोटर्स अपनी कहानियां शेयर कर रहे। कुल मिलाकर, यह अभियान सियासी दलों के लिए चुनौती है, क्योंकि अब नए नाम जोड़ने का समय सीमित है।
अगले कदम: आपत्ति दर्ज करें, वोट बचाएं
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद ईसीआई ने 20 दिसंबर से 28 दिसंबर तक आपत्तियां और दावे दर्ज करने का समय दिया है। वोटर्स ईसीआई वेबसाइट (voters.eci.gov.in) या नजदीकी बूथ पर फॉर्म भर सकते हैं। 29 दिसंबर से फाइनल लिस्ट बनेगी। अगर आपका नाम कटा है, तो आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज जमा करें। ईसीआई ने हेल्पलाइन 1950 भी शुरू की है।
सरकार ने जागरूकता के लिए SMS कैंपेन चलाया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियां बाकी हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि युवा वोटर्स तुरंत चेक करें, क्योंकि 18-19 साल के नए वोटर्स के नाम जोड़ने का मौका भी इसी में है।
निष्कर्ष: पारदर्शिता की कीमत पर वोट का हक?
Tamil Nadu का यह SIR अभियान चुनावी लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन 90 लाख नाम कटने से लाखों वोटर्स का हक खतरे में है। यह सफाई जरूरी है, लेकिन समावेशी भी होनी चाहिए। दलों को अब वोटर आउटरीच पर फोकस करना होगा। अगर आप प्रभावित हैं, तो तुरंत एक्शन लें। स्वच्छ वोटिंग के लिए यह दर्दनाक लेकिन आवश्यक है। अगले अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें।