12 दिसंबर 2025: जापान के पूर्वोत्तर क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक शक्तिशाली भूकंप ने दहशत फैला दी। 6.7 तीव्रता का यह भूकंप आओमोरी प्रांत के पूर्वी तट से 20 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिसके बाद जापान मौसम एजेंसी (जेएमए) ने सुनामी चेतावनी जारी कर दी। हालांकि, चेतावनी कुछ घंटों बाद ही हटा ली गई, क्योंकि लहरें एक मीटर से कम रहीं। यह घटना इस सप्ताह का दूसरा बड़ा झटका है, जिसने देश को मेगा-क्वेक की आशंका के बीच सतर्क कर दिया है। कोई मौत या बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन हजारों लोगों को तटीय इलाकों से खाली कराया गया। इस रिपोर्ट में हम इस भूकंप के कारणों, प्रभावों, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सरकारी प्रतिक्रिया पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भूकंप का केंद्र आओमोरी प्रांत के पूर्वी तट से लगभग 100 किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में था। जेएमए के अनुसार, यह 11:44 बजे जापानी समय (02:44 जीएमटी) पर आया। प्रारंभिक आंकड़ों में तीव्रता 6.9 बताई गई, लेकिन बाद में इसे 6.7 पर तय किया गया। जापान की भूकंपीय तीव्रता स्केल पर कुछ इलाकों में शिंदो 4 दर्ज की गई, जो मध्यम स्तर की है—इसमें वस्तुएं गिर सकती हैं और लोग डर महसूस कर सकते हैं। प्रभावित क्षेत्रों में होक्काइडो, आओमोरी, इवाते, मियागी और अकिता प्रांत शामिल हैं। हाचिनोहे शहर में शिंदो 4 की तीव्रता महसूस की गई, जबकि अन्य स्थानों पर हल्के झटके आए।

सुनामी चेतावनी का अलार्म बजते ही तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया। जेएमए ने होक्काइडो के कुछ हिस्सों और आओमोरी, इवाते व मियागी के तटों के लिए चेतावनी जारी की, जिसमें एक मीटर ऊंची लहरों की संभावना जताई गई। यह जापान की तीन-स्तरीय चेतावनी प्रणाली का सबसे निचला स्तर था, जिसमें लोगों को समुद्र और तट से दूर रहने की सलाह दी गई, लेकिन पूर्ण निकासी जरूरी नहीं थी। वास्तव में, आओमोरी और होक्काइडो में 20 सेंटीमीटर ऊंची लहरें दर्ज की गईं, जो ‘समुद्र स्तर में उतार-चढ़ाव’ जैसी थीं। दोपहर 2 बजे तक चेतावनी हटा ली गई, क्योंकि कोई बड़ा खतरा नहीं बचा। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले सोमवार को इसी क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जो इस घटना को और चिंताजनक बनाता है।

भूकंप के तत्काल प्रभाव सीमित रहे। कोई मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है, न ही कोई बड़ा नुकसान दर्ज हुआ। हालांकि, आओमोरी प्रांत के मुत्सु शहर सहित तटीय क्षेत्रों से 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। आपातकालीन चेतावनी ऐप ‘एनईआरवी’ के जरिए निकासी के आदेश दिए गए। भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक आए, जिनमें 4.3 से 5.7 तीव्रता के झटके शामिल हैं। सोमवार के भूकंप के बाद से 31 से अधिक भूकंप (शिंदो 1 से ऊपर) दर्ज हो चुके हैं, और यह सबसे बड़ा था। न्यूक्लियर रेगुलेशन अथॉरिटी ने पुष्टि की कि परमाणु संयंत्रों में कोई असामान्यता नहीं है, जो 2011 के फुकुशिमा आपदा के बाद एक बड़ी राहत है।

इस क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति इसे भूकंप-प्रवण बनाती है। जापान ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां प्रशांत प्लेट अन्य प्लेटों के नीचे धंस रही है, जिससे सालाना 1,500 से अधिक भूकंप आते हैं। आओमोरी और आसपास का क्षेत्र नानकाई ट्रफ से जुड़ा है, जहां विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 30 वर्षों में 60-90% संभावना से मेगा-क्वेक (8 तीव्रता से ऊपर) आ सकता है। यह भूकंप 1944 और 1946 के बड़े भूकंपों की याद दिलाता है। सितंबर में जापान की भूकंपीय जांच समिति ने चेतावनी दी थी कि नानकाई ट्रफ में ऐसा भूकंप 20 मीटर ऊंची सुनामी ला सकता है, जिसमें 3 लाख मौतें हो सकती हैं। 2011 का 9.0 तीव्रता का भूकंप, जिसमें 18,000 से अधिक लोग मारे गए, अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। जापान टाइम्स के अनुसार, सोमवार के 7.5 तीव्रता भूकंप के बाद से एक सप्ताह के लिए बड़ा भूकंप आने की संभावना अधिक बताई गई है, और यह चेतावनी अभी भी जारी है।

सरकारी प्रतिक्रिया त्वरित और प्रभावी रही। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा, “यह भूकंप मेगा-क्वेक चेतावनी के दायरे में नहीं आता, लेकिन सतर्कता बरतें। निकासी मार्ग जांचें और आपातकालीन सामग्री तैयार रखें।” जेएमए ने लोगों से आपदा रोकथाम योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने को कहा। स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों और कार्यालयों में अभ्यास कराए, जबकि रेल और हवाई सेवाओं में कोई बड़ा व्यवधान नहीं हुआ। यह जापान की मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली का प्रमाण है, जो तकनीकी सतर्कता पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और प्लेट टेक्टॉनिक्स के संयोजन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए दीर्घकालिक तैयारी जरूरी है।

इस भूकंप ने जापान को फिर से याद दिलाया कि प्रकृति की मार कब आ जाए, कोई भरोसा नहीं। सौभाग्य से, न्यूनतम नुकसान के साथ टल गया, लेकिन यह एक चेतावनी है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि तटीय निवासियों को सुनामी किट (जल, भोजन, दवाएं) हमेशा तैयार रखें। भविष्य में मेगा-क्वेक से बचाव के लिए वनीकरण, मजबूत इमारतें और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना होगा। जापान की लचीलापन इसकी ताकत है, जो दुनिया को सबक देता है।

By SHAHID

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