12 दिसंबर 2025: भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने गुजरात के तट पर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। 10 दिसंबर को अरब सागर में भारतीय जल सीमा में घुसपैठ करने वाली पाकिस्तानी मछली पकड़ने वाली नाव ‘अल वाली’ को जब्त कर लिया गया। नाव पर सवार 11 पाकिस्तानी चालक-नाविकों को हिरासत में ले लिया गया है। यह घटना भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। आईसीजी के अनुसार, नाव अवैध रूप से भारतीय जल में मछली पकड़ रही थी, जिससे समुद्री संसाधनों का शोषण हो रहा था। हिरासत में लिए गए चालकों को जखौ मरीन पुलिस स्टेशन ले जाया गया है, जहां पूछताछ जारी है। इस रिपोर्ट में हम इस कार्रवाई के विवरण, कारणों, प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
कार्रवाई 10 दिसंबर की सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई, जब आईसीजी की एक पेट्रोलिंग यूनिट ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र के निकट संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नाव भारतीय एक्विटोरियल एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) में 10 नॉटिकल मील अंदर घुस आई थी। आईसीजी के प्रवक्ता ने बताया कि नाव पर कोई हथियार या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली, लेकिन यह स्पष्ट था कि चालक भारतीय जल में मछली पकड़ने के लिए आए थे। नाव को तुरंत घेराबंदी कर ली गई, और चालकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, नाव को जखौ बंदरगाह पर लाया गया, जहां से चालकों को कच्छ जिले के जखौ मरीन पुलिस स्टेशन सौंप दिया गया। सभी 11 चालक स्वस्थ हैं, और उनकी उम्र 25 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि वे पाकिस्तानी सिंध प्रांत के कराची के निकट से निकले थे, और खराब मौसम के बहाने भारतीय जल में भटक गए।
यह घटना भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा पर बढ़ते तनाव का हिस्सा है। गुजरात का कच्छ क्षेत्र, जो सर क्रीक विवाद का केंद्र है, हमेशा से संवेदनशील रहा है। सर क्रीक एक 96 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जिसकी सीमा निर्धारण पर दोनों देश असहमत हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल जनवरी से अब तक आईसीजी ने 20 से अधिक पाकिस्तानी नावों को जब्त किया है, जिनमें से अधिकांश अवैध मछली पकड़ने के आरोप में थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी मछुआरे आर्थिक तंगी के कारण भारतीय जल में घुसते हैं, जहां समुद्री जीवन अधिक प्रचुर है। पाकिस्तान में मछली पकड़ने का उद्योग संकट में है, और ईंधन की कमी से नावें लंबी दूरी तय करने को मजबूर होती हैं। टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार, यह नाव भी पुरानी और बिना जीपीएस के थी, जो घुसपैठ को आसान बनाती है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों को शक है कि कुछ मामलों में यह जासूसी या तस्करी का आवरण भी हो सकता है।
इस कार्रवाई का असर न केवल सुरक्षा बलों पर पड़ा है, बल्कि स्थानीय मछुआरों पर भी। गुजरात के कच्छ जिले के मछुआरा समुदाय ने आईसीजी की तारीफ की, लेकिन साथ ही अपनी सुरक्षा की मांग की। एक स्थानीय मछुआरा नेता, रामेश भाई ने कहा, “पाकिस्तानी नावें हमारी आजीविका छीन लेती हैं। हमें भी मजबूत निगरानी चाहिए।” पीजीयूआरयूएस की रिपोर्ट में उल्लेख है कि अवैध मछली पकड़ने से भारत को सालाना 500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। इसके अलावा, यह घटना पर्यावरण पर भी असर डालती है—ओवरफिशिंग से समुद्री पारिस्थितिकी असंतुलित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों को संयुक्त गश्त या समझौते की जरूरत है, लेकिन सर क्रीक विवाद के कारण यह मुश्किल है।
सरकारी स्तर पर प्रतिक्रिया त्वरित रही। गृह मंत्रालय ने आईसीजी को बधाई दी, और विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को डिप्लोमेटिक नोट भेजा है। फेसबुक पर आईसीजी के आधिकारिक पेज ने पोस्ट किया कि नाव का नाम ‘अल वाली’ है, और चालकों को मानवीय आधार पर भोजन व चिकित्सा प्रदान की जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पूछताछ में कोई आतंकवादी लिंक नहीं मिला, लेकिन नाव की जांच जारी है। इंडिया टीवी न्यूज ने बताया कि यह कार्रवाई ‘सागर रक्षक’ अभियान का हिस्सा है, जिसमें आईसीजी ने हाल ही में नई पेट्रोल बोट्स तैनात की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया, और बजट में आईसीजी के लिए 10% वृद्धि की घोषणा की।
विशेषज्ञों की राय में, यह घटना द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती है। रक्षा विश्लेषक प्रवीण दाहिया ने कहा, “अवैध घुसपैठ छोटी लगती है, लेकिन यह बड़े संघर्ष का बीज बो सकती है। भारत को ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी बढ़ानी चाहिए।” पर्यावरण मंत्रालय ने भी चिंता जताई कि समुद्री सीमा पर प्रदूषण और अवैध शिकार बढ़ रहा है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच ‘फिशिंग एग्रीमेंट’ की आवश्यकता है, जैसा कि भारत श्रीलंका के साथ है।
निष्कर्षतः, आईसीजी की यह सफल कार्रवाई भारत की समुद्री संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक है। 11 पाकिस्तानी चालकों की हिरासत ने न केवल अवैध गतिविधि रोकी, बल्कि संदेश दिया कि भारतीय जल किसी की मनमानी नहीं। हालांकि, आर्थिक और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, दोनों देशों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। यह घटना हमें याद दिलाती है कि शांति और सुरक्षा एक सिक्के के दो पहलू हैं। स्थानीय मछुआरों को सुरक्षा देकर ही सतत विकास संभव है।