ISRO's 7 Launch PlanISRO's 7 Launch Plan

16 दिसंबर 2025, ISRO’s 7 Launch Plan– भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर दुनिया को अपनी क्षमता से चकित कर दिया है। अगले चार महीनों में सात महत्वपूर्ण लॉन्च मिशनों की योजना ने न केवल भारत की अंतरिक्ष यात्रा को गति दी है, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ के पहले अनमैन्ड मिशन को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यह घोषणा इसरो प्रमुख एस सोमनाथ द्वारा की गई, जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इन मिशनों में उपग्रह प्रौद्योगिकी, क्वांटम संचार और मानव रेटेड रॉकेट टेस्ट शामिल हैं, जो न केवल वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देंगे, बल्कि रक्षा, कृषि और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी योगदान देंगे। यह रिपोर्ट इसरो के इन सात लॉन्चों, गगनयान की तैयारी और इसके व्यापक प्रभावों पर विस्तृत नजर डालती है।

इसरो की यात्रा हमेशा से ही सीमित संसाधनों में असीमित उपलब्धियां हासिल करने की मिसाल रही है। चंद्रयान-3 की सफलता और आदित्य-एल1 के सूर्य मिशन के बाद, संगठन अब मानव अंतरिक्ष उड़ान पर फोकस कर रहा है। 2025 के अंत तक इसरो ने पहले ही कई सफल लॉन्च कर चुका है, जैसे जीएसएलवी-एफ16/निसार मिशन (जुलाई 2025), जो नासा के साथ साझेदारी में पृथ्वी अवलोकन उपग्रह लॉन्च किया गया। इसी तरह, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03 (नवंबर 2025) ने संचार उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया। लेकिन अब की योजना और भी महत्वाकांक्षी है। सोमनाथ ने कहा, “मार्च 2026 तक सात मिशनों से हम न केवल तकनीकी प्रदर्शन करेंगे, बल्कि गगनयान के अनमैन्ड टेस्ट से मानव उड़ान की नींव मजबूत करेंगे।” ये लॉन्च मुख्य रूप से श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होंगे, जहां मानव रेटेड एलवीएम3 रॉकेट की असेंबली शुरू हो चुकी है।

सात लॉन्च प्लान की रूपरेखा को समझने के लिए, आइए प्रत्येक मिशन पर नजर डालें। पहला मिशन जनवरी 2026 में पीएसएलवी-सी62/ईओएस-10 होगा, जो पृथ्वी अवलोकन श्रृंखला (EOS) का हिस्सा है। यह उपग्रह उच्च रिजॉल्यूशन इमेजिंग के जरिए कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में मदद करेगा। दूसरा, फरवरी में जीएसएलवी-एमक्यू/एनवीएस-03, नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन (NaVIC) सिस्टम को मजबूत करेगा, जो जीपीएस जैसी सटीक स्थिति निर्धारण प्रदान करता है। तीसरा मिशन क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन होगा, जो सुरक्षित संचार के लिए क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करेगा। यह भारत को क्वांटम संचार में अग्रणी बनाएगा, जहां डेटा हैकिंग असंभव हो जाएगी।

चौथा लॉन्च स्वदेशी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का टेस्ट होगा, जो उपग्रहों की कक्षा को लंबे समय तक बनाए रखेगा। पारंपरिक केमिकल प्रोपल्शन की तुलना में यह ईंधन-कुशल है और उपग्रह जीवनकाल को दोगुना कर सकता है। पांचवां मिशन एक अर्थ-ऑब्जर्वेशन क्लस्टर लॉन्च होगा, जिसमें कई छोटे उपग्रह एक साथ कक्षा में जाएंगे, जो जलवायु परिवर्तन मॉनिटरिंग के लिए उपयोगी साबित होंगे। छठा, मार्च में एसपीएडेक्स-2 (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट), जो अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोड़ने की तकनीक सिद्ध करेगा – यह चंद्रयान-4 जैसे भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। अंतिम और सबसे रोमांचक, सातवां मिशन गगनयान-जी1 (G1) अनमैन्ड टेस्ट होगा, जो मानव रेटेड एलवीएम3 रॉकेट से क्रू मॉड्यूल को 400 किमी ऊंची कक्षा में भेजेगा। यह तीन दिनों का मिशन होगा, जिसमें जीवन समर्थन प्रणाली, पैराशूट और री-एंट्री टेस्ट शामिल होंगे।

गगनयान कार्यक्रम इसरो का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत 90,000 करोड़ रुपये से अधिक है। 2018 में घोषित यह योजना भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बनाएगी, जो स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान करेगा। अनमैन्ड मिशन मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसरो ने पहले ही कई माइलस्टोन हासिल कर लिए हैं। इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT) और पैड एबॉर्ट टेस्ट (PAT) सफल रहे हैं। सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम के हॉट टेस्ट पूरे हो चुके हैं। क्रू मॉड्यूल में डबल-वॉल कंस्ट्रक्शन, थर्मल प्रोटेक्शन और लाइफ सपोर्ट सिस्टम विकसित हो चुके हैं। व्योममित्रा – मानवाकार रोबोट – इस मिशन में जीवन समर्थन का परीक्षण करेगा। चार गगनयात्रियों – ग्रुप कैप्टन प्रसांथ बालकृष्णन, ग्रुप कैप्टन अजित कृष्णन, विंग कमांडर अंगद प्रताप और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला – की ट्रेनिंग बेंगलुरु के एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी में चल रही है। इसमें सिमुलेटर, माइक्रो-ग्रेविटी फ्लाइट्स, योग और सर्वाइवल ट्रेनिंग शामिल है। यदि G1 सफल रहा, तो 2026 में दो और अनमैन्ड मिशन (G2 और G3) होंगे, और 2027 में पहला क्रूड मिशन लॉन्च होगा।

ये लॉन्च न केवल वैज्ञानिक हैं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक महत्व के भी हैं। सात मिशनों से 50,000 से अधिक नौकरियां पैदा होंगी, और उपग्रह क्लस्टर से कृषि उत्पादकता में 15% वृद्धि संभव है। क्वांटम और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से भारत वैश्विक बाजार में 20 अरब डॉलर का निर्यात कर सकेगा। रक्षा क्षेत्र में, सेना को तीन अपाचे हेलीकॉप्टर मिलने की खबर भी जुड़ी है, हालांकि यह अलग से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का प्रोजेक्ट है। लेकिन इसरो के लॉन्च से सैन्य उपग्रहों की क्षमता बढ़ेगी। पर्यावरणीय रूप से, निसार जैसे मिशन भूकंप पूर्वानुमान और जंगल कटाई पर नजर रखेंगे।

हालांकि, चुनौतियां कम नहीं हैं। बजट की कमी, तकनीकी जटिलताएं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाएं हैं। गगनयान में क्रू एस्केप सिस्टम की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि कोई भी चूक विनाशकारी हो सकती है। विपक्ष ने संसद में सवाल उठाए कि क्या सरकारी फंडिंग पर्याप्त है, या निजी क्षेत्र (जैसे स्काईरूट) को और शामिल किया जाए। लेकिन इसरो का ट्रैक रिकॉर्ड – 100 से अधिक सफल लॉन्च – आश्वासन देता है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, जैसे नासा के साथ निसार, सहयोग बढ़ाएगी।

भविष्य की दृष्टि से, ये सात लॉन्च भारत को चंद्रयान-4, मंगलयान-2 और स्पेस स्टेशन की ओर ले जाएंगे। 2047 तक 100 गीगावाट अंतरिक्ष क्षमता का लक्ष्य हासिल होगा। सोशल मीडिया पर #ISRO7Launches और #Gaganyaan2026 ट्रेंड कर रहे हैं, जो जनता की उत्सुकता दर्शाते हैं। युवा वैज्ञानिकों के लिए यह प्रेरणा स्रोत है।

निष्कर्षतः इसरो के सात लॉन्च प्लान और गगनयान अनमैन्ड मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। मार्च 2026 तक का यह सफर न केवल तकनीकी जीत होगा, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा। सरकार को फंडिंग बढ़ानी चाहिए, ताकि ‘विकसित भारत’ का सपना अंतरिक्ष से साकार हो। यह समय है कि हम सब मिलकर तारों को छूने का संकल्प लें।

By SHAHID

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