Delhi Air Quality is Poor, 14 दिसंबर 2025: राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा के जाल में फंस गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 460 पर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी (401-500) में आता है। कुछ इलाकों जैसे आनंद विहार (491), आशोक विहार (493) और डीटीयू (495) में यह 497 तक छू गया। घने स्मॉग ने शहर को ढक लिया है, जिससे इंडिया गेट, अक्षरधाम और हवाई अड्डे की दृश्यता शून्य के करीब हो गई। यह स्थिति न केवल निवासियों की सांसों को दूभर कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पर गहरा संकट पैदा कर रही है। मौसम विभाग के अनुसार, सुबह 8:30 बजे सापेक्ष आर्द्रता 100 प्रतिशत थी, जो प्रदूषण के फैलाव को रोक रही है।
दिल्ली का यह प्रदूषण संकट कोई नई बात नहीं है। हर सर्दी में यह शहर ‘गैस चैंबर’ में बदल जाता है, लेकिन इस बार की तीव्रता चिंताजनक है। शनिवार को AQI 431 से बढ़कर रविवार सुबह 462 हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा की गति बहुत कम (लगभग 2-3 किमी/घंटा) हो गई है, जिससे प्रदूषक कण हवा में लटके रहते हैं। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से आने वाली फसल अवशेष जलाने की धुंध, वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल मुख्य वजहें हैं। हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने का मौसम अभी समाप्त नहीं हुआ है, जो दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के PM2.5 कणों का 30-40 प्रतिशत हिस्सा पड़ोसी राज्यों से आता है। इसके परिणामस्वरूप, शहर में कोहरा-स्मॉग का मिश्रण बन गया है, जो सांस लेना मुश्किल कर रहा है।
इस जहरीली हवा के स्वास्थ्य प्रभाव गंभीर हैं। AQI 400 से ऊपर होने पर स्वस्थ लोगों को भी श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगियों के लिए यह घातक है। डॉक्टरों का कहना है कि स्मॉग में मौजूद PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों में जमा हो जाते हैं, जिससे फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक और समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली में पिछले हफ्ते अस्पतालों में श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ गई। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दिल्ली का AQI वैश्विक मानकों से 10 गुना अधिक है। दैनिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। हवाई अड्डों पर कम दृश्यता से उड़ानें प्रभावित हुईं, सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा, और स्कूलों ने कक्षा 9वीं से 11वीं तक हाइब्रिड मोड लागू कर दिया। आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाएं तो, प्रदूषण से दिल्ली को प्रतिवर्ष 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जिसमें उत्पादकता घाटा और चिकित्सा खर्च शामिल हैं। पर्यटन उद्योग भी ठप हो गया है, क्योंकि पर्यटक दिल्ली की ‘धुंध’ से दूर भाग रहे हैं।
प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए हैं। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने शनिवार शाम ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज IV को लागू कर दिया, जो सबसे सख्त स्तर है। इसके तहत:
- सभी निर्माण और धूल पैदा करने वाले कार्य पूर्णतः बंद।
- 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित।
- मेट्रो, बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन।
- औद्योगिक इकाइयों पर सख्त निगरानी।
- ओड-ईवन योजना की संभावना।
GRAP के चार चरण हैं: स्टेज 1 (AQI 201-300: खराब), स्टेज 2 (301-400: बहुत खराब), स्टेज 3 (401-450: गंभीर), और स्टेज 4 (450+: गंभीर+), जिसमें सभी पूर्व चरण लागू होते हैं। दिल्ली सरकार ने मास्क वितरण और मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए हैं। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि पड़ोसी राज्यों पर दबाव बनाने में कमी है। पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को हवा की गति बढ़ने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन मंगलवार तक AQI 300-350 के बीच रह सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि व्यक्तिगत स्तर पर मास्क पहनें, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें, और बाहर कम निकलें। दीर्घकालिक समाधान के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, हरित ऊर्जा, और पराली प्रबंधन नीतियां जरूरी हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा, “यह संकट सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें स्रोत पर प्रदूषण रोकना होगा।” एनजीओ जैसे क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क ने मांग की है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को मजबूत किया जाए, जिसका लक्ष्य 2024 तक AQI 100 से नीचे लाना था, लेकिन असफल रहा।
अंत में, दिल्ली का यह प्रदूषण चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय लापरवाही हमें निगल रही है। यदि तत्काल और सतत प्रयास न हुए, तो आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ हवा का सपना ही देखेंगी। सरकार, उद्योग और नागरिकों को एकजुट होकर लड़ना होगा। अन्यथा, ‘सांस लेने का अधिकार’ केवल संविधान की किताबों तक सीमित रह जाएगा।