17 दिसंबर 2025: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में डिजिटल हेल्थ सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जोगबनी बाजार में Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM) के तहत 15 से अधिक दवा व्यवसायियों ने अपनी दुकानों का रजिस्ट्रेशन कराया। यह अभियान न केवल स्थानीय फार्मासिस्टों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है, बल्कि ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस रजिस्ट्रेशन कैंप में दवा व्यापारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो बिहार को डिजिटल हेल्थ लीडर बनाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है।
यह आयोजन जोगबनी के व्यस्त बाजार क्षेत्र में एक सामुदायिक हॉल में सुबह 10 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चला। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाया गया था—व्यवसायियों को मात्र आधार कार्ड, दुकान का लाइसेंस और मोबाइल नंबर के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर कराया गया। कुल 18 दवा दुकानदारों ने भाग लिया, जिनमें से 15 ने सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन पूरा किया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कैंप ABDM के ड्रग रजिस्ट्री पोर्टल से जुड़ा था, जहां फार्मेसी दुकानों को राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में शामिल किया जा रहा है। इससे दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक मैनेजमेंट और मरीजों के लिए डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन की सुविधा बढ़ेगी।
अररिया जिले के सिविल सर्जन डॉ. रामेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक क्रांतिकारी कदम है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल युग में ले जा रहा है। जोगबनी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां नेपाली और भारतीय व्यापारियों का मेलजोल है, डिजिटल रजिस्ट्रेशन से दवा की कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा और मरीजों को सस्ती दवाएं मिलेंगी। आज के 15 रजिस्ट्रेशन एक शुरुआत हैं; हमारा लक्ष्य अगले तीन महीनों में जिले की 200 से अधिक फार्मेसियों को कवर करना है।” उनके इस बयान पर उपस्थित व्यवसायियों ने तालियां बजाईं, जो इस योजना के प्रति उनकी उत्सुकता को दर्शाता है।
Ayushman Bharat Digital Mission: एक झलक
Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM) को सितंबर 2021 में लॉन्च किया गया था, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने का लक्ष्य रखता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम (NDHE) विकसित करना है, जहां मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को सुरक्षित और सुलभ तरीके से स्टोर किया जा सके। योजना के तहत चार मुख्य कंपोनेंट्स हैं: ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR), हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (HPR) और ड्रग रजिस्ट्री। जोगबनी कैंप विशेष रूप से ड्रग रजिस्ट्री पर केंद्रित था, जो दवाओं की जानकारी को एक केंद्रीकृत डेटाबेस में जोड़ता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के अनुसार, फरवरी 2025 तक देशभर में 73 करोड़ से अधिक ABHA बन चुके हैं, 3.6 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं रजिस्टर्ड हैं और 5.6 लाख हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स जुड़े हैं। बिहार इस मामले में अग्रणी है—जून 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 15 हजार से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और 35 हजार प्रोफेशनल्स रजिस्टर्ड हैं। अररिया जैसे जिले, जो कोसी-सीमांचल क्षेत्र में आते हैं, जहां बाढ़ और गरीबी जैसी चुनौतियां हैं, ABDM से विशेष लाभान्वित होंगे। डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन से मरीजों को फर्जी दवाओं से बचाव होगा, और ‘स्कैन एंड पे’ सुविधा से भुगतान आसान बनेगा।
कैंप में भाग लेने वाले एक प्रमुख दवा व्यापारी, मोहम्मद सलीम (नाम परिवर्तित), ने अपनी अनुभूति साझा की: “मेरी दुकान जोगबनी बाजार में 20 साल पुरानी है। पहले दवाओं का स्टॉक ट्रैक करना मुश्किल था, खासकर सीमा पर नेपाली ग्राहकों के लिए। ABDM रजिस्ट्रेशन से अब हम डिजिटल कैटलॉग बना सकेंगे, और मरीजों को QR कोड से दवा की पूरी जानकारी मिलेगी। सरकार का यह प्रयास स्वागतयोग्य है।” सलीम जैसे कई व्यापारियों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया मात्र 15-20 मिनट की थी, जिसमें आधार से लिंकिंग और दुकान का जीयो-टैगिंग शामिल था। स्वास्थ्य विभाग ने सभी को सर्टिफिकेट और ट्रेनिंग मैनुअल प्रदान किया, जिसमें ABDM ऐप का इस्तेमाल सिखाया गया।
स्थानीय प्रभाव: सीमांचल की चुनौतियां और समाधान
अररिया जिला, जो नेपाल सीमा से सटा हुआ है, स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में पिछड़ा रहा है। यहां प्रति हजार लोगों पर मात्र 0.5 डॉक्टर उपलब्ध हैं, और दवा की किल्लत आम समस्या है। ABDM का रजिस्ट्रेशन अभियान इन कमियों को दूर करने का प्रयास है। जोगबनी, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र है, में दवा बाजार करोड़ों का है, लेकिन असंगठित। रजिस्ट्रेशन से फार्मेसियां डिजिटल इनवॉइसिंग और इन्वेंटरी मैनेजमेंट कर सकेंगी, जिससे सरकारी सब्सिडी वाली दवाओं का वितरण पारदर्शी बनेगा।
स्थानीय विधायक रीना सिंह ने कैंप का दौरा किया और कहा, “यह योजना ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गों के लिए वरदान है। अब वे मोबाइल से ही दवा की उपलब्धता चेक कर सकेंगी। अररिया में हम अगले कैंप फारबिसगंज और नरपतगंज में आयोजित करेंगे।” प्रशासन की ओर से एक सर्वे भी किया गया, जिसमें 80% व्यवसायियों ने रजिस्ट्रेशन को ‘बहुत उपयोगी’ बताया। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने आईं—इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी और डिजिटल साक्षरता। इसके लिए विभाग ने फॉलो-अप ट्रेनिंग सेशन की घोषणा की।
बिहार सरकार ने ABDM को अपनी ‘डिजिटल बिहार’ पहल से जोड़ा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक में निर्देश दिए थे कि सभी जिलों में 2026 तक 90% फार्मेसियां रजिस्टर्ड हों। अररिया में अब तक 50 से अधिक दवा दुकानें जुड़ चुकी हैं, और जोगबनी कैंप ने इस संख्या को बढ़ावा दिया। राष्ट्रीय स्तर पर, यह योजना कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन की आवश्यकता से प्रेरित है, जहां टेलीमेडिसिन और ई-प्रिस्क्रिप्शन ने लाखों जिंदगियां बचाईं।
भविष्य की संभावनाएं: डिजिटल हेल्थ का विस्तार
ABDM के तहत रजिस्ट्रेशन से दवा व्यवसायियों को कई लाभ मिलेंगे। सबसे बड़ा—डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम (DHIS), जहां रजिस्टर्ड फार्मेसियों को प्रति ट्रांजेक्शन इंसेंटिव मिलेगा। इसके अलावा, ABHA से जुड़कर मरीजों के रिकॉर्ड्स को लिंक किया जा सकेगा, जिससे एलर्जी या पिछली दवाओं की जानकारी डॉक्टर को मिलेगी। जोगबनी जैसे क्षेत्रों में, जहां सीमा पार स्वास्थ्य पर्यटन होता है, यह अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ABDM से भारत का स्वास्थ्य व्यय 10-15% कम हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसकी सराहना की है, इसे ‘डिजिटल पब्लिक गुड’ करार देते हुए। अररिया में, जहां मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां आम हैं, ड्रग रजिस्ट्री से दवाओं की ट्रैकिंग आसान होगी। कैंप के बाद, आयोजकों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जहां व्यवसायी अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगे।
समारोह का समापन स्वास्थ्य मंत्री की वीडियो संदेश से हुआ, जिसमें उन्होंने बधाई दी और बिहार को ‘डिजिटल हेल्थ हब’ बनाने का संकल्प दोहराया। उपस्थितों में स्थानीय चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी थे, जिन्होंने वित्तीय सहायता का वादा किया। यह कैंप न केवल रजिस्ट्रेशन का माध्यम बना, बल्कि जागरूकता अभियान भी—पोस्टर, ब्रोशर और लाइव डेमो से सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
निष्कर्ष: एक नई शुरुआत
जोगबनी में 15 से अधिक दवा व्यवसायियों का ABDM रजिस्ट्रेशन अररिया के लिए डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा की नई शुरुआत है। यह योजना गरीबों को सशक्त बनाएगी, दवा व्यापार को संगठित करेगी और सीमांचल को स्वास्थ्य मानचित्र पर मजबूत करेगी। सरकार, प्रशासन और व्यवसायियों के सहयोग से ही यह संभव होगा। आने वाले दिनों में ऐसे और कैंप हों, ताकि हर दवा दुकान डिजिटल हो जाए। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सुधार का, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक है। बधाई हो, अररिया!