Assam crubs student absenteeismAssam crubs student absenteeism

16 दिसंबर 2025, Assam crubs student absenteeism: शिक्षा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उपयोग अब एक आवश्यकता बन चुका है, और असम सरकार ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने 15 दिसंबर को एक ऑटोमेटेड SMS-आधारित अनुपस्थिति अलर्ट सिस्टम लॉन्च किया, जो सरकारी स्कूलों में छात्रों की लगातार अनुपस्थिति को कम करने और ड्रॉपआउट दर को रोकने का लक्ष्य रखता है। शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू द्वारा उद्घाटित यह सिस्टम, शिक्षा सेतु (Shiksha Setu) ऐप के साथ एकीकृत है, जो माता-पिता और शिक्षकों को तत्काल सूचना प्रदान करेगा। UNICEF की एक हालिया अध्ययन से प्रेरित यह पहल, परिवारिक मुद्दों, अभिभावकों की जागरूकता की कमी और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों जैसी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास है। इस रिपोर्ट में हम इस सिस्टम की पृष्ठभूमि, कार्यप्रणाली, लाभों और संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो असम की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

असम जैसे विविधतापूर्ण राज्य में शिक्षा की चुनौतियां हमेशा से जटिल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां अधिकांश सरकारी स्कूल स्थित हैं, छात्रों की अनुपस्थिति एक गंभीर समस्या बनी हुई है। UNICEF के अध्ययन के अनुसार, छात्रों की अनुपस्थिति के प्रमुख कारणों में परिवारिक दायित्वें, जैसे घरेलू कामकाज या आर्थिक मजबूरियां, शामिल हैं। इसके अलावा, अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल अनुपस्थिति की गंभीरता का अहसास नहीं होता, जो लंबे समय में ड्रॉपआउट की ओर ले जाती है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में औसत अनुपस्थिति दर 20-25% तक रही है, खासकर मानसून और त्योहारों के मौसम में। यह समस्या न केवल शैक्षणिक स्तर को प्रभावित करती है, बल्कि समग्र सामाजिक विकास को भी बाधित करती है। शिक्षा विभाग ने लंबे समय से इस मुद्दे पर नजर रखी है, और शिक्षा सेतु ऐप के माध्यम से उपस्थिति ट्रैकिंग को पहले ही मजबूत किया गया था। यह ऐप, समग्र शिक्षा असम (Samagra Shiksha Assam) के तहत विकसित, स्कूल रिकॉर्ड्स, शैक्षणिक और प्रशासनिक डेटा को डिजिटल रूप से प्रबंधित करता है। इससे डुप्लिकेट और ‘घोस्ट’ छात्रों की पहचान कर हटाने में सफलता मिली है, जिससे डेटाबेस अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय हो गया। लेकिन उपस्थिति की निगरानी के बावजूद, लंबी अनुपस्थिति पर तत्काल हस्तक्षेप की कमी बनी रही। इसी कमी को पूरा करने के लिए SMS अलर्ट सिस्टम की कल्पना की गई, जो प्रौद्योगिकी को अभिभावकों की पहुंच के साथ जोड़ता है।

यह सिस्टम अपनी सरलता और प्रभावशीलता के लिए सराहनीय है। शिक्षा सेतु ऐप के माध्यम से दैनिक उपस्थिति दर्ज की जाती है, और यदि कोई छात्र पांच लगातार दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो स्वचालित रूप से SMS अलर्ट भेजा जाता है। अलर्ट का पहला संदेश पांचवें दिन जाता है, उसके बाद दसवें, पंद्रहवें दिन और उसके बाद हर पांचवें दिन तक जारी रहता है, जब तक छात्र स्कूल वापस न लौट आए। यह सिस्टम माता-पिता और कक्षा शिक्षक दोनों को एक साथ सूचित करता है। शिक्षकों को प्राप्त संदेश में छात्र का नाम, कक्षा और सेक्शन का उल्लेख होता है, जिससे वे तुरंत अभिभावकों से संपर्क कर सकें। वहीं, अभिभावकों को संक्षिप्त और स्पष्ट संदेश मिलता है, जो अनुपस्थिति की निरंतरता पर जोर देता है और स्कूल लौटने की अपील करता है। असम की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए, संदेश पांच आधिकारिक भाषाओं—असमिया, बंगाली, बोदो, हिंदी और अंग्रेजी—में उपलब्ध हैं। प्रत्येक जिले में कम से कम दो स्थानीय भाषाओं का चयन क्षेत्रीय और जनसांख्यिकीय कारकों के आधार पर किया गया है, ताकि संदेश अधिक समझने योग्य और प्रभावी हों। उदाहरण के लिए, गुवाहाटी जैसे शहरी क्षेत्रों में हिंदी-अंग्रेजी का मिश्रण हो सकता है, जबकि बॉर्डर जिलों में बंगाली प्राथमिकता। यह सिस्टम पूर्णतः स्वचालित है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता न्यूनतम रहती है, और यह सभी सरकारी स्कूलों में एकसमान रूप से लागू होगा।

लॉन्च समारोह समग्र शिक्षा असम कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू ने कहा, “अभिभावकों और शिक्षकों के साथ तत्काल संचार अनुपस्थिति को संबोधित करने, शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने और छात्रों को स्कूल छोड़ने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” विभाग के अधिकारियों ने इसे “छात्र उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम” बताया, जो ड्रॉपआउट जोखिम को कम करने के लिए समयबद्ध हस्तक्षेप सक्षम बनाएगा। कार्यान्वयन के लिए, सभी स्कूलों को शिक्षा सेतु ऐप पर मोबाइल नंबरों को अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। प्रारंभिक चरण में, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ जिलों में परीक्षण किया जाएगा, और फिर पूरे राज्य में विस्तार होगा। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस सिस्टम से प्रति वर्ष हजारों छात्रों को स्कूल से जोड़े रखा जा सकेगा।

इस सिस्टम के लाभ अनेक हैं। सबसे बड़ा फायदा है संचार की मजबूती: पारंपरिक रूप से, अनुपस्थिति की सूचना देरी से पहुंचती थी, लेकिन अब यह तुरंत और स्वचालित हो जाएगी। इससे अभिभावक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे, जैसे परिवारिक परिस्थितियों को संभालना या परिवहन व्यवस्था करना। दूसरा, ड्रॉपआउट दर में कमी: लंबी अनुपस्थिति अक्सर पूर्ण छोड़ने का कारण बनती है, लेकिन नियमित अलर्ट से समय पर हस्तक्षेप संभव होगा। तीसरा, डेटा-आधारित शासन: शिक्षा सेतु ऐप से प्राप्त डेटा विश्लेषण से नीतियां अधिक प्रभावी होंगी। उदाहरणस्वरूप, यदि किसी क्षेत्र में अनुपस्थिति अधिक हो, तो स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग या सहायता कार्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इसके अलावा, यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है, जो डिजिटल टूल्स के माध्यम से समावेशी शिक्षा पर जोर देती है। असम जैसे पूर्वोत्तर राज्य में, जहां इंटरनेट पहुंच सीमित है, SMS का उपयोग व्यावहारिक और समावेशी है, क्योंकि अधिकांश अभिभावकों के पास मोबाइल फोन हैं।

हालांकि, चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कवरेज की समस्या हो सकती है, या गलत मोबाइल नंबरों से अलर्ट फेल हो सकते हैं। इसके अलावा, सांस्कृतिक रूप से, कुछ परिवारों में शिक्षा को प्राथमिकता न देना एक बाधा रहेगा। विभाग ने इनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान की योजना बनाई है। अन्य राज्यों से तुलना करें, तो केरल और तमिलनाडु में समान ऐप-आधारित सिस्टम सफल रहे हैं, जहां अनुपस्थिति 15% तक घटी। असम में भी, यदि सही ढंग से लागू हो, तो समान परिणाम अपेक्षित हैं।

निष्कर्षतः असम सरकार का यह SMS अलर्ट सिस्टम शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह न केवल अनुपस्थिति को कम करेगा, बल्कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाएगा। यदि राज्य स्तर पर इसकी सफलता मिली, तो यह अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है। सरकार, अभिभावकों और शिक्षकों के संयुक्त प्रयास से असम की शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू सकेगी। यह पहल साबित करती है कि छोटे-छोटे तकनीकी कदम बड़े सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं।

By SHAHID

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *