12 दिसंबर 2025: बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में घोषणा की है कि राज्य के छह जिलों के 44 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। यह पहल बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अधीन होगी और इसका उद्देश्य हर प्रखंड में स्नातक स्तर की शिक्षा को सुलभ बनाना है। मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर जैसे जिलों में चिह्नित प्रखंडों में ये कॉलेज खुलेंगे, जहां आज तक उच्च शिक्षा की सुविधा न के बराबर है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल ने विश्वविद्यालयों को 24 घंटे के भीतर प्रखंडवार सूची भेजने का निर्देश दिया है, ताकि जमीन चिह्नीकरण और निर्माण कार्य तत्काल शुरू हो सके। यह कदम ग्रामीण युवाओं, खासकर लड़कियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित होगा, जो शिक्षा के अभाव में पलायन करने को मजबूर होते हैं।
बिहार में उच्च शिक्षा का विस्तार लंबे समय से एक चुनौती रहा है। राज्य के अधिकांश प्रखंडों में स्नातक कोर्सेज की कमी के कारण लाखों छात्रों को जिला मुख्यालय या शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि कई छात्र शिक्षा से वंचित भी रह जाते हैं। सरकार की यह योजना पंचायत स्तर पर प्लस-2 शिक्षा के बाद स्नातक शिक्षा को हर प्रखंड तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। बजट में इसकी घोषणा के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। विश्वविद्यालयों ने उन प्रखंडों की सूची तैयार की है जहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है। मुजफ्फरपुर जिले के चार प्रखंड – औराई, बोचहां, मुरौल और गायघाट – इसका प्रमुख उदाहरण हैं। इन प्रखंडों में हजारों युवा उच्च शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही क्वालिटी एजुकेशन मिल सकेगी।
छह जिलों में कुल 44 प्रखंडों का चयन कैसे किया गया, इसकी प्रक्रिया पारदर्शी रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट मंगाई, जिसमें पहले से मौजूद कॉलेजों और कमी वाले प्रखंडों का आकलन शामिल था। वैशाली जिले के कुछ प्रखंडों में भी इसी तरह की कमी है, जहां ग्रामीण इलाकों के छात्रों को दूरी तय करनी पड़ती है। पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जैसे सीमावर्ती जिलों में, जहां प्रवासन की समस्या अधिक है, ये कॉलेज स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देंगे। सीतामढ़ी और शिवहर में भी प्रखंड स्तर पर शिक्षा का अभाव लंबे समय से एक मुद्दा रहा है। कुल मिलाकर, ये 44 प्रखंड ऐसे चुने गए हैं जहां स्नातक शिक्षा का घोर अभाव है, ताकि प्राथमिकता उन क्षेत्रों को मिले जहां जरूरत सबसे अधिक है।
प्रक्रिया की रूपरेखा भी स्पष्ट है। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा मांगी गई सूची के आधार पर जिला प्रशासन को जमीन चिह्नीकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक बार जमीन उपलब्ध हो जाने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, और 2025-26 के वित्तीय वर्ष के अंत तक कॉलेजों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। प्रत्येक कॉलेज में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम के बेसिक कोर्स शुरू होंगे, जिनमें स्थानीय शिक्षकों की भर्ती पर जोर दिया जाएगा। विभाग का अनुमान है कि इससे कम से कम 20,000 नए सीटें सृजित होंगी, जो ग्रामीण छात्रों के लिए राहत लेकर आएंगी। इसके अलावा, डिजिटल क्लासरूम और लाइब्रेरी जैसी आधुनिक सुविधाओं का प्रावधान भी किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता पर कोई समझौता न हो।
इस योजना के लाभ अनेक हैं। सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण छात्रों को मिलेगा, जो अब घर से दूर रहकर पढ़ाई करने की मजबूरी से मुक्त हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ड्रॉपआउट रेट में 20-25% की कमी आएगी, खासकर लड़कियों में। बिहार में लड़कियों की उच्च शिक्षा दर राष्ट्रीय औसत से 10% कम है, और यह पहल इसे सुधारने में सहायक होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यात्रा खर्च की बचत एक बड़ा राहत पैकेज होगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से शिक्षकों और स्टाफ के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा, “यह योजना बिहार को शिक्षा के मानचित्र पर मजबूत बनाएगी। हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज का सपना साकार हो रहा है।”
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। जमीन अधिग्रहण में देरी या बजट की कमी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। लेकिन सरकार का दृढ़ संकल्प दिख रहा है। पिछले वर्षों में बिहार ने प्लस-2 स्तर पर इसी तरह की पहल की थी, जिससे नामांकन में 15% वृद्धि हुई। अब स्नातक स्तर पर यह विस्तार बिहार को ‘शिक्षा हब’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञ नागेन्द्र कुमार सिंह, जो उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हैं, ने बताया, “यह न केवल शिक्षा का विस्तार है, बल्कि सामाजिक समावेश की दिशा में एक कदम है। ग्रामीण युवा अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।”
कुल मिलाकर, बिहार के 44 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना राज्य की शिक्षा नीति में एक नया अध्याय जोड़ेगी। यह ग्रामीण भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास है, जहां शिक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। आने वाले वर्षों में इससे न केवल साक्षरता दर बढ़ेगी, बल्कि बिहार के युवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे। सरकार और विभाग की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद है कि 2026 तक ये कॉलेज पूरी क्षमता से चालू हो जाएंगे। यह बदलाव बिहार के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।