12 दिसंबर 2025: नए साल 2026 के जश्न पर पटना चिड़ियाघर (संजय गांधी जैविक उद्यान) की सैर महंगी हो गई है। 1 जनवरी को प्रवेश शुल्क में तीन गुना वृद्धि की गई है – वयस्कों का टिकट 50 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये और 5 से 12 वर्ष के बच्चों का 20 रुपये से 60 रुपये कर दिया गया। यह फैसला शहर के 14 प्रमुख पार्कों पर लागू होगा, जिसमें ईको पार्क, वीर कुंवर सिंह पार्क और एनर्जी पार्क शामिल हैं। पर्यटन विभाग का दावा है कि यह भीड़ प्रबंधन के लिए है, लेकिन पर्यटकों में असंतोष की लहर दौड़ गई है। 25 दिसंबर से एडवांस बुकिंग शुरू हो जाएगी, ताकि 1 जनवरी को होने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। यह वृद्धि केवल एक दिन के लिए है, लेकिन इससे परिवारिक पिकनिक प्लान प्रभावित हो रहे हैं।
पटना चिड़ियाघर, बिहार का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल, हर न्यू ईयर पर हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। पिछले वर्ष 1 जनवरी को यहां 50,000 से अधिक विजिटर्स आए थे, जिससे ट्रैफिक जाम और सुरक्षा चुनौतियां पैदा हुईं। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने यह कदम उठाया। चिड़ियाघर के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया, “नई दरें केवल 1 जनवरी के लिए हैं। सामान्य दिनों में 50 रुपये ही लगेंगे। अतिरिक्त काउंटर लगाए जाएंगे और सिक्योरिटी पर्सनल तैनात किया जाएगा।” लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह राजस्व बढ़ाने का बहाना मात्र है। चिड़ियाघर का वार्षिक बजट 20 करोड़ रुपये है, जिसमें टिकट बिक्री से 30% राजस्व आता है। इस वृद्धि से 1 जनवरी को अतिरिक्त 75 लाख रुपये की कमाई हो सकती है।
वृद्धि की विस्तृत जानकारी देखें तो वयस्क टिकट में 100% की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सामान्य से तुलना में तीन गुना है। अप्रैल 2025 में ही सामान्य टिकट 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया था, जो पहले से ही विवादास्पद था। अब न्यू ईयर पर यह 150 रुपये पहुंच गया। बच्चों के लिए भी 20 से 60 रुपये – यानी 200% वृद्धि। अन्य सुविधाओं पर भी असर पड़ेगा: बोटिंग का किराया 50 रुपये से 100 रुपये, मछलीघर एंट्री 20 से 50 रुपये। तीन माह का पास 1,000 से 1,500 रुपये और वार्षिक पास 2,500 से 3,750 रुपये हो गया। ईको पार्क में वयस्क टिकट 40 से 120 रुपये और बच्चों का 20 से 60 रुपये। कुल 14 पार्कों में यह पैटर्न समान है, जो पर्यटन को प्रभावित कर सकता है।
पर्यटकों का असंतोष सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है। ट्विटर पर #PatnaZooFeeHike ट्रेंड कर रहा है, जहां एक यूजर ने लिखा, “परिवार के साथ न्यू ईयर मनाने का प्लान था, लेकिन अब बजट डबल हो गया। सरकार गरीबों की जेब काट रही है।” स्थानीय निवासी रवि शर्मा ने कहा, “चिड़ियाघर शिक्षा और मनोरंजन का केंद्र है, न कि कमाई का स्रोत। यह वृद्धि मध्यम वर्ग को बाहर कर देगी।” विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में पर्यटन विकास के लिए सस्ती सुविधाएं जरूरी हैं। पर्यटन विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह ने बताया, “पटना चिड़ियाघर में 1,500 से अधिक प्रजातियों के जानवर हैं, जो पर्यावरण जागरूकता बढ़ाते हैं। लेकिन महंगाई से विजिटरशिप 20% गिर सकती है।”
यह फैसला विभाग की फीस निर्धारण समिति द्वारा लिया गया, जो पर्यटन बोर्ड की सिफारिश पर आधारित है। समिति का तर्क है कि बढ़ी फीस से रखरखाव, सफाई और सुरक्षा पर खर्च बढ़ेगा। चिड़ियाघर में 54 एकड़ क्षेत्र में 110 प्रजातियों के 1,100 जानवर हैं, जिनकी देखभाल महंगी है। पिछले वर्ष कोविड के बाद विजिटरशिप 30% बढ़ी, लेकिन राजस्व अभाव रहा। हालांकि, विपक्षी दल आरजेडी ने इसे ‘पर्यटक-विरोधी’ बताते हुए विरोध जताया। विधायक अजय सिंह ने कहा, “यह नीति गरीबों को पार्कों से दूर करेगी। हम विधानसभा में सवाल उठाएंगे।”
सकारात्मक पक्ष भी हैं। एडवांस बुकिंग से कतारें कम होंगी और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा। चिड़ियाघर प्रबंधन ने अतिरिक्त पार्किंग और व्हीलचेयर सुविधा का वादा किया है। लेकिन कुल मिलाकर, यह वृद्धि बिहार के पर्यटन को झटका दे सकती है। राज्य में 2025 में 2 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें 40% पार्कों-चिड़ियाघरों पर केंद्रित थे। यदि ऐसी नीतियां जारी रहीं, तो आंकड़े गिर सकते हैं।
निष्कर्षतः, पटना चिड़ियाघर की तीन गुना फीस वृद्धि न्यू ईयर उत्साह पर पानी फेर रही है। भीड़ प्रबंधन जरूरी है, लेकिन सस्ती पहुंच भी। सरकार को वैकल्पिक राजस्व स्रोत जैसे स्पॉन्सरशिप पर विचार करना चाहिए। पर्यटक अब प्लान बी तलाश रहे हैं – क्या पता, यह विवाद चिड़ियाघर को और चर्चित बना दे!