17 दिसंबर 2025: BSE Sensex 120.21 अंक (0.14%) की गिरावट के साथ 84,559.65 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 41.55 अंक (0.16%) नीचे 25,818.55 के स्तर पर आ गया। मीडिया और रियल्टी सेक्टरों की कमजोरी ने बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जहां निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.29% और निफ्टी मीडिया 0.5% से अधिक लुढ़का। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं ने निवेशकों के मनोबल को तोड़ा। हालांकि, कुछ उपभोक्ता और बैंकिंग स्टॉक्स ने मामूली सहारा दिया।
यह गिरावट साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है, जहां निफ्टी 25,900 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी व्यापार नीतियों पर अनिश्चितता और घरेलू आर्थिक संकेतक बाजार को दबाव में रखेंगे। इस रिपोर्ट में हम बाजार के प्रदर्शन, सेक्टर-वार विश्लेषण, वैश्विक प्रभाव, विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह जानकारी निवेशकों के लिए उपयोगी साबित होगी, जो बाजार की चाल को समझने और रणनीति बनाने में मदद करेगी।
बाजार का समग्र प्रदर्शन: लगातार तीसरी गिरावट
सोमवार, मंगलवार और बुधवार को गिरने का सिलसिला जारी रहा। सेंसेक्स का इंट्राडे निचला स्तर 84,415.98 के आसपास रहा, जबकि निफ्टी 25,800 के करीब छुआ। कुल मिलाकर, बाजार पूंजीकरण 4.66 लाख करोड़ रुपये घटकर 463.18 लाख करोड़ पर आ गया। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.54% और 0.73% नीचे बंद हुए, जो बड़े कैप स्टॉक्स की तुलना में ज्यादा दबाव दर्शाता है।
टॉप गेनर्स में टाइटन (0.5% ऊपर), भारती एयरटेल (0.3%) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (0.2%) शामिल रहे, जो टेलीकॉम और ऑटो सेक्टर की मामूली मजबूती को दिखाते हैं। वहीं, ट्रेंट (1.61% नीचे), एचडीएफसी बैंक (1%), आईसीआईसीआई बैंक (0.8%), अदानी पोर्ट्स (0.7%), बजाज फिनसर्व (0.6%), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (0.5%) और एशियन पेंट्स (0.4%) प्रमुख ड्रैग्स बने। FII ने 2,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,800 करोड़ का समर्थन दिया। रुपये का मूल्य 84.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो आयात-निर्भर सेक्टरों को नुकसान पहुंचा रहा है।
निफ्टी बैंक इंडेक्स 0.18% नीचे रहा, जबकि निफ्टी आईटी 0.1% लुढ़का। इसके विपरीत, निफ्टी एफएमसीजी 0.04% ऊपर रहा, जो उपभोक्ता मांग की स्थिरता को इंगित करता है। कुल 2,000 से अधिक स्टॉक्स में गिरावट आई, जबकि केवल 900 में तेजी। यह बाजार की चौड़ी कमजोरी को दर्शाता है। इंडिया VIX 9.85 पर सेटल हुआ, जो नियंत्रित अस्थिरता का संकेत देता है।
सेक्टर-वार विश्लेषण: मीडिया और रियल्टी का दबाव
मीडिया सेक्टर ने बाजार को सबसे ज्यादा खींचा, जहां निफ्टी मीडिया इंडेक्स 0.5% से अधिक नीचे बंद हुआ। प्रमुख स्टॉक्स जैसे नेटवर्क 18 (4% गिरावट) और टीवी टुडे (3.2%) ने सेक्टर को नीचे धकेला। विज्ञापन राजस्व में कमी और डिजिटल शिफ्ट की चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क किया। पीवीआर इनॉक्स जैसे स्टॉक्स 1.73% नीचे रहे, जो मूवी थिएटर्स में फुटफॉल्स की कमी को दर्शाता है।
रियल्टी सेक्टर में 1.29% की गिरावट आई, जहां डीएलएफ (2.1% नीचे) और गोदरेज प्रॉपर्टीज (1.8%) प्रमुख लूजर्स रहे। उच्च ब्याज दरें और मांग में सुस्ती ने रियल एस्टेट को प्रभावित किया, हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में प्रोत्साहन से राहत मिल सकती है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी 0.7% नीचे रहा, जहां एसी और फ्रिज डिमांड में कमी का असर दिखा।
मेटल्स सेक्टर 0.8% नीचे रहा, जहां टाटा स्टील (1.5%) और जेएसडब्ल्यू स्टील (1.2%) ड्रैग बने। वैश्विक कमोडिटी कीमतों में गिरावट और चीन की आर्थिक चिंताओं ने इसका कारण बताया जा रहा है। आईटी सेक्टर में भी 0.1% की कमजोरी दिखी, हालांकि टीसीएस और इंफोसिस ने मामूली तेजी दिखाई। दूसरी ओर, पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.5% ऊपर रहा, जहां एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा ने चमक दिखाई। एफएमसीजी में हिंदुस्तान यूनिलीवर (0.5% ऊपर) ने स्थिरता प्रदान की। कुल मिलाकर, 11 में से 8 सेक्टर लाल निशान पर रहे।
वैश्विक संकेत: अमेरिका और एशिया का मिश्रित असर
वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया। अमेरिकी डाउ जोन्स 0.2% नीचे बंद हुआ, जबकि नैस्डैक 0.1% ऊपर रहा। यूएस ट्रेड डील पर अनिश्चितता और फेड की दर कटौती की उम्मीदों ने निवेशकों को सतर्क किया। एशियाई बाजारों में टोक्यो का निक्केई 0.5% नीचे रहा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.2% ऊपर। तेल कीमतों में 0.5% की गिरावट (ब्रेंट 72 डॉलर प्रति बैरल) ने एनर्जी स्टॉक्स को नुकसान पहुंचाया।
भारतीय रुपये की 0.3% की कमजोरी ने FII आउटफ्लो को बढ़ावा दिया, जो नवंबर से 15,000 करोड़ से अधिक का है। विशेषज्ञों का कहना है कि RBI के हस्तक्षेप से स्थिरता आएगी, लेकिन वैश्विक ट्रेड टेंशन बाजार को दबाए रखेंगे। यूएस जॉब्स डेटा की सुस्ती ने भी सेंटीमेंट को प्रभावित किया।
विशेषज्ञों की राय: सतर्कता और अवसर
रिलिगेयर ब्रोकिंग के प्रमुख अजित मिश्रा ने कहा, “बाजार साप्ताहिक एक्सपायरी पर संकीर्ण रेंज में रहा और वैश्विक-घरेलू संकेतों से 0.16% नीचे बंद हुआ। रियल्टी, मीडिया और फाइनेंशियल्स प्रमुख लूजर्स रहे।” जियोर्जिट इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर ने जोड़ा, “रुपये की कमजोरी और FII बिकवाली ने बाजार को दबाया, लेकिन उपभोक्ता स्टॉक्स ने सहारा दिया। स्मॉलकैप्स और मिडकैप्स में ज्यादा दबाव।”
कुछ विशेषज्ञों ने खरीदारी के अवसर सुझाए। आनंद राठी ने सीजी पावर, मरिना और ब्रिटानिया जैसे स्टॉक्स पर सिफारिश की, जो गिरावट में वैल्यू बायिंग के लिए उपयुक्त हैं। आईएमएफ की गीता गोपीनाथ ने भारत की जीडीपी ग्रोथ 7% के करीब रहने का अनुमान लगाया, जो लॉन्ग-टर्म निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।
भविष्य की दिशा: रिबाउंड की उम्मीद?
बाजार 25,800-26,000 के बीच रेंज में रह सकता है। फेड मीटिंग (18 दिसंबर) और भारतीय बजट (फरवरी 2026) महत्वपूर्ण ट्रिगर्स होंगे। अगर FII फ्लो सुधरता है, तो निफ्टी 26,000 की ओर बढ़ सकता है। लेकिन ट्रेड वार्ताओं पर नजर रखें। निवेशकों को डाइवर्सिफिकेशन और स्टॉप-लॉस पर फोकस करना चाहिए। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी का सपोर्ट 25,700 पर है, जबकि रेजिस्टेंस 25,950 पर।
निष्कर्ष: सतर्क निवेश की बारी
यह गिरावट बाजार की अस्थिरता को उजागर करती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म आउटलुक सकारात्मक है। मीडिया और रियल्टी की कमजोरी अल्पकालिक लगती है, जबकि बैंकिंग और आईटी में सुधार संभव। निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर रखें और अवसरों का फायदा उठाएं। बाजार कभी रुकता नहीं—सही रणनीति से लाभ संभव है।