14 दिसंबर 2025: Gujarat CM Bhupendra Patel ने शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 13 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को 370 करोड़ रुपये से अधिक की स्कॉलरशिप सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से हस्तांतरित की है। यह वित्तीय सहायता नमो लक्ष्मी योजना, नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना, मुख्यमंत्री ज्ञान साधना मेरिट स्कॉलरशिप योजना और मुख्यमंत्री सेतु मेरिट स्कॉलरशिप योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत प्रदान की गई। यह वितरण 12 दिसंबर 2025 को गांधीनगर में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, शिक्षा मंत्री प्रदीपसिंह वाझा और शिक्षा राज्य मंत्री रीवाबा जडेजा भी उपस्थित थे। यह कदम न केवल छात्रों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि गुजरात को ‘विकसित गुजरात’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में मजबूत बनाएगा।
योजनाओं का विस्तृत विवरण
ये स्कॉलरशिप योजनाएं गुजरात सरकार की शिक्षा नीति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो कक्षा केजी से पीजी तक निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। कुल 370 करोड़ रुपये की यह राशि चार प्रमुख योजनाओं में वितरित की गई है। इन योजनाओं के तहत अब तक कुल 1,332 करोड़ रुपये से अधिक 13.50 लाख बच्चों को सहायता प्रदान की जा चुकी है।
सबसे प्रमुख योजना नमो लक्ष्मी योजना है, जो बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई। इस योजना के तहत अब तक 10.49 लाख बालिकाओं को 1,033 करोड़ रुपये की सहायता डीबीटी के माध्यम से दी गई है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को लक्षित करती है, जिनकी पारिवारिक आय सीमित है। योजना का उद्देश्य लड़कियों की ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाना है। इसी तरह, नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना विज्ञान स्ट्रीम में रुचि बढ़ाने के लिए है। इसके तहत 1.5 लाख छात्रों को 151.84 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। यह योजना उन छात्रों के लिए है जो कक्षा 11वीं और 12वीं में विज्ञान विषय चुनते हैं, लेकिन आर्थिक बाधाओं के कारण ऐसा नहीं कर पाते। गुजरात में विज्ञान स्ट्रीम वाले स्कूलों की संख्या 2,834 तक पहुंच गई है, जो 2001 में मात्र कुछ सौ थी।
दो अन्य मेरिट-आधारित योजनाएं मुख्यमंत्री ज्ञान साधना मेरिट स्कॉलरशिप योजना और मुख्यमंत्री सेतु मेरिट स्कॉलरशिप योजना हैं। पहली योजना के तहत 50,000 मेधावी छात्रों को 86.14 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि दूसरी में 60,000 छात्रों को 61.27 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। ये योजनाएं कक्षा 10वीं और 12वीं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए हैं, जो उच्च शिक्षा या व्यावसायिक कोर्स में प्रवेश लेते हैं। योग्यता मानदंड में न्यूनतम 60% अंक, पारिवारिक आय 6 लाख रुपये तक सीमित होना और गुजरात का मूल निवासी होना शामिल है। इन योजनाओं से छात्रों को इंजीनियरिंग, मेडिसिन और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
अधिकारियों के उद्गार और प्रेरणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात की शिक्षा व्यवस्था ने पिछले ढाई दशकों में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। केजी से पीजी तक शिक्षा की उनकी दृष्टि धीरे-धीरे साकार हो रही है। नमो लक्ष्मी और नमो सरस्वती योजनाएं सुनिश्चित करती हैं कि छात्र प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर भी सफल हों।” उन्होंने 2001 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी के प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने लड़कियों की शिक्षा को नई गति दी। “जब मोदी जी ने 2001 में जिम्मेदारी संभाली, तब राज्य कई चुनौतियों से जूझ रहा था, लेकिन उन्होंने गांव-गांव जाकर लड़कियों की शिक्षा का प्रचार किया। उन्होंने प्राप्त उपहारों की नीलामी से प्राप्त धनराशि लड़कियों की शिक्षा के लिए दान की, जिससे जागरूकता बढ़ी।”
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा, “आज 370 करोड़ रुपये से अधिक की स्कॉलरशिप 13 लाख से अधिक छात्रों के खातों में डीबीटी से हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री के दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने पर बधाई। ये निर्णय जन-केंद्रित हैं। नमो सरस्वती योजना से माता-पिता का आर्थिक बोझ कम होता है, ताकि बच्चे विज्ञान स्ट्रीम चुन सकें।” शिक्षा मंत्री प्रदीपसिंह वाझा ने जोर दिया, “ये योजनाएं विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात की नींव हैं। नमो लक्ष्मी से लड़कियों की उपस्थिति 73% बढ़ी और कक्षा 12 में नामांकन 13.59% अधिक हुआ। विज्ञान स्ट्रीम में 6.34% वृद्धि हुई।” राज्य मंत्री रीवाबा जडेजा ने कहा, “शिक्षा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। ये योजनाएं छात्रों के समग्र विकास, शिक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करती हैं।”
शिक्षा पर प्रभाव और आंकड़े
ये योजनाएं गुजरात की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 2001 में लड़कियों की ड्रॉपआउट दर 37% थी, जो अब 2% से नीचे आ गई है। शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव जैसे कार्यक्रमों से यह संभव हुआ। कॉलेजों की संख्या 775 से बढ़कर 3,200 से अधिक हो गई, इंजीनियरिंग कॉलेज 139 से 288, और मेडिकल सीटें 1,175 से 7,000 से अधिक। मुख्यमंत्री कन्या केलवणी निधि योजना से 24,000 से अधिक लड़कियां मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। डिजिटल क्लासरूम, स्मार्ट स्कूल, शिक्षक भर्ती, स्किल यूनिवर्सिटी और पीपीपी मॉडल से शिक्षा रोजगार से जुड़ रही है। ये स्कॉलरशिप न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, विशेषकर ग्रामीण और एससी/एसटी वर्गों में।
इससे गुजरात की जीडीपी में शिक्षा का योगदान बढ़ेगा, क्योंकि शिक्षित युवा उद्योगों की मांग के अनुरूप होंगे। राज्य सरकार ने होस्टल, स्टेम लैब और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर निवेश बढ़ाया है, जो रोजगार योग्यता को मजबूत करता है।
निष्कर्ष
Gujarat CM Bhupendra Patel द्वारा मंजूर 370 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप गुजरात के छात्रों के लिए एक मील का पत्थर है। यह न केवल शिक्षा की पहुंच बढ़ाएगी, बल्कि लिंग समानता, मेरिट-आधारित अवसर और विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करेगी। प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि से प्रेरित ये योजनाएं ‘विकसित भारत’ का सपना साकार करेंगी। छात्रों से अपील है कि वे ज्ञान अर्जन में समर्पित रहें और स्वदेशी मूल्यों पर गर्व करें। अधिक जानकारी के लिए शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। गुजरात सरकार को बधाई – शिक्षा से सशक्त गुजरात!