12 दिसंबर 2025: बिहार में सर्दी ने अब पूरे जोर-शोर से दस्तक दे दी है। राज्य के नौ प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जिससे ठंड की लहर ने आमजन की जिंदगी को ठिठुरा दिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की चेतावनी के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्पन्न यह कोल्ड वेव 15 दिसंबर तक और तेज हो सकती है। घने कोहरे ने यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है, जबकि किसानों और गरीब तबके पर इसका बोझ सबसे ज्यादा पड़ा है। इस रिपोर्ट में हम इस मौसमी बदलाव के कारणों, प्रभावों और उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बिहार में सर्दी का यह आगमन असामान्य रूप से जल्दी और तीव्र हुआ है। सामान्यतः दिसंबर के मध्य तक तापमान 12-15 डिग्री के बीच रहता है, लेकिन इस बार यह 5-10 डिग्री तक लुढ़क गया। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में राज्य के 25 जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिसमें दृश्यता मात्र 50 मीटर तक सिमट गई। नौ शहरों—किशनगंज, भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, सीतामढ़ी और मधुबनी—में तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। किशनगंज सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। भागलपुर में 8 डिग्री, जबकि पटना में 9-10 डिग्री के बीच रहा। मुजफ्फरपुर और दरभंगा में 9.5 डिग्री, पूर्णिया में 9.2, सहरसा में 9.8, सीतामढ़ी में 9.4 और मधुबनी में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। ये आंकड़े न केवल राज्य की राजधानी पटना को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि उत्तरी और पूर्वी बिहार के इन शहरों में जीवन को पूरी तरह ठप कर चुके हैं।

इस तापमान गिरावट के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है, जो जम्मू-कश्मीर से गुजरते हुए बिहार तक पहुंचा है। आईएमडी के अनुसार, 1 दिसंबर से सक्रिय यह विक्षोभ ठंडी हवाओं को लाया, जिससे न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं भी जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण सर्दी के पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे ऐसी अचानक कोल्ड वेव आम हो रही हैं। पटना मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. आर.के. सिंह ने बताया, “यह कोल्ड वेव 9 दिसंबर से शुरू हुई और अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगी। दृश्यता कम होने से सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है।”

इस सर्द लहर का असर राज्य की दैनिक जिंदगी पर गहरा पड़ रहा है। सुबह-सुबह घने कोहरे के कारण स्कूलों में देरी से कक्षाएं शुरू हो रही हैं, जबकि ट्रेन और हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है। पटना एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, और एनएच-31 पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। शहरों में सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है, लोग दो-दो स्वेटर पहनकर घरों से निकल रहे हैं। गरीब झुग्गी-झोपड़ी वासियों के लिए यह सबसे कठिन समय है। मुजफ्फरपुर की एक महिला, रानी देवी ने बताया, “रात में ठंड इतनी तेज है कि बच्चे सो नहीं पाते। लकड़ियां जलाकर गुजारा कर रहे हैं, लेकिन कोहरा सांस लेना मुश्किल कर देता है।” इसी तरह, दरभंगा में बुजुर्गों को सांस संबंधी बीमारियां बढ़ गई हैं। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है।

कृषि क्षेत्र पर भी इस कोल्ड वेव का बुरा असर पड़ा है। बिहार में रबी फसलें जैसे गेहूं, चना और सरसों की बुआई का समय चल रहा है, लेकिन ठंड से बीज अंकुरित नहीं हो पा रहे। भागलपुर के किसान संघ के अध्यक्ष रामविलास यादव ने कहा, “तापमान 10 डिग्री से नीचे रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे फसल क्षति हो सकती है। सरकार को मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए।” आईएमडी ने चेतावनी दी है कि 15 दिसंबर के बाद ठंड और तेज होगी, जिससे फसल नुकसान बढ़ सकता है। इसके अलावा, जलाशयों में जल स्तर घट रहा है, जो गर्मियों में सूखे का संकेत दे रहा है।

शहरों में कोहरे का प्रकोप भी कम नहीं है। पटना, किशनगंज समेत 10 शहरों में दृश्यता शून्य के करीब रही। यातायात पुलिस ने ड्राइवरों को धीमी गति से चलने की सलाह दी है। रेलवे ने कई ट्रेनों का समय बदला, जबकि हाईवे पर फिसलन से दो-तीन हादसे हो चुके हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण कोहरे को और घना बना रहा है, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब हो गया। पूर्णिया में एक्यूआई 250 के पार पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में है।

सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाए हैं। बिहार सरकार ने स्कूलों में छुट्टियां बढ़ाने का आदेश दिया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने मुफ्त दवाओं का वितरण शुरू किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गरीबों को कंबल वितरित किए जाएं। जिला प्रशासन ने हीटिंग पॉइंट्स स्थापित किए हैं, जहां लोग गर्म चाय और भोजन पा सकते हैं। आईएमडी ने भी ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें लोगों को घरों में रहने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई।

विशेषज्ञों की राय में, यह कोल्ड वेव जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। पटना विश्वविद्यालय के पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. अनिल कुमार ने कहा, “हिमालय की बर्फ पिघलने से ठंडी हवाएं तेज हो रही हैं। हमें हरित ऊर्जा पर जोर देना होगा।” भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए वनीकरण और प्रदूषण नियंत्रण जरूरी है।

निष्कर्षतः, बिहार के इन नौ शहरों में तापमान की गिरावट ने सर्दी को एक आपदा का रूप दे दिया है। आमजन को सतर्क रहना होगा—गर्म कपड़े, पौष्टिक भोजन और डॉक्टर की सलाह लें। सरकार को लंबी अवधि की योजना बनानी चाहिए, ताकि ऐसी मौसमी चुनौतियां जीवन को नुकसान न पहुंचाएं। यह सर्दी न केवल ठंड लाई है, बल्कि एकजुटता का संदेश भी।

By SHAHID

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