17 दिसंबर 2025, FSSAI: भारत, दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश होने के बावजूद, दूध और दूध उत्पादों में मिलावट की समस्या से जूझ रहा है। 16 दिसंबर 2025 को खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दूध, पनीर और खोया जैसे दूध उत्पादों में मिलावट एवं गलत ब्रांडिंग के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने का निर्देश जारी किया। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 16(5) के तहत जारी किया गया, जो हाल के वर्षों में बढ़ती मिलावट की घटनाओं और उपभोक्ता स्वास्थ्य जोखिमों पर आधारित है।
FSSAI के अनुसार, अनाधिकृत और अवैध इकाइयों से उत्पादित मिलावटी दूध उत्पाद बाजार में व्यापक रूप से उपलब्ध हैं, जो यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक दूध और अन्य हानिकारक पदार्थों से युक्त होते हैं। यह अभियान न केवल उत्पादन, भंडारण और बिक्री चक्र पर नजर रखेगा, बल्कि उल्लंघनकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई जैसे जब्ती, लाइसेंस रद्द और इकाइयों का बंद होना सुनिश्चित करेगा। यह रिपोर्ट इस आदेश के विवरण, पृष्ठभूमि, कार्यान्वयन योजना, प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेगी। आपकी वेबसाइट के पाठकों के लिए यह रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में सहायक सिद्ध होगी। स्रोतों में टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यू इंडियन एक्सप्रेस और CNBC-TV18 जैसे विश्वसनीय माध्यम शामिल हैं।
आदेश का विवरण
FSSAI ने 16 दिसंबर को जारी सलाह में सभी राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अभियान का मुख्य फोकस दूध, पनीर, खोया और अन्य दूध उत्पादों पर है, जहां हाल के खुफिया इनपुट्स और जांचों से मिलावट के व्यापक मामलों का पता चला है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान “विशेष प्रवर्तन अभियान” के रूप में जाना जाएगा, जिसमें लाइसेंस प्राप्त और अनाधिकृत डेयरी इकाइयों का गहन निरीक्षण शामिल है।
राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उत्पादन इकाइयों, भंडारण गोदामों और खुदरा बिक्री केंद्रों पर छापेमारी करें, प्रवर्तन सैंपल लें, फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBO) के पंजीकरण की जांच करें और मिलावट के स्रोतों का पता लगाएं। CNBC-TV18 के अनुसार, उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है, जिसमें असुरक्षित खाद्य सामग्री की जब्ती, अवैध इकाइयों का बंद होना, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण, उत्पादों की वापसी और विनाश शामिल है। यह अभियान तत्काल प्रभाव से शुरू हो गया है, और FSSAI क्षेत्रीय कार्यालयों को समन्वय का जिम्मा सौंपा गया है।
यूएनआई इंडिया की रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह कदम हाल की घटनाओं के बाद उठाया गया, जहां दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में मिलावटी पनीर और खोया जब्त किए गए थे। अभियान की अवधि निर्दिष्ट नहीं की गई, लेकिन यह निरंतर निगरानी पर आधारित होगा।
मिलावट की समस्या और पृष्ठभूमि
भारत में दूध उत्पादन 2025 में 22 करोड़ टन से अधिक होने का अनुमान है, लेकिन मिलावट इसकी गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। FSSAI के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 40% से अधिक दूध सैंपल मिलावटी पाए गए, जिनमें यूरिया, अमोनियम सल्फेट, स्टार्च और सिंथेटिक वसा प्रमुख हैं। पनीर में स्किम्ड मिल्क पाउडर और खोया में वनस्पति तेल की मिलावट आम है, जो किडनी फेलियर, पाचन विकार और कैंसर जैसी बीमारियां पैदा कर सकती है।
ट्रिब्यून इंडिया के अनुसार, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के हाल के निर्देशों से प्रेरित है, जहां अदालत ने मिलावटी दूध की बिक्री रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आदेश दिया था। 2024 में दिल्ली में एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ, जहां 10 टन मिलावटी खोया जब्त किया गया। न्यूजग्राम की रिपोर्ट में कहा गया कि अवैध इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में फल-फूल रही हैं, जहां निगरानी कमजोर है।
मिलावट के कारण मुख्यतः लाभ कमाने की लालच है। शुद्ध दूध की तुलना में मिलावटी उत्पाद 30-50% सस्ते होते हैं, जो छोटे व्यापारियों को आकर्षित करते हैं। महामारी के बाद आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने समस्या को बढ़ाया। FSSAI का यह अभियान इन कमजोरियों को दूर करने का प्रयास है।
कार्यान्वयन योजना
अभियान की योजना बहुस्तरीय है। राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी (SFA) को निर्देश हैं कि वे डेयरी सप्लाई चेन के हर स्तर पर निरीक्षण करें। कर्ली टेल्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सैंपलिंग लैब टेस्टिंग, FBO रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन और ट्रेसिबिलिटी शामिल है। FSSAI ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो हॉटलाइन और ऐप के माध्यम से शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करेंगी।
सोशल मीडिया पर फेसबुक पोस्ट्स में उल्लेख है कि उपभोक्ता FSSAI ऐप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा गया कि यह अभियान परिवार स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है। राज्यों को साप्ताहिक रिपोर्ट सबमिट करने का आदेश दिया गया, ताकि प्रगति ट्रैक की जा सके। यह योजना डिजिटल टूल्स पर आधारित है, जैसे GIS मैपिंग अवैध इकाइयों के लिए।
प्रभाव और चुनौतियां
यह अभियान उपभोक्ता स्वास्थ्य को मजबूत बनाएगा। मिलावट से सालाना 50,000 से अधिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, जो अब कम होंगी। आर्थिक रूप से, शुद्ध डेयरी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जो 10 लाख करोड़ रुपये का बाजार है। हालांकि, छोटे उत्पादकों पर असर पड़ेगा, जो अनजाने में उल्लंघन कर सकते हैं।
चुनौतियां ग्रामीण निगरानी और भ्रष्टाचार हैं। फेसबुक पोस्ट में नावाकाडल ने कहा कि राज्यों को सक्रिय रहना होगा। लंबे समय में, यह FSSAI को मजबूत बनाएगा, लेकिन जागरूकता अभियान जरूरी।
प्रतिक्रियाएं
उद्योग संगठनों ने स्वागत किया। इंडियन डेयरी एसोसिएशन ने कहा कि यह सकारात्मक है। उपभोक्ता संगठनों ने मांग की कि अभियान सतत हो। राजनीतिक स्तर पर, कोई बड़ा विवाद नहीं, लेकिन विपक्ष ने निगरानी पर सवाल उठाए।
भविष्य की संभावनाएं
भविष्य में, FSSAI AI-आधारित निगरानी और ब्लॉकचेन ट्रेसिबिलिटी अपनाएगा। यह अभियान अन्य खाद्य क्षेत्रों में विस्तारित हो सकता है। उपभोक्ताओं को लेबल चेक करने की सलाह दी जाती है।