14 दिसंबर 2025: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार को अर्जेंटीना के फुटबॉल आइकन लियोनेल मेसी के ‘GOAT टूर ऑफ इंडिया’ इवेंट ने हिंसा और अव्यवस्था का रूप ले लिया। सॉल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के महज 20 मिनट के संक्षिप्त प्रवास के बाद उन्मादी प्रशंसकों ने सीटें तोड़ दीं, वस्तुएं फेंकीं, और पिच पर कूद पड़े। इस घटना ने न केवल आयोजकों की लापरवाही उजागर की, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। रविवार को राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति के सदस्य स्टेडियम पहुंचे, जहां क्षतिग्रस्त सीटें, टूटे रेलिंग और बिखरी मलबे की जांच की। मुख्य सचिव मनोज पंत ने पत्रकारों से कहा कि समिति 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मेसी और प्रशंसकों से माफी मांगी है, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का वादा किया है।

घटना की शुरुआत शनिवार दोपहर हुई, जब मेसी इंटर मियामी क्लब के साथ कोलकाता पहुंचे। सॉल्ट लेक स्टेडियम, जो एशिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटबॉल स्टेडियम है, में 80,000 से अधिक टिकट बिक चुके थे। आयोजक सतद्रु दत्ता ने दावा किया था कि यह एक ऐतिहासिक इवेंट होगा, जहां मेसी प्रशंसकों से मिलेंगे और फुटबॉल क्लिनिक आयोजित करेंगे। लेकिन मेसी का आगमन देरी से हुआ, और उनका स्टेडियम में ठहराव मात्र 20 मिनट रहा। इससे नाराज प्रशंसकों ने हंगामा मचा दिया। वीडियो फुटेज में दिखा कि प्रशंसक बाड़ तोड़कर पिच पर घुस आए, सीटें उखाड़कर फेंकीं, और पुलिस पर हमला बोला। दर्जनों लोग घायल हुए, जबकि स्टेडियम को भारी नुकसान पहुंचा। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया, लेकिन हालात बेकाबू हो गए। आयोजक दत्ता को कोलकाता एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया गया, और रविवार को बिधाननगर कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। उनके वकील ने जमानत याचिका खारिज होने पर निराशा जताई।

जांच समिति का गठन मुख्यमंत्री बनर्जी के निर्देश पर शनिवार रात ही हो गया। समिति का नेतृत्व रिटायर्ड कलकत्ता हाईकोर्ट जज अशिम कुमार राय कर रहे हैं, जिसमें मुख्य सचिव मनोज पंत और गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती शामिल हैं। रविवार सुबह समिति के सदस्य स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने प्रवेश द्वारों, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और गैलरी क्षेत्रों का निरीक्षण किया। क्षतिग्रस्त सीटें, टूटे हुए रेलिंग और बिखरा मलबा देखकर सदस्यों के चेहरे पर गंभीरता झलक रही थी। पंत ने कहा, “हम सुरक्षा चूक, आयोजन की कमियों और जिम्मेदारियों को तय करने पर फोकस कर रहे हैं। रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय भी सुझाए जाएंगे।” बंगाल गवर्नर भी स्टेडियम का दौरा कर चुके हैं, और उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार ने बताया कि आयोजकों पर धोखाधड़ी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और भीड़ प्रबंधन में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। टिकट खरीदने वाले प्रशंसकों को रिफंड का आश्वासन दिया गया है।

यह घटना भारतीय खेल आयोजनों की कमजोरियों को उजागर करती है। मेसी का भारत दौरा, जो मुंबई और अन्य शहरों में भी होना था, अब संकट में है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेडियम की क्षमता के बावजूद, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। एफआईएफए मानकों के अनुसार, ऐसे इवेंट्स में 1:50 का सिक्योरिटी रेशियो होना चाहिए, लेकिन यहां यह अनुपात बहुत कम था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने हंगामा बढ़ा दिया, जहां प्रशंसक मेसी की ‘अपमान’ का रोना रो रहे हैं। एक प्रशंसक ने कहा, “हमने हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन मेसी को ठीक से देखा तक नहीं। आयोजकों ने धोखा दिया।” दूसरी ओर, आयोजकों का दावा है कि देरी मेसी की फ्लाइट शेड्यूल के कारण हुई। लेकिन पुलिस जांच में यह झूठा साबित हो रहा है।

राजनीतिक रंग भी जुड़ गया है। भाजपा समर्थकों ने रविवार को कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर ‘इवेंट मैनेजमेंट’ में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर कहा, “ममता दीदी का ‘सुरक्षित बंगाल’ का दावा खोखला साबित हो गया। मेसी को बुलाकर शहर को बदनाम किया।” बनर्जी ने जवाब में कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेंगे।” केंद्रीय खेल मंत्रालय ने भी राज्य से रिपोर्ट मांगी है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश मजबूत हो सकें।

Messi Event Chaos के आर्थिक नुकसान का अनुमान 10 करोड़ रुपये से अधिक है। स्टेडियम की मरम्मत, चिकित्सा खर्च और रिफंड इसमें शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को ठेस पहुंची है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे ‘भारतीय फुटबॉल आयोजनों की विफलता’ करार दिया। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भविष्य में ऐसे इवेंट्स के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस, डिजिटल टिकटिंग और एआई-आधारित भीड़ मॉनिटरिंग अनिवार्य हो। साथ ही, आयोजकों को लाइसेंसिंग प्रक्रिया सख्त करनी चाहिए। यदि जांच ने दोषियों को सजा नहीं दी, तो बड़े इवेंट्स भारत से दूर भागेंगे।

अंत में, यह Messi Event Chaos एक सबक है कि उत्साह और लापरवाही का मिश्रण विनाशकारी हो सकता है। मेसी का दौरा, जो लाखों प्रशंसकों का सपना था, कड़वा अनुभव बन गया। सरकार को न केवल न्याय देना होगा, बल्कि खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा। तभी बंगाल फिर से ‘फुटबॉल का गढ़’ कहलाएगा। अन्यथा, यह हंगामा इतिहास का काला अध्याय बनेगा।

By SHAHID

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *