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18 दिसंबर 2025 Delhi NCR की हवा एक बार फिर जहर बन रही है, और इसकी सबसे बड़ी मार वाहनों से हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसले में अपना पुराना आदेश संशोधित करते हुए BS-III और इससे पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहनों पर Delhi NCR में प्रतिबंध बहाल कर दिया। यह कदम 12 अगस्त 2025 के आदेश को बदलता है, जिसमें 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश था। अब, केवल BS-IV और उसके बाद के मानक वाले वाहनों को ही छूट मिलेगी। यह फैसला वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन लाखों वाहन मालिकों के लिए चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट में हम इस फैसले के कारणों, प्रभावों, पर्यावरणीय महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

प्रदूषण संकट की पृष्ठभूमि: दिल्ली का काला अध्याय

Delhi NCR भारत का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है, जहां सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन कुल प्रदूषण का 40% हिस्सा हैं। BS-III और पुराने वाहन, जो 2010-2017 के बीच बने हैं, उच्च स्तर के कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) उत्सर्जित करते हैं। ये वाहन ईंधन दक्षता में भी कमजोर हैं, जिससे न केवल हवा खराब होती है, बल्कि ईंधन की बर्बादी भी होती है।

12 अगस्त 2025 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक राहत था, जो कोविड-19 के बाद आर्थिक संकट से जूझते वाहन मालिकों को बचाने के लिए आया था। लेकिन कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने हाल ही में अदालत को सूचित किया कि इस छूट के कारण प्रदूषणकारी वाहन सड़कों पर लौट आए हैं, जिससे AQI में 20-30% की वृद्धि हुई है। नवंबर 2025 में दिल्ली का औसत AQI 350 से ऊपर रहा, जो स्वास्थ्य के लिए घातक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दिल्ली में हर साल 50,000 से अधिक मौतें प्रदूषण से जुड़ी हैं, जिनमें वाहनों का बड़ा योगदान है।

इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट की बेंच—मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जोयमलया बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली—ने CAQM की सिफारिश पर विचार करते हुए आदेश संशोधित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “12 अगस्त 2025 का आदेश अब संशोधित होता है, जिसमें BS-IV और उसके बाद के मानक वाले वाहनों के मालिकों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन BS-III और पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति है।” यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट के पुराने निर्देशों को बहाल करता है, जहां 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को स्क्रैप करने या बाहर निकालने का नियम था।

फैसले का विवरण: क्या बदला, क्या बरकरार?

सुप्रीम कोर्ट का यह संशोधन BS-III (2005-2010) और BS-II या उससे पुराने वाहनों को लक्षित करता है। BS-IV मानक 2017 से लागू हैं, जो BS-III की तुलना में 50% कम उत्सर्जन करते हैं। अब, Delhi NCR के 11 जिलों और आसपास के हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के क्षेत्रों में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग इन वाहनों को जब्त कर सकते हैं। जुर्माना 10,000 रुपये से शुरू होकर स्क्रैपिंग तक जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकारें स्क्रैपिंग सेंटरों को बढ़ावा दें और पुराने वाहनों के मालिकों को सब्सिडी दें। उदाहरण के लिए, दिल्ली सरकार ने पहले ही ‘व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी 2021’ के तहत 5,000 रुपये प्रति वाहन की सहायता की घोषणा की है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है, क्योंकि लाखों मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए नया वाहन खरीदना मुश्किल है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगभग 20 लाख BS-III वाहन हैं, जिनमें से 40% EOL (एंड-ऑफ-लाइफ) हैं।

इस फैसले से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 30% वाहन EV बनाने का है, और यह प्रतिबंध उस दिशा में एक प्रोत्साहन है। हालांकि, कोर्ट ने BS-IV वाहनों को सुरक्षा देकर संतुलन बनाया है, ताकि आर्थिक बोझ न बढ़े।

पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव: सकारात्मक बदलाव की उम्मीद

यह फैसला पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, BS-III वाहनों को हटाने से Delhi NCR में PM2.5 स्तर में 15-20% की कमी आ सकती है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि EOL वाहन प्रदूषण का 25% योगदान देते हैं। इससे सांस संबंधी बीमारियां, जैसे अस्थमा और COPD, में कमी आएगी। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है।

लेकिन चुनौतियां भी हैं। सर्दियों में पराली जलाने और निर्माण कार्यों से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए केवल वाहन प्रतिबंध पर्याप्त नहीं। CAQM ने कोर्ट को सुझाव दिया कि इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जाए, जो वर्तमान में केवल 2,000 हैं। लंबे समय में, यह फैसला राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को मजबूत करेगा, जिसका लक्ष्य 2024 तक AQI को 20% कम करना था, लेकिन अभी हम पीछे हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: लाखों प्रभावित, लेकिन अवसर भी

यह प्रतिबंध आर्थिक रूप से वाहन मालिकों पर बोझ डालेगा। दिल्ली में औसत BS-III कार का मालिक अब नई BS-VI कार खरीदने को मजबूर होगा, जिसकी कीमत 5-10 लाख रुपये है। ऑटो इंडस्ट्री के लिए यह बूम है—मारुति, हुंडई और टाटा जैसी कंपनियां बिक्री में 10-15% वृद्धि की उम्मीद कर रही हैं। CNBC TV18 के अनुसार, स्क्रैपिंग उद्योग को 5,000 करोड़ रुपये का बाजार मिलेगा।

सामाजिक रूप से, निम्न और मध्यम वर्ग प्रभावित होगा। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने विरोध जताया है, क्योंकि टैक्सी और ऑटो वाले पुराने वाहनों पर निर्भर हैं। कोर्ट ने सरकार को वैकल्पिक परिवहन, जैसे मेट्रो विस्तार, पर फोकस करने को कहा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि 5 लाख से अधिक रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।

महिलाओं और विकलांगों के लिए यह और कठिन है, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन की कमी है। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि EV सब्सिडी (FAME-II योजना) से सस्ते विकल्प मिलेंगे।

विशेषज्ञों की राय: संतुलित लेकिन सख्त कदम

पर्यावरणविद् अनिल गुप्ता कहते हैं, “यह फैसला देर आया, लेकिन सही है। BS-III वाहन 21वीं सदी के लिए नहीं हैं।” वहीं, ऑटो विशेषज्ञ आर.एस. सिन्हा का मानना है कि सरकार को स्क्रैपिंग के बदले 20% छूट देनी चाहिए। मोटरबीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह EOL वाहनों के लिए अंतिम चेतावनी है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट ने प्रदूषण को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) से जोड़ा है, जो भविष्य के मामलों के लिए मिसाल बनेगा। इंडिया टुडे के अनुसार, यह फैसला अन्य शहरों, जैसे मुंबई और कोलकाता, के लिए भी मार्गदर्शक होगा।

भविष्य की राह: सुधार और चुनौतियां

भविष्य में, सरकार को BS-VI और EV पर फोकस बढ़ाना होगा। दिल्ली में 2026 तक 10,000 EV चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य है। लेकिन प्रवर्तन की कमी एक समस्या है—पिछले प्रतिबंधों में केवल 30% अमल हुआ। कोर्ट ने CAQM को मासिक रिपोर्ट देने को कहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यह फैसला चीन और यूरोप की EV नीतियों से प्रेरित लगता है। यदि सही अमल हो, तो 2026 तक दिल्ली का AQI 200 से नीचे आ सकता है।

निष्कर्ष: स्वच्छ हवा की ओर एक कदम

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रदूषण के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। BS-III और पुराने वाहनों पर प्रतिबंध बहाल करना न केवल पर्यावरण बचाएगा, बल्कि स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। लेकिन सफलता अमल पर निर्भर है। नागरिकों को EV अपनाने और सरकार को बुनियादी ढांचे पर काम करने की जरूरत है। दिल्ली की हवा साफ हो, इसके लिए सभी को एकजुट होना होगा। यह संकट अवसर भी है—एक स्वच्छ, हरा-भरा भविष्य बनाने का।

By SHAHID

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