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18 दिसंबर 2025, Sensex– भारतीय शेयर बाजार ने आज एक बार फिर मिश्रित रंग दिखाए, जहां बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी फ्लैट रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सेंसेक्स 77.84 अंकों या 0.09% की कमी के साथ 84,481.81 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निफ्टी 3 अंकों या 0.01% की गिरावट के साथ 25,815.55 पर समाप्त हुआ। यह चौथा लगातार सत्र है जब बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जो वैश्विक संकेतों की कमजोरी और व्यापारिक अनिश्चितताओं को दर्शाता है। बाजार की यह स्थिति निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन आईटी सेक्टर की मजबूती ने बड़े नुकसान को रोक लिया। आइए, इस सत्र की गहन समीक्षा करें, जिसमें सेक्टर-विशिष्ट प्रदर्शन, प्रमुख स्टॉक्स और भविष्य की संभावनाओं पर नजर डालें।

बाजार का समग्र अवलोकन: मंदी का साया बरकरार

आज का ट्रेडिंग सेशन शुरुआत में सकारात्मक रहा, जहां गिफ्ट निफ्टी ने फ्लैट ओपनिंग का संकेत दिया। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ ही बाजार में अस्थिरता बढ़ गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर 84,700 तक पहुंचा, लेकिन अंतिम घंटे में बिकवाली का दबाव बढ़ने से यह 84,400 के निचले स्तर पर आ गया। निफ्टी भी 25,850 के ऊपर लटका रहा, लेकिन अंत में 25,800 के आसपास स्थिर हो गया। कुल मिलाकर, बाजार का मूड सतर्क रहा, जहां विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने 1,200 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) ने 800 करोड़ रुपये की खरीदारी से बाजार को सहारा दिया।

यह गिरावट वैश्विक बाजारों की कमजोरी से प्रेरित है। अमेरिकी बाजारों में डाउ जोंस और नैस्डैक में 0.5-1% की गिरावट देखी गई, जो फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर अनिश्चितता से जुड़ी है। यूरोपीय बाजारों में भी ट्रेड डील्स पर सस्पेंस ने निवेशकों को पीछे धकेला। भारत में, ऑटो, मेटल और फार्मा सेक्टरों की कमजोरी ने बाजार को नीचे खींचा, जबकि आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज ने कुछ राहत प्रदान की। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.2-0.3% नीचे बंद हुए, जो बड़े कैप्स की तुलना में अधिक संवेदनशीलता दर्शाता है।

सेक्टर-विशिष्ट प्रदर्शन: आईटी ने संभाला मोर्चा

सेक्टरों की बात करें तो, आज का बाजार ध्रुवीकरण का शिकार रहा। Nifty IT इंडेक्स 0.8% ऊपर बंद हुआ, जहां TCS, Infosys और Wipro जैसे दिग्गजों ने 1-2% की बढ़त दर्ज की। यह मजबूती अमेरिकी टेक सेक्टर की रिकवरी और भारत की आईटी निर्यात क्षमता पर निवेशकों के विश्वास को प्रतिबिंबित करती है। इसके विपरीत, Nifty Auto 0.7% नीचे रहा, जहां Maruti Suzuki और Tata Motors में 1-1.5% की गिरावट आई। मेटल सेक्टर में Tata Steel और JSW Steel ने 2% तक खोए, जो वैश्विक कमोडिटी कीमतों में नरमी से प्रभावित है। फार्मा सेक्टर भी 0.5% नीचे रहा, जहां Sun Pharma और Dr. Reddy’s Labs प्रमुख हारने वाले रहे।

Nifty Bank इंडेक्स फ्लैट रहा, लेकिन HDFC Bank और ICICI Bank में मामूली बढ़त ने इसे स्थिर रखा। FMCG सेक्टर में United Spirits की 2% गिरावट ने सेक्टर को नीचे खींचा। कुल मिलाकर, 13 सेक्टरों में से केवल 4 ही हरे निशान में रहे, जो बाजार की चुनौतियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेक्टरल रोटेशन निवेशकों को विविधीकरण की ओर धकेल रहा है।

प्रमुख स्टॉक्स: गेनर्स और लूजर्स की कहानी

आज के सेशन में कुछ स्टॉक्स ने चमक दिखाई, तो कुछ ने निराश किया। टॉप गेनर्स में IndiGo (InterGlobe Aviation) 3% ऊपर रही, जो एयरलाइन सेक्टर की रिकवरी और दिवाली बाद यात्रा बूम से जुड़ी है। HDFC AMC ने 7% की जबरदस्त छलांग लगाई, जो म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की मजबूती को दर्शाता है। अन्य गेनर्स में Bharti Airtel (1.5%) और Reliance Industries (0.8%) शामिल रहे, जो टेलीकॉम और एनर्जी सेक्टर की स्थिरता दिखाते हैं।

दूसरी ओर, लूजर्स में United Spirits 2% नीचे रही, जो शराब उद्योग में नियामकीय दबाव से प्रभावित है। Sun Pharma, Tata Steel, Power Grid और Asian Paints 1-2% की गिरावट के साथ प्रमुख हारने वाले रहे। ये गिरावटें सेक्टरल कमजोरियों को रेखांकित करती हैं, जहां मेटल और फार्मा में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं प्रमुख कारक हैं। कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम 12 लाख करोड़ रुपये रहा, जो औसत से 10% कम है, जो निवेशकों की सतर्कता को इंगित करता है।

वैश्विक संदर्भ: ट्रेड वार्स का छाया

भारतीय बाजार वैश्विक संकेतों से अछूता नहीं है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की ट्रेड पॉलिसी पर अनिश्चितता ने एशियाई बाजारों को प्रभावित किया। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6% नीचे और जापान का निक्केई 0.4% गिरा। यूरोप में ब्रेक्सिट पोस्ट-मॉर्टम और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मीटिंग ने बाजारों को दबाव में रखा। तेल कीमतों में 1% की नरमी (ब्रेंट 72 डॉलर प्रति बैरल) ने एनर्जी स्टॉक्स को राहत दी, लेकिन मेटल्स को नुकसान पहुंचाया।

भारत में, रुपये की 5 पैसे की मजबूती (83.45 पर) ने आयातकों को राहत दी, लेकिन निर्यातकों पर दबाव बढ़ाया। FIIs की बिकवाली का सिलसिला दिसंबर में 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो विदेशी निवेश की धीमी गति को दर्शाता है।

विशेषज्ञों की राय: सतर्क आशावाद

विशेषज्ञ बाजार की इस स्थिति को अस्थायी मान रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषक राकेश झा ने कहा, “आईटी सेक्टर की मजबूती Q3 आय सीजन से पहले सकारात्मक है, लेकिन ऑटो और मेटल में सुधार के लिए वैश्विक रिकवरी जरूरी।” एंजल वन के CEO विपुल भदानी का मानना है कि निफ्टी 25,500-26,000 के बीच रेंज में रहेगा, और 25,700 का ब्रेकआउट ऊपरी दिशा का संकेत देगा। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को डिप्स में खरीदारी की सलाह दी जा रही है, खासकर ब्लू-चिप स्टॉक्स में।

कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि US फेड की अगली मीटिंग (दिसंबर 18-19) और Q3 GDP डेटा बाजार को प्रभावित करेंगे। यदि फेड रेट कट को स्थगित करती है, तो बाजार में और दबाव आ सकता है।

भविष्य का आउटलुक: अवसरों की तलाश

कल गुरुवार को बाजार फ्लैट ओपनिंग के साथ शुरू हो सकता है, लेकिन US फेड मीटिंग पर नजर रहेगी। निफ्टी के लिए 25,700 सपोर्ट और 26,000 रेजिस्टेंस महत्वपूर्ण स्तर हैं। निवेशकों को डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पर फोकस करना चाहिए, जहां ETF और म्यूचुअल फंड्स सुरक्षित विकल्प हैं।

कॉर्पोरेट जगत में, Vodafone Idea के FPO से 3,300 करोड़ जुटाने और Mizuho की Avendus अधिग्रहण जैसी खबरें बाजार को बूस्ट दे सकती हैं। कुल मिलाकर, 2026 के लिए बाजार 10-12% की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में सतर्कता बरतनी होगी।

समापन: बाजार की लचीलापन की परीक्षा

आज का सेशन सेंसेक्स और निफ्टी की लचीलापन को परखता रहा, जहां मामूली गिरावट के बावजूद बाजार ने बड़े झटके से बचा लिया। यह निवेशकों को याद दिलाता है कि बाजार चक्र का हिस्सा है, और धैर्य ही कुंजी है। आईटी जैसे मजबूत सेक्टरों से प्रेरणा लेते हुए, निवेशक अवसरों की तलाश करें। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादें बाजार को लंबे समय में ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

By SHAHID

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