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18 दिसंबर 2025, Katihar – बिहार के Katihar जिले में पुलिस की वर्दी एक बार फिर शर्मसार हुई है। प्राणपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जल्ला हरेरामपुर गांव में एक साधारण जमीन विवाद ने भ्रष्टाचार का काला चेहरा उजागर कर दिया। यहां तैनात सब-इंस्पेक्टर (SI) पुष्पेंद्र कुमार पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार द्वारा बनाए गए एक वीडियो के वायरल होते ही पुलिस अधीक्षक (SP) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा रही है, बल्कि पूरे बिहार में पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे – जमीन विवाद से शुरू होकर वीडियो के वायरल होने तक, और उसके बाद की कार्रवाई व प्रतिक्रियाओं तक।

जमीन विवाद: एक साधारण शिकायत का काला मोड़

कहानी शुरू होती है 9 दिसंबर 2025 से, जब जल्ला हरेरामपुर गांव के किसान राजेश सिंह (सहज लाल सिंह के पुत्र) ने प्राणपुर थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। राजेश सिंह ने बताया कि उनके निजी खेत की जमीन पर बने टिन के घर को पड़ोसी बसुदेव शाह ने जबरन तोड़ दिया। यह घर राजेश का आशियाना था, जहां वे अपनी फसल के बीच में रहते थे। बसुदेव शाह पर जमीन हड़पने का भी आरोप लगाया गया। राजेश ने थाने पहुंचकर SI पुष्पेंद्र कुमार को शिकायत सौंपी और न्याय की गुहार लगाई। लेकिन जो उम्मीद में आया था, वह धोखे में बदल गया।

शिकायत मिलते ही SI पुष्पेंद्र ने मामले को ‘सुलझाने’ का भरोसा दिया, लेकिन शर्त के साथ। उन्होंने राजेश से कहा कि FIR दर्ज करने और बसुदेव शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत देनी होगी। राजेश, जो एक साधारण किसान हैं और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ने दबाव में आकर पहले 5,000 रुपये नकद दे दिए। यह रकम SI ने खुलेआम थाने के अंदर ही ली, बिना किसी हिचकिचाहट के। राजेश के अनुसार, SI ने कहा था कि बाकी पैसे काम पूरा होने पर देने होंगे। यह पूरा लेन-देन थाने के परिसर में हुआ, जहां न्याय की उम्मीद करने वाले लोग रोज आते-जाते हैं।

इस घटना ने राजेश को हताश कर दिया। उन्होंने सोचा कि अगर पुलिस ही भ्रष्ट है, तो न्याय कहां मिलेगा? इसी हताशा में राजेश ने चुपके से अपना मोबाइल फोन निकाला और पूरा दृश्य रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और यहीं से कहानी ने नया मोड़ ले लिया।

वीडियो का खुलासा: ‘रिकॉर्ड तो नहीं कर रहे?’ – SI की बौखलाहट

वीडियो की लंबाई महज दो मिनट से कम है, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार का पूरा नंगा चेहरा नजर आता है। क्लिप में SI पुष्पेंद्र कुमार को देखा जा सकता है, जो वर्दी में हैं और राजेश से बात कर रहे हैं। राजेश पैसे का लिफाफा थमाते हैं, तो SI पहले तो हंसते हुए ले लेते हैं, लेकिन तभी उनकी नजर राजेश के हाथ पर पड़ती है। वे बौखलाते हुए पूछते हैं, “मोबाइल में रिकॉर्ड तो नहीं कर रहे हो? नहीं तो आपको दिक्कत हो जाएगी। हम तो फंसेंगे ही, लेकिन तुम्हारा भी काम नहीं हो पाएगा।” यह डायलॉग वीडियो का सबसे डरावना हिस्सा है, जहां SI न केवल रिश्वत ले रहे हैं, बल्कि पीड़ित को धमकी भी दे रहे हैं।

वीडियो में SI की आवाज साफ सुनाई देती है, और उनका चेहरा भी स्पष्ट है। राजेश की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य भी बैकग्राउंड में दिखते हैं, जो चुपचाप यह सब देख रहे हैं। वीडियो के अंत में SI पैसे को अपनी जेब में डालते नजर आते हैं और कहते हैं, “अब काम हो जाएगा, बाकी पैसे बाद में।” यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से फैली – फेसबुक, व्हाट्सएप ग्रुप्स और ट्विटर (अब X) पर। मात्र 24 घंटों में इसे हजारों व्यूज मिले, और #KatiharPoliceBribery जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। स्थानीय पत्रकारों ने इसे सबसे पहले पकड़ा, और फिर मुख्यधारा मीडिया में यह सुर्खियां बन गई।

इस वीडियो ने न केवल SI की पोल खोल दी, बल्कि पूरे थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए। क्या प्राणपुर थाना भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है? क्या अन्य अधिकारी भी इसी तरह काम कर रहे हैं? ये सवाल अब हर जुबान पर हैं।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: निलंबन और जांच का आदेश

वीडियो वायरल होते ही Katihar पुलिस में हड़कंप मच गया। SP ने इसे गंभीरता से लिया और शाम होते-होते SI पुष्पेंद्र कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई 17 दिसंबर की रात में हुई, जब वीडियो ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया था। इसके साथ ही, सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम का काम है वीडियो की प्रामाणिकता जांचना, रिश्वत की राशि की पुष्टि करना और यदि अन्य अधिकारी शामिल हैं तो उन्हें भी चिह्नित करना।

एसपी के निर्देश पर एएसपी अभिजीत सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “वीडियो पुलिस के संज्ञान में आ गया है। इसकी गंभीरता को देखते हुए एसपी ने जांच का आदेश दिया है, और प्राणपुर थाने में तैनात एसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच चल रही है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।” यह बयान न केवल आश्वासन देता है, बल्कि पुलिस की छवि सुधारने की कोशिश भी लगता है।

प्राणपुर थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर रंजीत कुमार महतो ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह जमीन विवाद का मामला है, जो सिविल कोर्ट का विषय है। शेष आरोपों की जांच की जा रही है। पूछताछ के बाद उचित कार्रवाई होगी।” हालांकि, SI पुष्पेंद्र ने खुद को बरी करते हुए कहा, “मुझ पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।” लेकिन वीडियो सबूत के सामने यह दावा कमजोर पड़ जाता है।

स्थानीय प्रतिक्रियाएं: धरना, आक्रोश और न्याय की मांग

यह घटना Katihar के ग्रामीण इलाकों में आग की तरह फैल गई। प्राणपुर थाना क्षेत्र के villagers, social workers और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बन गई। सबसे मुखर प्रतिक्रिया भारत किसान संघ (उत्तर बिहार प्रांत) की आई। संगठन के जिला मंत्री अक्षय सिंह के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने थाने के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण धरना दिया। उन्होंने निलंबन की मांग की, जो बाद में पूरी हुई। धरने में महिलाएं और पुरुष किसान शामिल थे, जो नारों के साथ कह रहे थे, “पुलिस भ्रष्टाचार बंद करो, न्याय दो।”

उत्तर बिहार प्रांत के महासचिव बृजेश कुमार (उर्फ मनोज कुमार गुप्ता) ने कहा, “ऐसी घटनाएं किसानों का विश्वास तोड़ रही हैं। अगर पुलिस ही रिश्वत मांगेगी, तो गरीब किसान कहां जाएंगे?” राजेश सिंह ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया, “हमने सोचा था थाने जाकर न्याय मिलेगा, लेकिन वहां तो पैसे की मांग हो गई। अगर वीडियो न बनाता, तो शायद आज भी परेशान होता।” स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राणपुर थाना में ऐसी शिकायतें आम हैं, लेकिन पहली बार वीडियो ने इसे उजागर किया।

सोशल मीडिया पर भी आक्रोश फूट पड़ा। कई यूजर्स ने लिखा, “बिहार पुलिस का यह चेहरा शर्मनाक है।” कुछ ने SP की तारीफ की कि कार्रवाई तेज हुई, लेकिन ज्यादातर ने सिस्टम में सुधार की मांग की।

व्यापक संदर्भ: बिहार में पुलिस भ्रष्टाचार का काला अध्याय

यह घटना बिहार पुलिस के लिए कोई नई नहीं है। राज्य में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आते रहते हैं। 2024 में ही पटना के एक थाने में रिश्वत लेते ASI का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद विभागीय जांच हुई। कटिहार जैसे सीमांचल क्षेत्रों में जमीन विवाद आम हैं, और इन्हें सुलझाने के नाम पर रिश्वत की संस्कृति पनप गई है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पुलिस भ्रष्टाचार के मामले 30% से अधिक हैं। गरीब और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास न तो पैसे होते हैं न ही कानूनी सहायता।

सरकार ने ‘मिशन रणनीतिक’ जैसे अभियान चलाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव कम ही दिखता है। यह घटना एक सबक है कि सोशल मीडिया अब भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। अगर अधिकारी सतर्क रहें, तो ऐसी पोल खुलने से पहले ही सुधार हो सकता है।

निष्कर्ष: न्याय की राह में एक कदम, लेकिन सफर लंबा

Katihar की यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत है। SI पुष्पेंद्र का निलंबन पीड़ित राजेश सिंह को न्याय का भरोसा देता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच निष्पक्ष होगी? क्या बाकी 10,000 रुपये की रिकवरी होगी? और सबसे बड़ा, क्या बिहार पुलिस में पारदर्शिता आएगी? SP की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सिस्टम में जड़ से बदलाव जरूरी है। किसानों और गरीबों को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल शिकायत पोर्टल और सख्त निगरानी की जरूरत है। आखिरकार, वर्दी न्याय की प्रतीक होनी चाहिए, न कि भ्रष्टाचार की।

By SHAHID

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