12 दिसंबर 2025: अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 8 दिसंबर की रात को एक मिनी ट्रक, जिसमें असम के तिनसुकिया जिले के 22 मजदूर सवार थे, हायुलियांग और चागलगम के बीच संकरी सड़क पर फिसल गया और 700 मीटर गहरी खाई में समा गया। हादसे में कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अन्य लापता बताए जा रहे हैं। एक मजदूर चमत्कारिक रूप से बच गया, जिसने 4 किलोमीटर पैदल चलकर इस घटना की सूचना दी। यह हादसा भारत-चीन सीमा के निकट होने के कारण सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े कर रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस त्रासदी के कारणों, बचाव कार्यों, प्रभावों और सरकारी प्रतिक्रिया पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

हादसा 8 दिसंबर की रात करीब 10 बजे हुआ, जब ट्रक चालक तेज रफ्तार और खराब सड़क के कारण नियंत्रण खो बैठा। ट्रक में सवार मजदूर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के एक प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए जा रहे थे। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, वाहन हायुलियांग-चागलगम मार्ग पर एक घुमावदार मोड़ पर फिसला, जहां सड़क की चौड़ाई मात्र 10-12 फीट है। खाई की गहराई 700 मीटर होने से वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, और शवों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। एकमात्र जीवित बचे मजदूर, जिनका नाम गोविंद बोर्डोलोई बताया जा रहा है, ने बताया कि हादसे के बाद वह घायल अवस्था में खाई से चढ़कर 4 किलोमीटर दूर एक चौकी तक पहुंचा, जहां से बचाव टीम को सूचना दी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह उनकी साहसिक यात्रा ने ही पूरे हादसे का खुलासा किया, वरना लाशें दिनों तक दफन रहतीं।

अंजाव जिला, जो भारत-चीन सीमा से सटा हुआ है, अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के लिए कुख्यात है। यहां की सड़कें पहाड़ी इलाकों में बनी हैं, जहां भूस्खलन, भारी बारिश और कोहरा आम हैं। दिसंबर का महीना होने के कारण रात में दृश्यता कम थी, जो हादसे का एक प्रमुख कारण हो सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रक पर ओवरलोडिंग भी एक कारक था—22 मजदूरों के अलावा सामान भी लदा था, जिससे वाहन असंतुलित हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में सड़क निर्माण तेजी से हो रहा है, लेकिन रखरखाव की कमी से ऐसी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। पिछले एक वर्ष में अरुणाचल में इसी तरह के 15 हादसों में 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। यह घटना न केवल मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है।

बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बीआरओ और सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं। दुर्गम इलाके में पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर और रोप-वे का सहारा लिया गया। दिसंबर 11 तक 18 शव बरामद हो चुके थे, जबकि तीन मजदूर अभी भी लापता हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, बचाव टीमों को खराब मौसम और अंधेरे का सामना करना पड़ा, जिससे ऑपरेशन में देरी हुई। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी जिला प्रशासन को तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तिनसुकिया जिले में शोक सभा बुलाई और मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये की सहायता का ऐलान किया।

इस त्रासदी का असर असम के तिनसुकिया जिले पर सबसे ज्यादा पड़ा है। मृतकों में अधिकांश 25-40 वर्ष के युवा मजदूर थे, जो परिवार का एकमात्र सहारा थे। एक मृतक के भाई ने बताया, “वे बीआरओ के प्रोजेक्ट पर मजदूरी करने गए थे, ताकि घर का गुजारा चले। अब परिवार बेसहारा हो गया।” सेंटिनल असम की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में शोक की लहर दौड़ गई है, और कई परिवारों ने मुआवजे की मांग की। यह हादसा प्रवासी मजदूरों की जोखिम भरी जिंदगी को दर्शाता है। पूर्वोत्तर भारत से हजारों मजदूर अरुणाचल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में काम करने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा उपाय अपर्याप्त हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए सख्त चेकिंग और ड्राइवर ट्रेनिंग जरूरी है।

सरकार की प्रतिक्रिया त्वरित रही, लेकिन दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सड़कों पर सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया। अरुणाचल सरकार ने दुर्घटना-प्रवण सड़कों पर रेलिंग और लाइटिंग लगाने की योजना बनाई। पर्यावरण विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते भूस्खलनों पर चिंता जताई, जो सड़कों को और असुरक्षित बना रहे हैं। द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि एकमात्र बचे मजदूर को चिकित्सा सहायता दी जा रही है, और वह पूछताछ में सहयोग कर रहा है।

यह हादसा न केवल एक सड़क दुर्घटना है, बल्कि पूर्वोत्तर के विकास मॉडल पर सवाल है। सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचा मजबूत करने के नाम पर मजदूरों की जानें जोखिम में डाली जा रही हैं। सरकार को मजदूर बीमा, बेहतर परिवहन और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए, हमें आशा है कि लापता मजदूर सुरक्षित मिलें। यह त्रासदी हमें सतर्क करती है कि विकास की दौड़ में मानवीय मूल्यों को न भुलाया जाए।

By SHAHID

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