14 दिसंबर 2025: भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, और पिछले हफ्ते Top 10 Valued Company ने कुल मिलाकर ₹79,129.21 करोड़ की मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) खो दी। इनमें से आठ कंपनियों की वैल्यू में गिरावट आई, जबकि केवल दो – रिलायंस इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टूब्रो (L&T) – ने लाभ दर्ज किया। यह गिरावट बाजार की व्यापक कमजोरी का संकेत है, जहां बीएसई सेंसेक्स 444.71 पॉइंट्स (0.51%) गिरकर बंद हुआ। सबसे ज्यादा प्रभावित बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक रही, जिनकी मार्केट कैप में क्रमशः ₹19,289.70 करोड़ और ₹18,516.31 करोड़ की कमी आई। यह घटनाक्रम निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा रहा है, खासकर जब ग्लोबल अनिश्चितताएं जैसे अमेरिकी फेड रेट कट्स और घरेलू इन्फ्लेशन डेटा बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे वैल्यूड कंपनी बनी हुई है, लेकिन समग्र ट्रेंड मिडकैप और बैंकिंग सेक्टर पर दबाव दर्शाता है।
प्रभावित कंपनियों का विस्तृत विश्लेषण
पिछले हफ्ते के ट्रेडिंग सेशन में टॉप 10 कंपनियों की कुल मार्केट कैप में गिरावट का प्रमुख कारण सेक्टर-विशिष्ट दबाव था। बजाज फाइनेंस, जो एनबीएफसी सेक्टर का प्रतिनिधित्व करती है, सबसे बड़ी हारने वाली रही। इसकी मार्केट कैप ₹19,289.70 करोड़ घटकर ₹6,33,106.69 करोड़ रह गई। कारण? कंज्यूमर लोन डिस्बर्सल में धीमापन और आरबीआई की सख्त रेगुलेटरी निगरानी, जो एनबीएफसी स्टॉक्स पर भारी पड़ी। इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक – भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक – ने ₹18,516.31 करोड़ की हानि झेली, जिसकी वैल्यू अब ₹9,76,668.15 करोड़ है। बैंकिंग सेक्टर में लोन ग्रोथ की चिंताएं और एनपीए रिस्क ने इसे प्रभावित किया।
भارتی एयरटेल की मार्केट कैप में ₹13,884.63 करोड़ की कमी आई, जो ₹11,87,948.11 करोड़ पर सेटल हुई। टेलीकॉम सेक्टर में 5जी रोलआउट की लागत और स्पेक्ट्रम नीलामी का बोझ निवेशकों को निराश कर रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने ₹7,846.02 करोड़ खोए, वैल्यू ₹8,88,816.17 करोड़ रह गई। पब्लिक सेक्टर बैंक में डिपॉजिट ग्रोथ की कमी और क्रेडिट डिमांड में सुस्ती प्रमुख कारक हैं। इंफोसिस की वैल्यू ₹7,145.95 करोड़ घटकर ₹6,64,220.58 करोड़ हो गई, जबकि टीसीएस ने ₹6,783.92 करोड़ की हानि के बाद ₹11,65,078.45 करोड़ पर बंद किया। आईटी सेक्टर में अमेरिकी रिसेशन फीयर्स और क्लाउड माइग्रेशन डिले ने दबाव बनाया। एचडीएफसी बैंक की मार्केट कैप ₹4,460.93 करोड़ गिरकर ₹15,38,558.71 करोड़ रही, और एलआईसी ने मामूली ₹1,201.75 करोड़ की कमी के साथ ₹5,48,820.05 करोड़ पर खत्म किया। एलआईसी पर इंश्योरेंस प्रीमियम ग्रोथ की धीमी रफ्तार असर डाल रही है।
दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ₹20,434.03 करोड़ का लाभ जोड़कर अपनी वैल्यू ₹21,05,652.74 करोड़ कर ली। जियो और रिटेल आर्म की मजबूत परफॉर्मेंस ने इसे बुलिश रखा। लार्सन एंड टूब्रो ने ₹4,910.82 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ ₹5,60,370.38 करोड़ पर बंद किया, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से। ये दो कंपनियां ही हफ्ते भर में ग्रीन में रहीं, जो एनर्जी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की रेजिलिएंस दिखाती हैं।
गिरावट के प्रमुख कारण और बाजार ट्रेंड्स
यह गिरावट बाजार की ब्रॉड वीकनेस का प्रतिबिंब है। बीएसई सेंसेक्स ने हफ्ते में 0.51% की गिरावट दर्ज की, जबकि एनएसई निफ्टी भी समान ट्रेंड में रहा। ग्लोबल फैक्टर्स जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की रेट कट एक्सपेक्टेशन्स (25 बेसिस पॉइंट्स) ने इमर्जिंग मार्केट्स पर प्रेशर डाला, क्योंकि FPI आउटफ्लो बढ़ा। घरेलू स्तर पर, WPI इन्फ्लेशन डेटा (नवंबर में 2.6%) और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ (3.1%) ने ग्रोथ कंसर्न्स को हवा दी। बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर पर आरबीआई की MPC मीटिंग (दिसंबर 2025) की आशंकाएं हावी रहीं, जहां रेट कट की उम्मीद कम है।
सेक्टर-वाइज, बैंकिंग इंडेक्स 1.2% गिरा, जबकि आईटी 0.8% नीचे। मिडकैप इंडेक्स ने 1.5% की भारी गिरावट दिखाई, जो टॉप कंपनियों की हानि को रिफ्लेक्ट करता है। एफआईआई ने हफ्ते में ₹12,000 करोड़ का नेट सेलिंग किया, जबकि डीआईआई ने ₹8,500 करोड़ की खरीदारी से बाजार को संभाला। कुल मिलाकर, मार्केट कैप टू जीडीपी रेशियो 120% के ऊपर है, जो हिस्टोरिकल एवरेज (100%) से प्रीमियम दर्शाता है, लेकिन वोलेटाइलिटी इंडेक्स (VIX) 15 पर स्थिर है।
निवेशकों के लिए निहितार्थ और आउटलुक
यह हानि निवेशकों को सतर्क कर रही है। लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स के लिए, रिलायंस और L&T जैसे स्टॉक्स सेफ बेट बने हुए हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को बैंकिंग सेक्टर से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। आनंद राठी शेयर्स के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगले हफ्ते WPI डेटा और US-इंडिया ट्रेड टॉक्स बाजार को डिरेक्ट करेंगे। यदि इन्फ्लेशन कूल रहता है, तो सेंसेक्स 86,000 के ऊपर रिकवर कर सकता है। हालांकि, ग्लोबल रिस्क्स जैसे मिडिल ईस्ट टेंशन्स और चाइना इकोनॉमी स्लोडाउन से सावधानी बरतनी होगी।
कुल टॉप 10 कंपनियों की मार्केट कैप अब ₹1.15 लाख करोड़ के आसपास है, जो पिछले महीने से 5% नीचे है। यह ट्रेंड ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी’ को बढ़ावा देगा, जहां मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियां सर्वाइव करेंगी।
निष्कर्ष
Top 10 Valued Company की ₹79,129 करोड़ की हानि बाजार की अस्थिरता का आईना है, लेकिन यह भी अवसर पैदा करती है। रिलायंस की मजबूती और L&T की ग्रोथ से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, जबकि बैंकिंग और आईटी पर सुधार की उम्मीद है। निवेशक डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर फोकस करें। बाजार हमेशा रिकवर करता है – सही स्ट्रैटेजी से लाभ उठाएं। अधिक अपडेट्स के लिए NSE/BSE वेबसाइट चेक करें।